आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में भाजपा सरकार के एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। “आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार ने दिल्ली में गरीबों को बांटने के नाम पर 22 हजार करोड़ रुपए का चावल घोटाला रचा। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के विभाग की सिफारिश पर एफसीआई FCI ने असम के निगम को भारी सब्सिडी पर हर हफ्ते 31 हजार मीट्रिक टन चावल देने की बात मानी। निगम ने गरीबों को बांटने के बजाय हरियाणा की एक प्राइवेट कंपनी को दोगुने दाम में बेच दिया। इस हिसाब से कुछ लोगों द्वारा हर हफ्ते मिल रहे कई हजार मीट्रिक टन चावल को लगभग 143 करोड़ रुपए में बेच कर 70 से 71 करोड़ रुपए की दलाली खाई जा रही थी। इस तरह से अगले 3 साल में 22 हजार करोड़ रुपए का चावल बेचकर 11 हजार करोड़ की दलाली खाने की योजना थी। लेकिन केंद्र के विजिलेंस विभाग ने घोटाले को पकड़ लिया। अब पूरी सरकार चुप है। हमारी मांग है कि सीएम रेखा गुप्ता अपने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से तत्काल इस्तीफा लें।
चावल घोटाले को लेकर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल
शनिवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रेखा गुप्ता की सरकार इतने बड़े-बड़े भ्रष्टाचार कर रही है कि जनता के होश ही उड़ जाएंगे। इस बार चावल घोटाला किया है, जिसकी योजना इस साल के शुरू में ही बना ली गई थी। यह योजना थी कि आने वाले तीन सालों तक हर हफ्ते दिल्ली के गरीब लोगों के हक का 31 हजार मीट्रिक टन चावल भारतीय खाद्य निगम FCI के गोदामों से लिया जाएगा। लेकिन वह चावल गरीबों तक पहुंचने के बजाय हरियाणा की एक प्राइवेट कंपनी को दोगुने दामों पर बेचा दिया जाएगा। इस योजना के तहत 31 हजार मीट्रिक टन चावल हर हफ्ते लूटा जाना था।
यह चावल केंद्र सरकार से लगभग 23 रुपए 20 पैसे प्रति किलो की दर से मिलना था। केंद्र सरकार का विजिलेंस विभाग कहता है कि यह 23 रुपए वाला चावल खुले बाजार में प्राइवेट वेंडर को 46 रुपए प्रति किलो में बेचा जा रहा था। इसका मतलब है कि एक किलो चावल पर लगभग 23 रुपए की दलाली खाई जा रही थी। यानि हर हफ्ते 31 हजार मीट्रिक टन चावल 143 करोड़ रुपए में बेचा जा रहा था और हर सप्ताह 70 से 71 करोड़ रुपए की दलाली खाई जा रही थी। योजना के अनुसार, अगर इस दलाली को तीन साल तक जारी रखा जाता, तो प्राइवेट कंपनी को कुल 22 हजार करोड़ रुपए का चावल बेचा जाता और उसमें 11 हजार करोड़ रुपए की दलाली खाई जानी थी।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार का बजट 70 हजार करोड़ रुपए का है। ऐसे में लोग सोचेंगे कि अगर यह सरकार कोई भ्रष्टाचार करेगी भी तो वह एक या दो हजार करोड़ रुपए का होगा। लेकिन इनके पास लूट और धोखाधड़ी के इतने बड़े आइडिया हैं कि ये सिर्फ दिल्ली सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार तक के बजट में सेंध लगा रहे हैं। वरना यह संभव ही नहीं था कि दिल्ली सरकार का एक विभाग 22 हजार करोड़ रुपए की लूट की योजना बना सके।