आम आदमी पार्टी ने भाजपा शासित डीडीए के मास्टर प्लान 2047 में किए गए प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे दिल्ली के विकास का नहीं, बल्कि बिल्डरों के विकास का प्लान बताया है। “आप” नेता और विधायक संजीव झा ने कहा कि अब प्लान के तहत पुनर्विकास के नाम पर अनधिकृत कॉलोनियों को बिल्डिरों को सौंपा जाएगा और वे अपने हिसाब से लूटेंगे। ओ-जोन 2 में निर्माण पर पूरी तरह रोक है। इससे 91 कॉलोनियों के 15-20 लाख घरों पर तलवार लटक गई है। उन्होंने कहा कि अब साफ हो गया है कि भाजपा नेता ओ-जोन में बने घरों को टूटने नहीं देने का सिर्फ झूठा भरोसा रहे थे। जबसे भाजपा सरकार आई है, लगातार ओ-जोन में घर तोड़़े जा रहे हैं। मास्टर प्लान के जरिए दूसरे राज्यों से आकर कॉलोनियों में रह रहे लाखों लोगों को दिल्ली से भगाने की साजिश की जा रही है।

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने कहा कि दिल्ली में मास्टर प्लान 2047 नोटिफाई हो चुका है। मंगलवार को डीडीए के वीसी ने दिल्ली के सभी विधायकों और सांसदों को बुलाया था। बीसी ने बताया कि यह पॉलिसी दिल्ली के हितधारकों से बात करके बनाई गई है। अगर ऐसा है, तो यह मीटिंग पॉलिसी लागू होने से पहले होनी चाहिए थी, क्योंकि दिल्ली के विधायक और सांसद ही सबसे बड़े स्टेकहोल्डर्स हैं, जिन्हें जनता ने चुना है। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह मास्टर प्लान दिल्ली के विकास का नहीं, बल्कि बिल्डरों के विकास का प्लान लग रहा है।
सबसे बड़ा मुद्दा यमुना के किनारे ओ-जोन का है। जब से दिल्ली में भाजपा की सरकार आई है, ओ-जोन में रहने वाले लोगों की जान आफत में है और लगातार उनके घर तोड़े जा रहे हैं। हम घर बचाने की कोशिश करते थे, लेकिन मकान बच नहीं पाता था। भाजपा के नेता, सांसद, विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री कहते थे कि ओ-जोन में रहने वाले लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, उनके रहते किसी का नुकसान नहीं होगा। करावल नगर ओ-जोन एरिया में आता है। वहां सीवर और सड़क निर्माण का उद्घाटन रखा गया था। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री कपिल मिश्रा और नॉर्थ-ईस्ट के सांसद मनोज तिवारी समेत सभी नेता मौजूद थे। वहां परेशान लोगों ने जब अपने मकान टूटने की आशंका जाहिर की, तो सभी ने एक सुर में कहा कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, ओ-जोन के नाम पर सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है। मैं तब भी कह रहा था कि ये लोग गुमराह कर रहे हैं और ओ-जोन में रहने वाले लोगों के घर छीनने की साजिश रची जा रही है।
संजीव झा ने कहा कि अब जब मास्टर प्लान 2047 आया है, तो जिस तरह से मकान तोड़े जा रहे थे, उसे सही ठहराया गया है और कहा गया है कि आगे भी वहां कोई नया मकान नहीं बन सकता। हमें जो बुकलेट दी गई है, उसके पेज नंबर 29 पर पर्यावरण वाले हिस्से में कहा गया है कि एक्टिव फ्लड प्लेन एक नो कंस्ट्रक्शन जोन है। लेकिन इसके बाद पुश्ता बना दिया गया था ताकि उसके पार बसी कॉलोनियां सुरक्षित रहें और वहां ओ-जोन के नाम पर कभी कोई विवाद नहीं रहा।
ओ-जोन 2 में कॉलोनियों पर संकट: संजीव झा
संजीव झा ने कहा कि 2019 में जब केंद्र की भाजपा सरकार पीएम उदय योजना लाई, तब इन कॉलोनियों को ओ-जोन 2 कहा गया था। इस इलाके को ओ-जोन 1 और ओ-जोन-2 में बांट दिया। सरकार ने कहा था कि ओ-जोन 2 की सभी कॉलोनियों में पीएम उदय के तहत लोगों को कन्वेंस डीड (रजिस्ट्री) दी गई थी। अगर 2019 में मकान की रजिस्ट्री की गई थी, तो फिर 2025 में उन्हें हटाया क्यों जा रहा है? और भाजपा के सारे नेता एक सुर में झूठ क्यों बोल रहे हैं?
