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क्या मोदी जी ने एपस्टीन की सलाह पर कराए गए काम के बदले हरदीप सिंह पुरी को केंद्रीय मंत्री बनाया?- अनुराग ढांडा

  • February 12, 2026

आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एपस्टीन से प्रतिनिधि मंडल के साथ मुलाकात करने के झूठे दावे को एक्सपोज कर दिया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि एपस्टीन से हरदीप सिंह पुरी डेलिगेशन के साथ नहीं, बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेता के तौर पर अकेले कई बार मिले थे। हर वक्त वह एपस्टीन से मिलने को बेताब रहते थे। जब भी वह बुलाता था, मिलने पहुंच जाते थे। दोनों के बीच हुई बातों से साफ है कि वे एक-दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या मोदी जी ने एपस्टीन की सलाह पर कराए गए काम के बदले हरदीप सिंह पुरी को केंद्रीय मंत्री बनाया? अब इस खुलासे के बाद हरदीप सिंह पुरी को मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर मोदी सरकार को उन्हें हटा देना चाहिए।

हरदीप सिंह पुरी भाजपा के वरिष्ठ नेता के तौर पर एपस्टीन से कई बार मिले थे। प्रतिनिधिमंडल के साथ एपस्टीन से मिलने का उनका दावा पूरी तरह झूठा है। मोदी सरकार बनने के बाद वह कई बार एपस्टीन से मिले। इसलिए उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वह एपस्टीन से अपने के लिए बात कर रहे थे या मोदी सरकार के लिए लॉबिंग कर रहे थे। उनको मंत्री पद से इस्तीफा भी दे देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो मोदी सरकार को उन्हें हटा देना चाहिए। केंद्र सरकार को भी बताना चाहिए कि क्या इसी तरह की कोई मीटिंग पीएमओ या प्रधानमंत्री की एपस्टीन से हुई है?

गुरुवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर अनुराग ढांडा ने कहा कि मोदी सरकार के किसी मंत्री ने पहली बार खुले रूप से स्वीकार किया है कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकात हुई। लेकिन उन्होंने पूरा सच नहीं बताया। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने अपने बयान में कहा था कि वह प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में ही जेफरी एपस्टीन से मिले थे और उनकी कभी अकेले या व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई। आम आदमी पार्टी लगातार कह रही है कि मोदी सरकार, उनके मंत्री और खुद प्रधानमंत्री मोदी कहीं न कहीं अमेरिका के दबाव में हैं और किसी ऐसे राज के दबाव में हैं जो अभी तक सार्वजनिक पटल पर नहीं है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि हरदीप पुरी की एपस्टीन के साथ पहली बैठक अक्टूबर 2014 में हुई थी। उस समय वह भाजपा में शामिल हो चुके थे और एक अधिकारी के बजाय भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में एपस्टीन से मिल रहे थे। दस्तावेजों में एपस्टीन, हरदीप पुरी से पूछ रहे हैं कि उनकी सलाह कितनी उपयोगी और लाभदायक रही। इस पर हरदीप पुरी जवाब देते हैं कि उनके नजरिए से यह बहुत उपयोगी और लाभदायक थी। इसके बाद हरदीप पुरी, एपस्टीन से कहते हैं कि वह 8 या 10 तारीख को आकर पूरी विस्तार से जानकारी देना चाहते हैं। भाजपा के इतने वरिष्ठ नेता एक ऐसे व्यक्ति से पहले सलाह लेते हैं जो बाल शोषण के अपराध में सजा काट चुका था और फिर कहते हैं कि आपकी सलाह काम आई। हरदीप पुरी कोई प्रतिनिधिमंडल के साथ नहीं, बल्कि अपने लिए समय मांग रहे थे और कह रहे थे कि वह मिलकर पूरी जानकारी देना चाहते हैं, जैसे वह एपस्टीन को रिपोर्ट करते हों। इसके बाद 10 अक्टूबर 2014 को दोपहर 12 बजे की व्यक्तिगत बैठक तय होती है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि यह बैठक मोदी सरकार के बनने के बाद हुई। हरदीप पुरी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने निजी हित के लिए बात कर रहे थे या मोदी सरकार के लिए लॉबिंग कर रहे थे। अब यह किसी भी संदेह से परे है कि हरदीप पुरी व्यक्तिगत तौर पर कई बार एपस्टीन से मिले और बार-बार ऐसे विषयों पर चर्चा की जो सीधे राजनीति या सरकार से संबंध रखते थे। इसके बाद 4 फरवरी 2015 को फिर से बैठक होती है, जिससे यह स्थापित होता है कि हरदीप पुरी, एपस्टीन के सीधे संपर्क में थे।

