आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार की ओर से कानून लाने और उस पर संसद में चर्चा कराने के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा एक साजिश है। भाजपा सरकार अचानक ऐसा कानून क्यों लाना चाहती है जिसकी किसी ने मांग ही नहीं की थी? जबकि सरकार इसे अध्यादेश के जरिए भी ला सकती है, तो संसद में इस विधेयक पर चर्चा क्यों करना चाहती है? सरकार ऐसा इसलिए कर रही है, क्योंकि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन से देश का ध्यान भटकाना चाहती है। सरकार चाहती है कि देश की जनता संसद में सता और विपक्ष के बीच लगने वाले आरोप प्रत्यारोप में उलझ कर रह जाए।
नया कानून लाना नैरेटिव भटकाने की साजिश
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि सरकार द्वारा अचानक नया कानून लाने की बात करना, पूरे नैरेटिव को भटकाने की एक कोशिश है। छात्रों ने किसी कानून की मांग नहीं की है, वे केवल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। उन्होंने नए कानून पर संसद में चर्चा कराने के सरकार के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस सरकार ने कभी कानूनों पर चर्चा नहीं कराई है। उन्होंने याद दिलाया कि किसानों के काले कानून और दिल्ली के अधिकार छीनने वाले कानून बिना किसी चर्चा के ही लाए गए थे। जब भी सरकार को कोई कानून लाना होता है, तो वह बिना चर्चा के सीधे अध्यादेश ले आती है।
सौरभ भारद्वाज ने इसे सरकार का एक साफ जाल बताते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि यह मुद्दा जंतर-मंतर पर बैठे छात्रों से हटकर संसद पहुंच जाए और सरकार व विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर रह जाए। सरकार की मंशा है कि देश इस नए कानून की पेचीदगियों में फंस जाए, ताकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बंद हो जाए। जो सरकार हमेशा चर्चा के खिलाफ रही है, उसका यह कदम पूरी तरह से एक साजिश है।