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नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2024

आज दिल्ली हाई कोर्ट के जजों की एक बेंच के द्वारा सुनी गई एक जनहित याचिका के संबंध में आम आदमी पार्टी ने एक बयान जारी करते हुए बताया, कि आज हाइकोर्ट के जजों की एक बेंच के समक्ष एक जनहित याचिका सुनी गई, जिसमें याचिका करता द्वारा यह कहा गया था, कि दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को किताबें, स्कूल बैग और स्कूल ड्रेस अब तक नहीं मिली है जिसका कारण है स्टैंडिंग कमेटी का ना बन पाना I इस पर दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट के समक्ष बताया, क्योंकि दिल्ली नगर निगम कमिश्नर की शक्तियां केवल 5 करोड़ तक के कॉन्ट्रैक्ट करने की है, इस वजह से अभी तक सभी बच्चों को किताबें, स्कूल बैग और स्कूल की ड्रेस नहीं दी जा सकी है I आम आदमी पार्टी ने बताया कि इस संबंध में दिल्ली की चुनी हुई सरकार के वकील ने भी दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अपनी बात रखी I दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि अब से पहले 5 करोड़ से अधिक की राशि वाले टेंडर को नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी द्वारा पास किया जाता था और उसके बाद दिल्ली नगर निगम आयुक्त उस टेंडर को जारी किया करते थे I परंतु स्टैंडिंग कमेटी का गठन नहीं हो पाने के कारण यह सभी शक्तियां फिलहाल नगर निगम के सदन को दे दी गई है I

दिल्ली सरकार के वकील ने हाई कोर्ट को बताया क्योंकि 5 करोड़ से अधिक राशि वाला टेंडर नगर निगम आयुक्त द्वारा नहीं किया जा सकता है और क्योंकि लगभग पिछले डेढ़ साल से दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी का गठन नहीं हो सका है और इस वजह से कई ऐसे महत्पूर्ण कार्य हैं जो रुके हुए हैं I दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस बात की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली नगर निगम के सदन ने जनवरी में एक रेजोल्यूशन पास किया, जिसमें यह कहा गया कि जो जो शक्तियां स्टैंडिंग कमेटी के पास होती हैं, वह सभी शक्तियां सदन को दे दी जाएं, ताकि जो भी कार्य 5 करोड़ से अधिक राशि वाले हैं, सदन उसे पास कर सके और नगर निगम के सभी कार्य सुचारू रूप से चलाए जा सके I दिल्ली सरकार के वकील ने हाई कोर्ट को बताया कि जनवरी में यह प्रस्ताव पास होने के बावजूद आज तक दिल्ली नगर निगम आयुक्त ने 5 करोड़ से अधिक राशि वाले कार्यों का एक भी प्रस्ताव सदन के समक्ष नहीं रखा है I दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट के समक्ष अपना प्रस्ताव रखते हुए कहा, कि यदि कोर्ट हमें एक हफ्ते का समय दे और दिल्ली नगर निगम आयुक्त को यह निर्देश जारी किए जाएं कि वो यह 5 करोड़ से अधिक राशि वाला प्रस्ताव दिल्ली नगर निगम के सदन के समक्ष रखे और हम उसे सदन में पास करा देंगे और उसके बाद दिल्ली नगर निगम आयुक्त आगे टेंडर जारी कर सकते हैं I

पार्टी ने बताया कि दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट के समक्ष यह बात भी रखी की डीएमसी एक्ट 1957 के तहत दिल्ली नगर निगम का बजट भी स्टैंडिंग कमेटी के बिना स्वीकृति के पास नहीं किया जा सकता है I परंतु क्योंकि नगर निगम को चलना था, इसी गंभीरता को देखते हुए जनवरी में रेजोल्यूशन पास करके स्टैंडिंग कमेटी की सारी शक्तियां सदन को दी गई, ताकि सदन सीधे तौर पर नगर निगम के बजट को पास कर सके और नगर निगम को सुचारू रूप से चलाया जा सके I दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि जब नगर निगम का बजट सदन के द्वारा पास किया जा सकता है तो इस प्रकार के जितने भी 5 करोड़ से अधिक वाले राशि के टेंडर हैं वह भी सदन के द्वारा पास किये जा सकते हैं I यदि नगर निगम आयुक्त की शक्तियां 5 करोड़ की राशि से अधिक बढ़ा दी जाएंगी, तो कमिश्नर की जवाबदेही चुने हुए सदन और निगम पार्षदों के प्रति खत्म हो जाएगी I

पार्टी ने बताया की दिल्ली सरकार के वकील ने हाई कोर्ट की बेंच से यह अनुरोध किया कि 5 करोड़ से अधिक राशि वाले कार्यों का जो भी टेंडर है, पहले वह नगर निगम के सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और सदन की स्वीकृति के पश्चात नगर निगम आयुक्त उस कार्य से संबंधित टेंडर जारी करें, इससे न केवल सदन के कार्य सुचारू रूप से चल सकेंगे बल्कि उनकी जवाबदेही चुनी हुई नगर निगम और चुने हुए पार्षदों के प्रति बनी रहेगी और दिल्ली की जनता ने जिन लोगों को चुनकर निगम पार्षद बनाकर दिल्ली नगर निगम के सदन में भेजा है वह लोग जनता के हक में नगर निगम के आयुक्त से काम कर सकेंगे 

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