आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी, प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया और संगठन मंत्री डॉ. करन बारोट ने आज एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मीडिया को संबोधित करते हुए ‘आप’ के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा, “बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि गुजरात में किसानों की हालत बहुत खराब है। वैसे तो पूरे गुजरात में बारिश कम हुई है, लेकिन देवभूमि द्वारका, जामनगर, पोरबंदर, कच्छ के कुछ क्षेत्रों और उत्तर गुजरात के कुछ क्षेत्रों में आज सूखाग्रस्त स्थिति है। यह पूरे गुजरात को दिखाई दे रहा है, अधिकारियों को दिखाई दे रहा है, लेकिन अहंकारी भाजपा सरकार को दिखाई नहीं दे रहा है। द्वारका में आंकड़ों के अनुसार भी देखें, तो केवल 6% बारिश हुई है। पोरबंदर में 19%, जामनगर में 28% और कच्छ में 29% बारिश हुई है। यानी कम से कम 85% से 90% बारिश की कमी है और आंकड़ों के अनुसार भी इस क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी ने अनिश्चितकालीन धरने दिए, हजारों फॉर्म भरवाए, गांधीनगर में भी ज्ञापन दिए, लेकिन इस सरकार के पेट का पानी नहीं हिल रहा है। आज अनुमान के अनुसार देवभूमि द्वारका जिले, जामनगर और पोरबंदर को मिलाकर 3,00,000 से अधिक किसानों को भारी नुकसान हुआ है। हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। उनका बीज खत्म हो गया है और अभी तो शीतकालीन फसल का नुकसान अलग है। किसानों को कम से कम 10,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। यह सरकार हमेशा देखती रहती है कि किसानों में नाराजगी है या नहीं। यह भाजपा सरकार केवल वोट या हार से ही सुधरती है, उसे किसी और चीज की परवाह नहीं है। हमने यह आंदोलन किया, लेकिन मुझे सरकार से कहना है कि भाडथर जिला पंचायत के उपचुनाव में किसानों ने जाति, धर्म, पार्टी सब कुछ भूलकर आपको सबक सिखाया। और कैसा सबक सिखाया? जहां जिला पंचायत की सीट पर 100, 200 या 500 वोटों से हार-जीत होती है, वहां इसके बजाय लगभग 3,700 वोटों से हार-जीत करवा दी! भाजपा को जमीन पर ला दिया। क्या भाजपा अभी भी नहीं जाग रही है? क्या भाजपा को अभी भी अहंकार है? भाडथर तो झांकी है, पूरा गुजरात अभी बाकी है!”
अगर भाजपा सरकार इसी तरह चलती रही, तो 2027 में यही किसान, मजदूर, श्रमिक और भागिया इस सरकार को उखाड़कर फेंक देंगे। मैं अभी भी सरकार से अनुरोध करता हूं कि सूखाग्रस्त घोषित करने में आपके पेट में दर्द क्यों होता है? आधिकारिक मानदंडों (norms) के अनुसार भी इस क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है। महाराष्ट्र सरकार ने ऐसा किया है, दूसरे राज्यों की सरकारों ने सूखाग्रस्त घोषित किया है, तो आपने अभी तक ऐसा क्यों नहीं किया? यह एक बड़ा सवाल है। हमने बार-बार ज्ञापन दिए हैं और मैं मुख्यमंत्री से फिर अनुरोध करता हूं कि भाडथर जिला पंचायत से किसानों, मजदूरों, श्रमिकों और भागियाओं ने आपको स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर अब भी सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो 2027 में आपका सूपड़ा साफ कर दिया जाएगा। भाजपा के जितने भी सांसद, विधायक, मंत्री और नेता थे, उन सभी को आपने गांव-गांव में बैठा दिया था। सभी जातियों के नेताओं को आपने भेजा था कि अपनी जाति के वोट ले आओ, फिर भी लोगों ने आपको वोट नहीं दिए! आपके साथ रहने के बावजूद वोट नहीं दिए, इसका संकेत यह है कि किसान चाहते हैं कि हमारी सातम खराब हो गई है, अब दिवाली खराब मत करना। आपने सातम तो खराब कर ही दी, ठंडी सातम बीत गई, कुछ घरों में तो लड्डू भी नहीं बने (वरना जन्माष्टमी पर लड्डू बनाने की हमारी परंपरा है)। लेकिन अब किसानों की हालत इतनी दयनीय है कि अगर दिवाली से पहले तुरंत सहायता उनके खातों में जमा नहीं की गई, तो किसानों के लिए जीना कठिन हो जाएगा। इसके लिए अगर आप वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था नहीं करेंगे, मनरेगा योजना के तहत सिंचाई और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं करेंगे और चारे की अलग व्यवस्था नहीं करेंगे, तो इन जिलों में किसानों की हालत इतनी बदतर हो जाएगी कि जीना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए मैं सरकार से फिर अनुरोध करता हूं कि जल्द से जल्द सूखाग्रस्त घोषित करें। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भी अभी जामनगर में 2.25 लाख हेक्टेयर जमीन में से लगभग 95% फसल बर्बाद हो गई है। द्वारका में भी लगभग 1 से 1.25 लाख हेक्टेयर और पोरबंदर में लगभग 70,000 हेक्टेयर में पूरी फसल नष्ट हो गई है। हमने सरकार को 15 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। मैं अभी भी कहता हूं कि जल्द ही, दिवाली से पहले अगर कोई घोषणा नहीं की गई, तो आम आदमी पार्टी को मजबूर होकर और अधिक उग्र आंदोलन की ओर बढ़ना पड़ेगा।
पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए इसुदान गढ़वी ने कहा कि आप जो कह रहे हैं, वह 7 से 9 सितंबर के बीच की बात है, जो मंत्री ने विधानसभा सत्र के दौरान कही थी। मैंने भी अनिश्चितकालीन धरना दिया था और वह 4 तारीख तक चला था, आपको पता होगा। उसके बाद विधानसभा सत्र में हमने घेराव किया था। हमारे विधायक और हम सभी सूखी मूंगफली और पूला लेकर गए थे। तब उन्होंने कहा था कि ‘मानसून जारी है, इसलिए हम ऐसा नहीं कर सकते।’ तो 30 सितंबर को मानसून समाप्त हो गया। 30 सितंबर को समाप्त होने के बाद उन्हें सर्वे करना था। सर्वे करने के बाद उसके मानदंड (नॉर्म्स) तय करके नुकसान का आकलन करना था। यह प्रक्रिया भी 15 अक्टूबर तक पूरी हो जानी चाहिए थी। तो 15 अक्टूबर के बाद वे आधिकारिक घोषणा कर ही सकते हैं। वैसे तो 2016-17 के कानून के अनुसार वे उस समय भी सूखा घोषित कर सकते थे। महाराष्ट्र में भी सूखा घोषित हो चुका है, फिर भी ये लोग भाडथर जिला पंचायत में हारने के बाद भी नहीं सुधर रहे हैं। भाजपा का एक भी नेता, विधायक, सांसद या मंत्री, जो किसानों के वोटों से चुनकर आए हैं, किसानों के लिए कुछ बोल या कह नहीं सकता। इसलिए मुझे लगता है कि भाजपा के ये नाकारा नेता, जो केवल टिकट के आकांक्षी हैं, बस यही कहते हैं कि ‘हमने ज्ञापन दिए, हमने ज्ञापन दिए।’ लेकिन ज्ञापन देने के बाद परिणाम क्या आया? ज्ञापन देना और आंदोलन करना तो विपक्ष का काम है! आप पत्र लिखते हैं, लेकिन आपका कुछ नहीं हो रहा है, तो दे दीजिए इस्तीफा! सांसद के तौर पर, विधायक के तौर पर या मंत्री के तौर पर इस्तीफा दे दीजिए। अगर आप किसानों के मुद्दे पर सहायता दिलवाएंगे, तो लोग अपने आप आपके साथ खड़े होंगे। हम तो चाहते हैं कि लोग हमें भूल जाएं, लेकिन किसानों को कुछ मिलना चाहिए। इसलिए मंत्री के बयान के संदर्भ में इतना निश्चित है कि अब मंत्री को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके स्पष्ट करना चाहिए कि वे सूखा घोषित करेंगे या नहीं करेंगे? अगर वे कहते हैं कि नहीं करेंगे, तो फिर आम आदमी पार्टी को भी पता चले कि किसानों के लिए आगे कौन-सा रास्ता अपनाना है।
इसुदान गढ़वी ने आगे बताया कि आम आदमी पार्टी किसानों के लिए लड़ रही है, लेकिन अब जनता को भी अपना रुख अपनाना होगा। इस सरकार को घर भेजकर अपनी सरकार लानी होगी, वरना ये लोग पूरा गुजरात बेच देंगे। जब हम संघर्ष करते हैं, तो पुलिस हमें हिरासत में लेती है, FIR करती है। तो क्या जनता को भी उनकी ही पुलिस बनकर रहना है? मेरा अनुरोध है कि गुजरात की जनता सोचे कि आपके लिए वास्तव में कौन लड़ता है? आज यह बात दुख के साथ कहनी पड़ रही है कि पिछले 30 वर्षों में अडानी जैसी विशाल कंपनियां एक रुपये के टोकन किराए पर हजारों एकड़ जमीन लेकर बैठी हैं। ये उद्योगपति नहीं चाहते कि भाजपा के अलावा कोई और सरकार आए, क्योंकि आम आदमी पार्टी किसानों, गरीबों, वंचितों और श्रमिकों की सरकार है। अगर आज ‘आप’ की सरकार होती, तो उचित भाव दिए बिना किसानों की जमीन में खंभे लगाने की किसी कंपनी की हिम्मत नहीं होती। कच्छ और भावनगर में हजारों एकड़ जमीन कंपनियों को देकर पूरा कच्छ बेच दिया गया, फिर भी वहां से भाजपा के ही सांसद और विधायक चुने जाते हैं! ये कंपनियां भाजपा से लाभ लेती हैं, भाजपा को फंड देती हैं और उसी फंड तथा सत्ता-पुलिस के दम पर चुनाव जीतती हैं। इसलिए मैं जनता से हाथ जोड़कर अनुरोध करता हूं कि आपको मतदान के दिन जागना ही होगा। भाडथर जिला पंचायत के उपचुनाव में किसानों, मजदूरों, श्रमिकों और मालधारियों ने एकजुट होकर भाजपा को अपनी ताकत दिखा दी है। वहां जाति के नेता, पैसा, ठेकेदार या विशाल कंपनियां कुछ भी काम नहीं आईं। जिस तरह भाडथर की जनता ने एकजुट होकर जवाब दिया है, उसी तरह अगर पूरे गुजरात की जनता एकजुट हो जाए, तो हमें ऐसी कंपनियों की दबंगई सहन नहीं करनी पड़ेगी।