आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया ने एक गंभीर मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए बताया कि आज जिस तरह दिल्ली में जंतर-मंतर पर हो रहे आंदोलन को रोकने की कोशिश की जा रही है, इस तरह लोगों के खिलाफ जाकर उनकी आवाज दबाने का काम अंग्रेजों ने भी नहीं किया था। सभी युवाओं, Gen Z, नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। दो दिनों से इस आंदोलन को रोकने के लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बावजूद भी ट्रेनें बंद कर दी गईं, मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और इंटरनेट भी बंद करने का काम सत्ता में बैठे भाजपा के तानाशाहों ने किया है। आज की स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि यह आंदोलन सफल हो गया है, क्योंकि कोई भी आंदोलन होता है तो उसका उद्देश्य यही होता है कि सत्ता में बैठे लोगों तक आवाज पहुंचे और सत्ता को जगाने के लिए आंदोलन किया जाता है। यह काम हो चुका है और साथ ही देश भी जाग चुका है। युवाओं को रोकने की जितनी भी कोशिश की जाएगी, उतने ही अधिक युवा भ्रष्ट भाजपा के खिलाफ जागरूक होंगे।
आगे आम आदमी पार्टी के नेता मनोज सोरठिया ने बताया कि आज की स्थिति को देखते हुए लगता है कि जनरल डायर अमित शाह ने नरेंद्र मोदी की बची हुई इज्जत भी खत्म करने की सुपारी ले ली है। चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सबूत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह साबित किया है कि, “हां, चुनाव आयोग में कुछ गड़बड़ है, उनके कामकाज में गड़बड़ी है और संदिग्ध काम हुए हैं।” मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह ज्ञानेश कुमार अब तक अपनी गद्दी पर क्यों बैठा है? इस आंदोलन में मुख्य रूप से तीन मांगें हैं। पहली, 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने की प्रक्रिया संविधान के खिलाफ की गई है, इसलिए इस प्रक्रिया को रद्द किया जाए। दूसरी, ज्ञानेश कुमार को उसके पद से हटाया जाए। तीसरी मांग यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में फिलहाल भाजपा के दो मंत्री और विपक्ष का एक सदस्य, यानी कुल तीन लोग शामिल होते हैं, लेकिन इस पद्धति को रद्द करके पुरानी पद्धति के अनुसार सरकार के एक मंत्री, विपक्ष के एक सदस्य और तीसरे सदस्य के रूप में सुप्रीम कोर्ट के एक जज को शामिल किया जाए तथा इन तीनों के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाए। आज जो युवा जागरूक हुए हैं, मैं उनके साहस की सराहना करता हूं और गुजरात के लोग भी यह सब देख रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि गुजरात में भी जो निरंकुश शासन चल रहा है, उसके खिलाफ अब लोग बोलने लगेंगे और इन तानाशाहों के खिलाफ लड़ेंगे।