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि असम यानी नॉर्थ ईस्ट इंडिया के एक कॉरपोरेशन ने 7 जनवरी 2026 को दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को एक पत्र लिखा। इस पत्र में कहा गया कि केंद्र सरकार के पास एक योजना है जिसमें वह राज्यों को बहुत ही सस्ते दाम पर चावल देती है। यह चावल उन गरीब लोगों, प्रवासी मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और बेघरों के लिए होता है जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। असम के उस कॉरपोरेशन ने लिखा कि वह यह सस्ता चावल लेकर दिल्ली में गरीबों को बांटेगा। मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पत्र को चार महीने तक रोके रखा और फिर 8 अप्रैल 2026 को इसे अपने विभाग के सचिव या खाद्य आयुक्त को भेजने के बजाय, उनसे निचले स्तर के एक अधिकारी, विशेष आयुक्त को भेज दिया। उन्होंने पत्र पर लिखा कि नियमों के अनुसार इस पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाए।
31 हजार मीट्रिक टन चावल पर मचा बवाल
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देश के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा ने उसी दिन यानी 8 अप्रैल 2026 को भारतीय खाद्य निगम को ईमेल कर दिया। उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है और इस कॉरपोरेशन को 31 हजार मीट्रिक टन चावल दिया जाए। इसके बाद अरुण कुमार झा लगातार भारतीय खाद्य निगम को Email (पत्र) लिखकर चावल देने की बात कहते रहे। मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा आगे भेजे गए इस पत्र में साफ लिखा था कि इस व्यवस्था के तहत हर हफ्ते लगभग 31 हजार मीट्रिक टन चावल उठाया जाएगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य दिल्ली की आम जनता, दिहाड़ी मजदूरों, अन्य राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों और उन लोगों को सस्ती दरों पर चावल उपलब्ध कराना था जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के दायरे में नहीं आते हैं। यानी यह चावल पूरी तरह से दिल्ली के गरीब लोगों के लिए था।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि केंद्र सरकार के विजिलेंस विभाग में शिकायत होने के बाद यह भारी चोरी पकड़ी गई। केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली सरकार को लिखे जाने के बाद अधिकारी अरुण कुमार झा को निलंबित कर दिया गया। उनके निलंबन के कारण बताओ नोटिस में लिखा है कि उन्होंने 8 अप्रैल 2026 को भारतीय खाद्य निगम को अनापत्ति ईमेल भेजने के बाद 13 अप्रैल, 16 अप्रैल और 17 अप्रैल को भी बार-बार अलग अलग ईमेल भेजे। एक अतिरिक्त आयुक्त स्तर का सरकारी अधिकारी भारतीय खाद्य निगम पर लगातार 31 हजार मीट्रिक टन चावल देने का दबाव बना रहा था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली के गरीबों को हर हफ्ते 31 हजार मीट्रिक टन चावल बांटने को लेकर कोई प्रेस वार्ता नहीं की।
गरीबों के चावल को लेकर सरकार से जवाब मांगा
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर ये लोग मां के नाम एक पेड़ भी लगाते हैं, तो 10 दिन पहले से सारी मीडिया को बुलाकर फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन इतना चावल बांटने पर ना तो कोई खबर छपवाई गई और ना ही मनजिंदर सिंह सिरसा ने गरीबों को चावल बांटते हुए अपनी कोई तस्वीर साझा की। इसका सीधा मतलब यह है कि पूरी सरकार नीचे से लेकर ऊपर तक इस मामले पर चुप बैठी थी, ताकि हर हफ्ते होने वाली गरीबों के चावल की इस लूट का किसी को पता ना चले। इसकी जानकारी सिर्फ भारतीय खाद्य निगम, बार-बार ईमेल लिखने वाले अधिकारी और असम के उस कॉरपोरेशन को थी।