अनुराग ढांडा ने कहा कि एपस्टीन के कार्यालय से मेल आता है कि जेफरी आज न्यूयॉर्क में हैं और उम्मीद करते हैं कि आप उनके घर आ सकें। इस पर हरदीप पुरी जवाब देते हैं कि उन्होंने संदेश भेज दिया है और वह दोपहर के आसपास आ सकते हैं। यहां वह घर पर मिलने का समय मांग रहे हैं, किसी दफ्तर में या प्रतिनिधिमंडल के साथ नहीं। इसके बाद जनवरी 2016 में हरदीप पुरी फिर एपस्टीन से मिलते हैं। इस बातचीत में भी एपस्टीन के कार्यालय की तरफ से पूछा जाता है कि जेफरी न्यूयॉर्क में हैं, क्या आपके पास आकर मिलने का समय है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि जिस अनौपचारिक तरीके से उन्हें बुलाया जा रहा है, उससे समझा जा सकता है कि उनकी कितनी गहरी दोस्ती थी। हरदीप पुरी जवाब देते हैं कि कल सुबह 11 बजे। अगली सुबह पुष्टि की जाती है कि आज सुबह 11 बजे जेफरी के घर पर मिलेंगे। वे दोबारा घर पर मिलने जा रहे थे। हरदीप पुरी वापस पुष्टि करते हैं कि हां, वह वहां सुबह 11 बजे होंगे। इसके बाद 5 जनवरी 2017 को फिर मिलते हैं, जिसमें फिर से वही समय और घर का पता दिया जाता है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि ये सारे दस्तावेज अमेरिकी न्याय प्रणाली द्वारा जारी किए गए हैं और पूरी तरह प्रामाणिक हैं। हरदीप पुरी पुष्टि कर रहे हैं कि मई 2017 में वह एपस्टीन से मिलेंगे। 19 मई 2017 को यह बैठक हुई। इससे दो दिन पहले बात हो रही है कि जेफरी पूछ रहे हैं कि क्या आप 11 की जगह 10ः30 बजे आ सकते हैं, जिस पर हरदीप पुरी तुरंत हामी भर देते हैं। पहले 12 बजे का समय दिया जाता है, फिर एपस्टीन कहते हैं 12 ठीक नहीं है, 11 बजे आ जाओ। हरदीप पुरी कहते हैं कि ठीक है, 11 बजे आ जाऊंगा। फिर अगले दिन सुबह कहा जाता है कि 10ः30 कर लेते हैं, तो हरदीप पुरी कहते हैं कि ठीक है, मैं 10ः30 आ जाऊंगा। क्या हरदीप पुरी एपस्टीन की नौकरी कर रहे थे? उनका व्यवहार साफ तौर पर दर्शाता है कि एपस्टीन उन पर हावी थे।

अनुराग ढांडा ने कहा कि वह 12 बजे का समय हरदीप पुरी के लिए सिर्फ उनके नाम से अलग से रखा गया था, यानी यह व्यक्तिगत मुलाकात थी और वे अकेले एपस्टीन से मिल रहे थे। वे क्या बातें कर रहे थे? भारत के कौन से व्यापार, कौन से समझौते या किस चीज पर चर्चा कर रहे थे? वे एपस्टीन से क्या लेना-देना चाहते थे, यह हरदीप पुरी को स्पष्ट करना चाहिए। जब उनसे सवाल पूछा गया तो वह बहुत अनौपचारिक तरीके से कह रहे थे कि कुछ हुआ होता तो बताते। अब आम आदमी पार्टी ने बता दिया है कि हुआ है, तो अब उन्हें जवाब देना होगा।

अनुराग ढांडा ने कहा कि हरदीप पुरी, एपस्टीन से मिलने के लिए कितने उत्सुक होते थे, इसका भी एक सबूत है। एपस्टीन के कार्यालय की तरफ से पूछा जाता है कि क्या आप शुक्रवार 9 जनवरी को शाम 5ः30 बजे जेफरी से उनके घर पर मिलने के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। उधर से हरदीप पुरी का तुरंत जवाब जाता है कि ठीक है, वहां पहुंच जाऊंगा। हरदीप पुरी की तरफ से समय पर कोई मोलभाव नहीं किया जाता, जो समय दे दिया गया, उस पर वह हाजिर हो जाते हैं।

अनुराग ढांडा ने बताया कि मार्च 2015 और दिसंबर 2015 में एक-दूसरे को बैठक के लिए एपस्टीन कह रहे हैं कि कल कॉफी के लिए समय है? हरदीप पुरी कहते हैं कि अभी भारत में हूं, 10 अप्रैल को आ रहा हूं, उसके बाद मिलते हैं। जब हरदीप पुरी न्यूयॉर्क पहुंचते हैं तो मेल करते हैं कि मुझे बताएं जब आप शहर में हों और कॉफी के लिए समय हो। उधर से जवाब आता है कि आखिरी हफ्ते में। इतनी अनौपचारिक बातचीत इन दोनों के बीच में है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि इतनी अनौपचारिक बातचीत से साफ है कि इनके बीच व्यक्तिगत संबंध थे। अगर हरदीप पुरी कह रहे हैं कि कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं था, तो यह बात बेकार और बेबुनियाद नजर आती है। हरदीप पुरी से जब भी जो कहा जाता था, वह करते थे। 10 तारीख का कार्यक्रम तय हुआ, समय बदला गया और हरदीप पुरी ने हर बार उसे स्वीकार किया। यह हरदीप पुरी की हालत एपस्टीन के सामने थी।