मास्टर प्लान में लिखा है कि एक्टिव फ्लड प्लेन के बाहर वाले इलाके (ओ-जोन 2) में भी विकास पर प्रतिबंध रहेगा और वहां केवल सामाजिक, सांस्कृतिक या मनोरंजन (रिक्रिएशनल) उपयोग के लिए ही निर्माण की अनुमति होगी। मैंने डीडीए के वीसी से बार-बार पूछा कि भाजपा के नेता अभी भी यह भ्रम फैला रहे हैं कि ओ-जोन 2 में किसी का नुकसान नहीं होगा। इस पर डीडीए वीसी ने साफ शब्दों में कह दिया कि ओ-जोन 2 में किसी तरह का निर्माण नहीं होगा।
संजीव झा ने कहा कि इसका मतलब यह है कि बुराड़ी से लेकर बदरपुर तक जितनी भी कॉलोनियां बसी हैं, वे खतरे में हैं। इनमें से ज्यादातर कॉलोनियों को शीला दीक्षित सरकार के दौरान 2008 में अधिकृत करने वाली लिस्ट में शामिल किया गया था। मेरे क्षेत्र में आजादी से पहले बसा जगतपुर गांव है, साथ ही बहुत पुराना वजीराबाद गांव है। इसके अलावा संगम विहार, मिलन विहार, झड़ौदा पार्ट 3, सोनिया विहार और ओखला व बदरपुर का आधा हिस्सा भी उनके ओ-जोन 2 की परिभाषा के अंतर्गत आता है।
91 कॉलोनियों के घरों पर संकट: संजीव झा
संजीव झा ने भाजपा सांसदों से पूछा कि जो जगह-जगह सभाएं करके कह रहे थे कि मास्टर प्लान आने पर लोगों को मालिकाना हक दे दिया जाएगा। आखिर उन्होंने जनता से झूठ क्यों बोला? साउथ दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी बुराड़ी के जगतपुर गांव में आए थे। उन्होंने कहा था कि अगर इन कॉलोनियों को शामिल नहीं किया गया तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। मुझे बड़ी हैरानी हुई कि मंगलवार की मीटिंग में रामवीर बिधूड़ी, मनोज तिवारी और प्रवीण खंडेलवाल जैसे सभी सांसदों ने कहा कि डीडीए वीसी ने हमसे पूछा ही नहीं। वे तो जनता से वादा करके आए थे, उनको वीसी से बात करने की क्या जरूरत थी? राम सिंह बिधूड़ी ने तो यहां तक कह दिया कि वे डीडीए की एडवाइजरी काउंसिल के एकमात्र सदस्य हैं, फिर भी उनसे नहीं पूछा गया। इनके मंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं, वहां जाकर इन्होंने बात क्यों नहीं की?
संजीव झा ने कहा कि यह पॉलिसी डीडीए के वीसी ने नहीं बनाई है, बल्कि यह मास्टर प्लान केंद्र सरकार की ओर से आया है। मुख्यमंत्री और दिल्ली के विकास मंत्री बार-बार मीटिंग में गए हैं, तो उन्होंने क्यों नहीं रिपोर्ट दी कि 15-20 लाख लोगों का आशियाना छिन जाएगा? वे जनता से वादा करके गए थे, लेकिन पीछे से बिल्डरों के साथ सेटिंग कर ली। इस प्लान के तहत पूरी जमीन बिल्डरों को देने की साजिश है। इसमें लिखा है कि वहां इको पार्क और रिक्रिएशनल उपयोग के लिए जगह बनाई जाएगी। अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास का मतलब यही है कि जो कॉलोनियां बरसों से बसी हुई हैं, उन्हें बड़े बिल्डरों को सौंप दिया जाएगा और वे अपने हिसाब से इसे लूटेंगे और बनाएंगे।
इनका प्लान यह है कि दिल्ली से बाहर से आए जो प्रवासी लोग, चाहे वे बिहार, उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड से आए हों और इन कॉलोनियों में रहते हैं (जिन्हें इन्होंने गलत तरीके से ओ-जोन करार दिया है), उनके घर छीन लिए जाएं। मैं रेखा गुप्ता से पूछना चाहता हूं कि वे कहां थीं? वे जनता से वादा करके आई थीं और मीटिंग्स में भी गई थीं, फिर उन्होंने इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया? उन्होंने वहां के लोगों को धोखा क्यों दिया?