सवाल यह उठता है कि अगर दिल्ली के गरीबों को चावल बांटना ही था, तो इसके लिए असम के कॉरपोरेशन को क्यों ढूंढा गया? दिल्ली सरकार के पास खुद के कई कॉरपोरेशन हैं, जिनमें खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अपने विभाग के अंतर्गत आने वाला दिल्ली स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन भी शामिल है। यह काम अपने विभाग के कॉरपोरेशन से क्यों नहीं करवाया गया?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस मामले में दिल्ली की मुख्यमंत्री और खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा पर सीधे तौर पर बड़े आरोप बनते हैं। केवल अधिकारी अरुण कुमार झा को निलंबित करके उनके नाम का बिल फाड़ना तरह से गलत है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपए का घोटाला करके तीन डॉक्टरों को जेल में डाल दिया गया था। इसमें भी सीधे तौर पर अफसरों को फंसाया जा रहा है और मंत्री व मुख्यमंत्री को बचाया जा रहा है। हमारी केंद्र सरकार, एलजी साहब और मुख्यमंत्री से यह मांग है कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और केवल विभाग के अधिकारियों को बलि का बकरा ना बनाया जाए।
राशन घोटाले पर CBI-ED जांच की मांग
वहीं, बुराड़ी विधायक संजीव झा ने कहा कि लगातार अलग-अलग मंत्रालयों के भ्रष्टाचार सामने आ रहे हैं। पहले दवा घोटाला, फिर साइकिल घोटाला और अब राशन घोटाला सामने आया है। लोगों से पूछने पर वे बताते हैं कि मनजिंदर सिंह सिरसा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत अच्छी पहुंच रखने वाले मंत्री हैं। उनका यह कनेक्शन साफ दिखाई देता है कि दिल्ली के कॉरपोरेशन से राशन नहीं बंटेगा, बल्कि असम का एक कॉरपोरेशन यह जिम्मेदारी लेगा। यह दर्शाता है कि मनजिंदर सिंह सिरसा की पूरे देश में किस तरह की पहुंच है।
पहली नजर में ही यह साबित हो रहा है कि मनजिंदर सिंह सिरसा इस मामले में किस तरह से शामिल हैं। यह चिट्ठी तो नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव या कमिश्नर को जानी चाहिए थी। लेकिन अगर यह चिट्ठी एडिशनल कमिश्नर को जा रही है, तो इसका सीधा मतलब है कि यह पूरी तरह से योजनाबद्ध था। इसे पहले से प्लान किया गया था, एक अधिकारी को इसके लिए तैयार किया गया और फिर उसके साथ मिलकर इस काम को अंजाम दिया गया। भाजपा की केंद्र सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन ऐसा लगता है कि अगर कोई भाजपा में हैं तो उसे लूट की पूरी छूट है।
संजीव झा ने आगे कहा कि हजारों करोड़ का घोटाला होने के बावजूद अभी तक सीबीआई या ईडी जैसी कोई भी केंद्रीय जांच एजेंसी जांच के लिए नहीं आई है। आखिर इनका सीबीआई कहां गया? इससे यह साबित होता है कि जितने भी लुटेरे हैं, वे भाजपा में आ जाएं तो उन्हें लूट की छूट मिल जाती है। दिल्ली चुनाव के दौरान ये लोग वोट मांगने आए थे और कहा था कि दिल्ली में डबल इंजन की सरकार होगी तो काम ज्यादा होगा। लेकिन पिछले 18 महीनों में यह साबित हो गया है कि दिल्ली में डबल इंजन की नहीं, बल्कि घोटालेबाज सरकार है। ऐसा कोई विभाग नहीं है जो लूट में शामिल ना हो।
