आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने साइकिल घोटाले को लेकर आईफोन का उदाहरण देते हुए एलजी से उनकी राय पूछी है। उन्होंने एलजी से पूछा है कि मान लीजिए, सरकार ने आईफोन 17 प्रो मैक्स का टेंडर किया है और उस रेट पर ठेकेदार आईफोन 14 दे रहा है तो सरकार के एलजी होने के नाते आप क्या करेंगे? आपकी सरकार के मंत्री आशीष सूद के शिक्षा विभाग से बच्चियों में बांटी जा रही साइकिल की खरीद में कुछ ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने महंगा मॉडल स्काइलर का टेंडर दिया, लेकिन ठेकेदार उसी दाम पर सस्ता मॉडल बोनफायर दे रहा है। अब सरकार ये सुनने और समझने को तैयार ही नहीं है कि जिस साइकिल का टेंडर हुआ और जो मिल रही है, दोनों अलग हैं। सरकार कह रही है कि टेंडर तो दिया था, अब यही साइकिल मिल रही है तो क्या करें, ऐसा भी होता है क्या?
साइकिल टेंडर को लेकर सरकार पर सवाल
गुरुवार को सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के एलजी से कहा कि मान लीजिए सरकार को एक लाख एप्पल आईफोन 17 प्रो मैक्स खरीदने हैं। सरकार इसे किसी शोरूम से नहीं खरीदेगी, क्योंकि शोरूम पर रिटेल की कीमत लगेगी। सरकार इसका टेंडर करेगी ताकि थोक में खरीदने पर सस्ता मिले। टेंडर में एप्पल कंपनी भी आई, क्योंकि वह खुद आईफोन बनाती है। उसने कहा कि वैसे तो हम यह आईफोन 1,40,000 रुपए में देते हैं, लेकिन एक लाख आईफोन खरीदने पर हम सरकार को एक आईफोन 1,25,000 रुपए में दे देंगे।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि टेंडर में सैमसंग भी आता है और कहता है कि हम आईफोन 17 तो नहीं बनाते, लेकिन हमारा जो मॉडल इससे मिलता-जुलता है, वह हम 1,15,000 रुपए में दे देंगे। फिर एक छोटा सा डीलर आता है और कहता है कि हम न तो फोन बनाते हैं और न ही बेचते हैं, लेकिन हम सरकार को आईफोन 17 प्रो मैक्स एक लाख रुपए में दे देंगे, यानी एप्पल से भी सस्ता दे देंगे। सरकार मान लेती है और कहती है कि टेंडर में जो सस्ता देगा, हम उसी से लेंगे।
यहां तक तो ठीक है, लेकिन जब आईफोन 17 डिलीवर करने की बारी आती है, तो वह तो मिल नहीं सकता। इसलिए डीलर आईफोन 17 की जगह आईफोन 14 दे रहा है, जो मार्केट में सिर्फ 50 हजार रुपए का मिलता है। वह मार्केट से 50 हजार रुपए का आईफोन 14 खरीदकर सरकार को एक लाख रुपए में आईफोन 17 के नाम पर बेच रहा है। इस पर सरकार कह रही है कि हमने तो टेंडर दिया था, अब टेंडर में यह आ रहा है तो हम क्या करें? ऐसा नहीं होता है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अब समझा जा सकता है कि सरकार साइकिल घोटाले में लोगों को कैसे बेवकूफ बना रही है। बार-बार यह क्यों कहा जा रहा है कि हमने जेम पोर्टल पर टेंडर डाल दिया था और जो सबसे सस्ता था, वह हमें मिल गया। सरकार यह नहीं देख रही कि जिस साइकिल का टेंडर हुआ था और जो साइकिल दी जा रही है, वे दोनों अलग हैं। टेंडर एक महंगे मॉडल स्काइलर का हुआ था और सरकार को जो मॉडल दिया जा रहा है, वह बोन फायर है। इसलिए सरकार लोगों को बेवकूफ बनाना बंद करे।