संजीव झा ने कहा कि ये लोग कहते हैं कि वहां नया मकान नहीं बन सकता। मैंने पूछा कि इसका क्या मतलब है? अगर कल को कोई व्यक्ति अपने घर का रिनोवेशन कराना चाहे, तो क्या ये लोग उसे तोड़ देंगे? अगर किसी के पास खाली जमीन है या वह अपने पुराने मकान को दोबारा बनाना चाहता है, तो क्या उसे बनाने नहीं दिया जाएगा? इसका मतलब है कि इन्होंने लोगों की करोड़ों की प्रॉपर्टी को रातों-रात जीरो कर दिया है। क्या इनका प्लान यह है कि लोगों को डराकर उनकी जमीन छीन ली जाए?
इनके ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट प्लान में कहा गया है कि किसी भी मेट्रो नेटवर्क, आरआरटीएस या हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के आस-पास की जमीन पर लोग फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाकर 20-25 मंजिला मकान बना सकते हैं। लेकिन वे यह भी कह रहे हैं कि ओ-जोन 2 के लोगों को इसकी अनुमति नहीं मिलेगी। उदाहरण के लिए, झड़ौदा या संगम विहार के पास जो मेट्रो की जमीन है, उसका फायदा वहां के निवासियों को नहीं मिलेगा क्योंकि वे ओ-जोन 2 में रहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि ये लोग उनकी जमीन छीनना चाहते हैं।
संजीव झा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भाजपा सरकार के ये नापाक इरादे हैं, तो दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन होगा। मैं उन सभी 91 कॉलोनियों में रहने वाले लोगों से कहना चाहता हूं कि वे भले ही भाजपा के कार्यकर्ता हों, लेकिन यह तय कर लें कि उनके लिए आपकी पार्टी जरूरी है या उनका घर? पार्टियां आएंगी और जाएंगी, लेकिन घर एक सपना होता है। भाजपा उस सपने को तोड़ने और छीनने की साजिश कर रही है। अब सही समय आ गया है कि हम अपनी छत के लिए मजबूती से लड़ें। अगर उन्होंने मकान तोड़ने की साजिश की, तो हम सब सड़कों पर उतरकर उनके इस नापाक इरादे का पुरजोर विरोध करेंगे।

कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली का मास्टर प्लान वास्तव में दिल्ली की जनता की उम्मीदों का प्लान होता है। इसी से तय होता है कि भविष्य कैसा होगा, पुराने मास्टर प्लान की कमियां कैसे दूर होंगी और हम नई दिल्ली को किस तरह से विकसित करेंगे। लेकिन मंगलवार को जब डीडीए के वीसी साहब ने हमें मास्टर प्लान 2047 के बारे में समझाया कि वे कैसी दिल्ली देखना चाहते हैं, तो उसे देखकर एक बात साफ समझ में आई कि यह दिल्ली का मास्टर प्लान नहीं, बल्कि बिल्डर माफियाओं का प्लान है।
इस प्लान में इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है कि दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों, क्लस्टर, अनधिकृत कॉलोनियों और गांवों में रहने वाले लोगों का जीवन कैसे बेहतर हो। उन्हें बेहतर सुविधाएं, सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे मिले, इस पर कोई विचार नहीं किया गया। पूरा मास्टर प्लान इस बात पर टिका है कि कैसे बड़ी-बड़ी हाईराइज बिल्डिंगें और फार्म हाउस बनाए जाएं। कैसे किसानों को फार्म हाउस काटने से बाहर किया जाए और एक एकड़ की सीमा को बढ़ाकर ढाई एकड़ कर दिया जाए। यह पूरा प्लान बिल्डरों के लिए बना है कि वे कैसे हर जगह रीडेवलपमेंट के नाम पर गरीबों के आशियाने छीनें।
कुलदीप कुमार ने कहा कि हमने पूछा था कि दिल्ली में 45 पुनर्वास कॉलोनियां हैं, जहां दलित समाज के लोग रहते हैं। मेरी और कई अन्य विधायकों की विधानसभाओं में सुंदर नगरी, कल्याणपुरी, त्रिलोकपुरी, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी और अंबेडकर नगर जैसी सैकड़ों कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों के लोगों को आज तक सरकार ने मालिकाना हक क्यों नहीं दिया और इसका जिक्र मास्टर प्लान में क्यों नहीं किया गया?