संजीव झा ने कहा कि हम कोई राजनीतिक आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि यह सारी जांच केंद्र सरकार कर रही है। हम जांच की उन रिपोर्टों और तथ्यों के आधार पर बात कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से यह उम्मीद करते हैं कि या तो वे मनजिंदर सिंह सिरसा का इस्तीफा लें और अगर मंत्री का इस्तीफा नहीं होता है, तो इसका साफ मतलब है कि रेखा गुप्ता और उनकी पूरी कैबिनेट इसमें शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में प्रवासी मजदूरों को राशन दिया जाए, लेकिन ये लोग उनका राशन खा गए। मनजिंदर सिंह सिरसा पर पहले गुल्लक चोरी का आरोप था और उस पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी। गुल्लक चोरी से शुरुआत होकर अब आरोप गरीबों के राशन तक पहुंच गई है। गुल्लक में शायद छोटी राशि रही होगी, लेकिन अब यह राशि हजारों करोड़ तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार को अब ईडी और सीबीआई से इसकी जांच करानी चाहिए तथा मंत्री व मुख्यमंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए।
कुलदीप कुमार ने मंत्री के इस्तीफे की मांग की
उधर, कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि यह सरकार अब गरीबों के निवाले को भी नहीं छोड़ रही है। जिस गरीब आदमी, मजदूर और प्रवासी मजदूर के पास राशन कार्ड या अपने कागजात भी नहीं हैं, वह केवल इसी भरोसे रहता है कि उसे राशन मिलेगा तो वह सुबह-शाम खाना खा पाएगा। लेकिन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के विभाग ने उस गरीब आदमी के निवाले को भी नहीं छोड़ा। इन्होंने गरीब आदमी के राशन में भी लूट करने का काम किया है। दिल्ली सरकार के कुल बजट का 25 फीसद घोटाला कर दिया गया है। 22 हजार करोड़ रुपए का इतना बड़ा घोटाला दिल्ली के अंदर रच दिया है।
यह सरकार घोटालेबाजों की सरकार है। जब से यह सरकार आई है, इसके इरादे साफ हो गए थे, क्योंकि कहा जाता है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। चावल से लेकर साइकिल और दवाई तक, इन्होंने कुछ भी नहीं छोड़ा है।
कुलदीप कुमार ने कहा कि हम सरकार से यह मांग करते हैं कि वह तुरंत प्रभाव से मनजिंदर सिंह सिरसा का इस्तीफा ले, जिन पर पहले गुल्लक चोरी और अब गरीब आदमी का चावल चोरी करने का आरोप है। ऐसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अगर सरकार ऐसे मंत्री का इस्तीफा नहीं लेती है, तो यह माना जाएगा कि पूरी की पूरी सरकार इस लूट के अंदर शामिल है। अब लूट पकड़ी गई है, इसलिए सरकार बचने की कोशिश कर रही है। मंत्री का इस्तीफा तुरंत प्रभाव से होना चाहिए, क्योंकि दिल्ली के लोग देख रहे हैं कि कैसे यह सरकार उन्हें लूटने का काम कर रही है।
इस तरह पूरे घोटाले को दिया गया अंजाम
– असम के एक निगम ने 7 जनवरी 2026 को दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को एक पत्र लिखकर दिल्ली में गरीबों को चावल बांटने की इच्छा जताई।
– चार महीने तक सोच विचार करने के बाद मनजिंदर सिंह सिरसा ने 8 अप्रैल 2026 को अपने विभाग के विशेष आयुक्त को पत्र भेजकर नियम अनुसार सकारात्मक विचार करने को कहा।
– खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा ने 8 अप्रैल 2026 को ही भारतीय खाद्य निगम को ईमेल कर दिया।
– अरूण कुमार झा ने इसे जरूरी बताते हुए असम के निगम को हर हफ्ते 31 हजार मीट्रिक टन चावल देने का अनुरोध किया।
– अरूण कुमार ने 8 अप्रैल 2026 को भारतीय खाद्य निगम को अनापत्ति ईमेल भेजने के बाद 13 अप्रैल, 16 अप्रैल और 17 अप्रैल को भी ईमेल भेजेे।
– गरीबों के लिए इतनी बड़ी योजना को लेकर दिल्ली सरकार की ओर से कोई प्रेसवार्ता नहीं की गई। यानि जानबूझ कर इसे छिपाया गया।