आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. करन बारोट ने बताया कि आपातकालीन सेवा 112 के प्रचार के लिए सरकार जितना खर्च करती है, उतनी राशि अगर 112 के जनरक्षक पायलटों को दी जाए, तो उनके परिवार का भविष्य उज्ज्वल हो जाएगा। मैं बार-बार सरकार के सामने 112 के जनरक्षक पायलटों का मुद्दा उठाता आया हूं और उठाता रहूंगा। आज मैं फिर से 112 के पायलटों को लेकर सरकार के सामने उठाए गए मुद्दों में एक और मुद्दा जोड़ने आया हूं। सितंबर महीने में 112 के जनरक्षक पायलटों को जो वेतन दिया गया है, वह अपर्याप्त और अनियमित है। कुछ पायलटों को वेतन नहीं मिला है, कुछ को कम मिला है, तो कुछ पायलटों ने 40-40 शिफ्ट करने के बावजूद उसके अनुसार वेतन नहीं मिला है। पायलट इन सभी परिस्थितियों से परेशान हो रहे हैं। उन्होंने हमसे और कंपनी में भी बार-बार अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है। इससे पहले भी मैंने शिकायत की थी कि जून महीने का वेतन पायलटों को बिना बताए ज्यादा दे दिया गया था और उसके बाद जुलाई महीने के वेतन से बिना किसी सूचना के कटौती कर ली गई थी। इसके अलावा, जब पायलटों का तबादला किया जाता है, तो ट्रांसफर ऑर्डर के बीच की अवधि में उन्हें बेरोजगार रहना पड़ता है। पायलट जहां रहते हैं, वहां से 100-100 किलोमीटर दूर केवल 14 से 15 हजार के वेतन पर नौकरी दी जाती है। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि इतने कम वेतन में घर से 100 किमी दूर रहकर रहने, खाने और परिवार का महीना कैसे गुजारें?
डॉ. करन बारोट ने आगे कहा कि जिन पायलटों ने शिकायतें की थीं, उन्हें ‘ऑफ ड्यूटी’ कर दिया गया था। ऑफ ड्यूटी करने के बाद उन्हें कंपनी में बुलाकर या फोन करके कहा जाता था कि ‘कल शुरू करेंगे, परसों करेंगे।’ इस तरह उन्हें 3-3 महीने तक ऑफ ड्यूटी रखा गया और उसके बाद कुछ पायलटों को टर्मिनेट (नौकरी से निकाल) कर दिया गया। आज भी ऐसे पायलट हैं, जिन्हें ऑफ ड्यूटी करके वापस नौकरी पर नहीं लिया गया है। अगर सरकार चाहती है, तो मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि ये जनरक्षक पायलट गुजरात की जनता की सुरक्षा और रक्षा करने का काम करते हैं। अगर वे मानसिक रूप से फिट और स्थिर नहीं होंगे, अपनी तनख्वाह या परिवार के भरण-पोषण को लेकर दुखी होंगे, तो वे कानून और व्यवस्था कैसे बनाए रखेंगे? कंपनी के खिलाफ बार-बार शिकायतें आ रही हैं। अगर यह कंपनी युवाओं को संभाल नहीं सकती, तो सरकार को यह पूरी व्यवस्था अपने हाथ में ले लेनी चाहिए। सरकार को तत्काल 112 के जनरक्षक पायलटों के साथ संवाद करके उनकी समस्याओं को समझना चाहिए, क्योंकि वे वास्तव में परेशान हैं। कुछ पायलटों से अतिरिक्त काम करवाया जाता है, कुछ को गाड़ियां नहीं मिलतीं, तो कुछ को नौकरी पर नहीं रखा जाता। 112 के जनरक्षक पायलटों का मुद्दा दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है और काम करने वाले युवा भारी परेशानी झेल रहे हैं।