इस प्लान में यह जरूर बताया गया है कि नई हाईराइज बिल्डिंगों और डेवलपमेंट में कमर्शियल और मिक्स लैंड यूज रखा जाएगा। लेकिन, जो पुरानी जगहें हैं, जैसे गाजीपुर पेपर मार्केट, जो 30 साल पहले अलॉट हुई थी और अब वहां पेपर का काम बहुत कम होता है, उसे वे मिक्स यूज में नहीं बदलेंगे। ये लोग सिर्फ नई जगहों को बदलेंगे क्योंकि वहां से इनको मोटा कमीशन मिलेगा।
कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली में 11 डेयरी फार्म हैं, जिनमें से एक मेरी विधानसभा गाजीपुर में है। ये 1975-76 के आसपास बसाए गए थे, जब दिल्ली बहुत छोटी थी। आज वहां डेयरी का काम कम हो गया है और लोगों ने मकान बना लिए हैं। ये लोग उस जमीन को मिक्स लैंड या मल्टीपर्पज में नहीं बदलेंगे, बल्कि नए निर्माण पर ध्यान देंगे ताकि वहां से कमीशन मिल सके। कुल मिलाकर यह पूरा प्लान आज के दिल्लीवासियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के बिल्डर प्रोजेक्ट और कमीशनखोरी के लिए बनाया गया है। यह दिल्ली का मास्टर प्लान नहीं, पूरी तरह से एक बिल्डर प्लान है।
उधर, अंबेडकर नगर विधायक अजय दत्त ने कहा कि मंगलवार को डीडीए के वीसी साहब के साथ हुई मीटिंग से यह बात निकलकर आई कि इस मास्टर प्लान पर बिना किसी विधायक, सांसद या दिल्ली की जनता से सलाह लिए ही इसे गजट में नोटिफाई कर दिया गया है। जब प्लान पहले ही गजट करा लिया गया है और वे इसे लागू करने जा रहे हैं, तो अब इस चर्चा का क्या मतलब है? इस प्लान को दिल्ली के लोगों पर थोप दिया गया है।

अजय दत्त ने कहा कि दिल्ली की लगभग 3.5 करोड़ की आबादी में से जो लोग पुनर्वास और अनधिकृत कॉलोनियों में रहते हैं, उनके लिए इस प्लान में क्या सुविधाएं दी जाएंगी, इस पर कोई बात नहीं हुई है। वहां पानी, सीवर और सड़कों की भारी समस्या है। डीडीए के पास बहुत सारी जमीन और पैसा है, लेकिन रिसेटलमेंट कॉलोनियों में नए स्कूल, अस्पताल और स्टेडियम खोलने के लिए कोई प्लान नहीं बनाया गया और न ही कोई जमीन देने का प्रावधान रखा गया है।
दिल्ली में 69 संपन्न कॉलोनियां हैं, जो लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। एक व्यक्ति संपन्न हो सकता है, लेकिन पूरी कॉलोनी कैसे संपन्न हो सकती है? लाल डोरा के बाहर रहने वाले गांव वालों के विकास पर कोई चर्चा नहीं है। ओ-जोन के बारे में सीधा कह दिया गया कि उसे इस प्लान में नहीं रखा जा रहा है, तो जो लोग पुश्ते के बाहर ओ-जोन में रह रहे हैं, उनका क्या होगा? यह प्लान केवल टीओडी पॉलिसी के तहत कमर्शियल स्पेस बढ़ाने पर केंद्रित है।
अजय दत्त ने कहा कि एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि डीडीए अपनी हर जमीन बेचने पर तुला हुआ है। जब सारी जमीनें बिक जाएंगी, तो लोगों की बुनियादी सुविधाओं जैसे यूजीआर, एसपीएस या पार्क के लिए जगह कहां से आएगी? मेरे क्षेत्र के राजू पार्क, कृष्णा पार्क और बिहारी पार्क में कोई पार्क नहीं है। वहां सैनिक फार्म के पास डीडीए की जमीन उपलब्ध है, जिसे पार्क बनाया जा सकता था, लेकिन डीडीए को लोगों की जरूरतों से कोई लेना-देना नहीं है। यह प्लान पूरी तरह से बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए है और दिल्ली वाले इससे खुश नहीं हो सकते। अगर इसे लागू करना है, तो पहले चुने हुए विधायकों और कॉलोनियों के लोगों के साथ चर्चा करके उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और सहमति बनानी चाहिए।