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नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2024

हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार कोख एमसीडी स्कूल के छात्रों को किताबें, बैग, यूनिफॉर्म समेत अन्य जरूरी सामान देने में देरी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। यह देरी इसलिए हुई, क्योंकि एमसीडी में स्थायीख समिति का गठन नहीं किया गया था। कोर्ट ने पूछा कि एमसीडी कमिश्नर की वित्तीय शक्तियों को कैसे बढ़ाया जा सकता है। दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि स्थायी समिति का गठन इसलिएख नहीं किया गया, क्योंकि उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने दिल्ली की चुनी हुई सरकार की सलाह के बिना नगर निगम में 10 एल्डरमैन/पार्षद नियुक्त कर दिए, जो कि अवैध था।

पिछले 30 सालों से दिल्ली सरकार यह सुझाव देती है कि निगम में कौन एल्डरमैन होना चाहिए और एलजी हमेशा उनकी सलाह का पालन करते रहे हैं। इसका मतलब यह है कि चुनी हुई सरकार अनिवार्य रूप से एल्डरमैन का चुनाव और नियुक्ति करती है। हालांकि, इस बार एलजी ने उन्हें खुद से ही नियुक्त कर दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और अब हम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

इस स्थिति के कारण निगम के पास कोई स्थायी समिति नहीं है, जिसकी वजह से 5 करोड़ रुपए से ज्यादा के कई प्रोजेक्ट्स अटके हुए हैं, क्योंकि उन्हें आयुक्त द्वारा लागू करने से पहले स्थायी समिति की मंजूरी की ज़रूरत होती है। दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि महापौर और निगम इस समस्या को समझते हैं। इसलिए उन्होंने निगम में एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि स्थायी समिति की सभी शक्तियां निगम को दी जाएं। इससे कोई भी काम अटकने से बच जाएगा और यह सुनिश्चित होगा कि निर्वाचित एमसीडी सदन 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं की निगरानी करे।

वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि जनवरी 2023 में पारित इस प्रस्ताव को आयुक्त द्वारा अमल में लाया जाना चाहिए। इसके बावजूद आयुक्त द्वारा निगम को 5 करोड़ रुपए से अधिक का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। सरकारी वकील ने कोर्ट से निगम को एक सप्ताह का समय देने और आयुक्त को प्रस्ताव भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रस्ताव मिलने के बाद निगम इसे पारित कर देगा, जिससे किताबों, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म और स्कूल बैग के ठेकों सहित सभी रुके हुए प्रोजेक्ट पूरे हो सकेंगे।

सरकारी वकील ने अदालत को यह भी बताया कि निगम में पहले से ही एक मिसाल है। उदाहरण के लिए 2023-24 और 2024-25 के बजट को पारित करने के लिए भी उन्हें स्थायी समिति द्वारा अनुशंसित किया जाना था। चूंकि समिति का गठन नहीं हुआ था, इसलिए आयुक्त ने बजट सीधे निगम को भेज दिया और उन्हें पारित कर दिया गया। इसी तरह, 5 करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव निगम को प्रस्तुत किए जा सकते हैं और उन्हें स्थायी समिति के बिना पारित नहीं किया जा सकता है।

अगर आयुक्त निगम की मंजूरी के बिना 5 करोड़ रुपए से अधिक के कंट्रैक्ट्स पर साइन कर सकते हैं, तो इससे आयुक्त को बहुत अधिक शक्ति मिल जाएगी।ठ दिल्ली के लोगों द्वारा चुने गए निर्वाचित प्रतिनिधियों का निगम के कामों पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा। आयुक्त यह तय कर सकते हैं कि निगम या निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय में कौन से प्रोजेक्ट्स जरूरी हैं, इस पर विचार किए बिना उन्हें कौन से प्रोजेक्ट्स करने हैं। इसका मतलब यह है कि निगम द्वारा अनुशंसित या निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा जरूरी प्रोजेक्ट्स शायद नहीं होंगे, क्योंकि सारी शक्ति निगम के हाथों में होगी

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