नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026 | आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली की प्रीपेड टैक्सी योजना के 112 निष्ठावान कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के तानाशाही निर्णय पर गहरा रोष व्यक्त किया है। पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने भाजपा सरकार की संवेदनहीनता को बेनकाब करते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों ने पिछले चार दशकों तक अपने पसीने से इस योजना को सींचा और इसे लाभ की स्थिति में पहुंचाया, आज उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के सड़क पर लावारिस छोड़ दिया गया है।
यह केवल नौकरियों की कटौती नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के भविष्य पर किया गया एक गहरा प्रहार है जो दशकों से दिल्ली पुलिस की इस सेवा को मजबूती प्रदान कर रहे थे।
40 वर्षों की मेहनत पर भाजपा ने फेरा पानी
सांसद संजय सिंह ने विस्तार से बताया कि दिल्ली पुलिस ने वर्ष 1986 में यात्रियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रीपेड टैक्सी का कॉन्सेप्ट पेश किया था। इस व्यवस्था की सफलता के पीछे इन 150 कर्मचारियों का अथक परिश्रम था, जिन्होंने दिन-रात एक कर इस योजना को न केवल सफल बनाया बल्कि आर्थिक रूप से भी सुदृढ़ किया।
संजय सिंह ने तथ्य रखते हुए कहा कि इन कर्मचारियों की मेहनत की बदौलत ही इस योजना के पास 10 करोड़ रुपये की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) मौजूद थी, जो यह प्रमाणित करता है कि यह एक मुनाफे वाली योजना थी। लेकिन विडंबना देखिए कि आज उसी मुनाफे वाली योजना को नई ऐप-आधारित स्कीम में बदलने के नाम पर गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने नींव के पत्थरों को ही उखाड़ फेंकने का काम किया है।
उम्र के इस पड़ाव पर कर्मचारियों को अंधकार में धकेला
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो 112 कर्मचारी निकाले गए हैं और शेष बचे 38 कर्मी जिन्हें निकालने की तैयारी है, उनकी आयु अब 50 से 60 वर्ष के बीच है। संजय सिंह ने अत्यंत भावुक और तार्किक स्वर में पूछा कि इस अवस्था में ये लोग अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कहां जाएंगे? उन्होंने सीधे तौर पर गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि इस आत्मघाती फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।
सांसद ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी नई डिजिटल योजना जरूर चलाए, लेकिन उसमें इन अनुभवी 150 कर्मचारियों को ही समायोजित किया जाना चाहिए। डीओपीटी के पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इन कर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया बहुत पहले पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें न्याय देने के बजाय बेरोजगारी का दंश दे दिया।
विश्वासघात और शोषण की पराकाष्ठा
प्रेस वार्ता में मौजूद पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए भाजपा सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर किया। कर्मचारी शहनाज ने बताया कि उन्हें डिजिटल इंडिया के नाम पर ट्रेनिंग के दौरान आश्वासन दिया गया था कि किसी की नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि उन्हें टैब और वाईफाई जैसी आधुनिक सुविधाएं देकर साथ रखा जाएगा। लेकिन 22 फरवरी को बिना किसी नोटिस के उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
कर्मचारियों ने यह भी याद दिलाया कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान जब दुनिया घरों में कैद थी, तब इन जांबाज कर्मियों ने अपनी जान हथेली पर रखकर काम किया और इस दौरान अपने दो साथियों को भी खो दिया। आज उन्हीं ‘कोरोना वॉरियर्स’ को भाजपा सरकार ने सड़क पर बैठने को मजबूर कर दिया है।
न्याय की लड़ाई में कर्मचारियों के साथ खड़ी ‘आप’
आम आदमी पार्टी इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ी है। संजय सिंह ने जोर देकर कहा कि एक तरफ दिल्ली पुलिस इसे ‘नो प्रॉफिट नो लॉस’ के आधार पर चलाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ रेवेन्यू जनरेशन का बहाना बनाकर अनुभवी लोगों की छंटनी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जब फंड की कमी थी तब भी ये कर्मचारी व्यवस्था चला रहे थे, और अब जब 300 करोड़ का बजट जारी हुआ है, तो असली हकदारों को ही बाहर कर दिया गया है।
आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार को चेतावनी देती है कि यदि इन कर्मचारियों को तत्काल वापस नौकरी पर नहीं लिया गया और उन्हें नई योजना में समायोजित नहीं किया गया, तो पार्टी सड़क से लेकर संसद तक इस हक की लड़ाई को और तेज करेगी। हम अपने इन मेहनतकश भाइयों और बहनों को भाजपा की तानाशाही की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।