अनुराग ढांडा ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि यह जेफरी एपस्टीन के चरित्र और हरदीप पुरी के साथ उनकी बैठक को स्पष्ट करता है। एपस्टीन की सचिव द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम में लिखा है कि रात 9ः40 बजे उसे और लड़कियों को पहुंचना है। इसी कार्यक्रम में लिखा है कि सुबह 11 बजे हरदीप पुरी के साथ एपस्टीन की बैठक है। एक ही कार्यक्रम में दोनों चीजें लिखी हैं जो स्पष्ट तौर पर बताती हैं कि एपस्टीन का चरित्र किस तरह का था और हरदीप पुरी लगातार उस व्यक्ति से मिल रहे थे।

अनुराग ढांडा ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हरदीप पुरी को जानकारी नहीं थी कि एपस्टीन कौन है। उनकी एक मेल में लिखा हुआ है कि कृपया मुझे बताएं जब आप अपने द्वीप से वापस आ जाएं। हरदीप पुरी को सब पता था कि उसके द्वीप पर क्या हो रहा है। जब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकारी रह चुके थे तो उन्हें यह भी पता था कि वह किन अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है। उसके बावजूद इतनी नजदीकी बढ़ाई गई।

अनुराग ढांडा ने कहा कि यह पूरा बैठकों का दौर हरदीप पुरी के मंत्री बनने से ठीक पहले का है। 2017 में उनको मंत्री बनाया जाता है और उससे ठीक पहले तक उनकी लगातार एपस्टीन से मुलाकात होती है। वह एपस्टीन की सलाह पर कुछ काम कराते हैं और कहते हैं कि बहुत फलदायक रहा। मोदी सरकार को स्पष्ट करना होगा कि क्या उन्हीं कामों की बदौलत हरदीप पुरी को इनाम के रूप में मंत्री पद दिया गया था? और मंत्री बनने के बाद उन्होंने इस लॉबी का किस तरीके से इस्तेमाल किया?

अनुराग ढांडा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की मांग है कि हरदीप पुरी को तुरंत प्रभाव से उनके पद से हटाकर इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। भारत अपनी एजेंसियों से इन दस्तावेजों और बैठकों की जांच कराए कि किस व्यापार के बारे में बात की जा रही है। जब तक जांच हो, हरदीप पुरी को केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ देना चाहिए। एक ऐसा व्यक्ति जो हजारों नाबालिग बच्चियों के साथ अपराध का दोषी है, उसके साथ हमारे मंत्रियों और प्रधानमंत्री का नाम आना बेहद शर्मनाक है।

अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि बहुत से दस्तावेज अमेरिका ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसलिए आम आदमी पार्टी का मोदी सरकार से सीधा सवाल है कि क्या इसी तरीके की कोई मीटिंग या बातचीत प्रधानमंत्री कार्यालय या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी एपस्टीन के साथ है, जिसकी फाइल को दबाए रखने के बदले में अमेरिका की मनमानी को भारत स्वीकार कर रहा है? पाकिस्तान के साथ सीजफायर और ट्रेड डील जिस तरीके से किया गया, कोई भी संप्रभु राष्ट्र इसको बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह एक तरीके से गुलाम की तरह व्यवहार है, जिसे देश स्वीकार नहीं कर रहा है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि पता नहीं क्या मजबूरी है या कौन सा राज है? क्या एपस्टीन फाइल्स के कुछ कागज हैं जिनको अमेरिका से सार्वजनिक न करने के बदले में उनकी हर मांग को माना जा रहा है? अब यह सीधे तौर पर जांच का विषय बन गया है, क्योंकि मोदी सरकार के मंत्री ने अपनी जुबानी पहले यह स्वीकारा कि वो मिले हैं, लेकिन झूठ बोलने का प्रयास किया कि प्रतिनिधिमंडल के तौर पर मिले हैं। यह झूठ आज इन दस्तावेजों से पूरी तरह से बेनकाब हो गया है कि एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी व्यक्तिगत मीटिंग करते रहे हैं। वे खुद मीटिंग के लिए पूछते रहे हैं, उनसे सलाह लेते रहे हैं और उनको रिपोर्ट देते रहे हैं। ऐसे में मोदी सरकार के उस कथन पर बिल्कुल यकीन नहीं किया जा सकता जिसमें वो यह कह रहे हैं कि एपस्टीन फाइल के पूरे प्रकरण में मोदी सरकार पाक-साफ है

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जंतर मंतर से मनीष सिसोदिया जी ने  आधी रात को पहुंच के क्या कहा?

#jantarmantar #studentprotest
मोदी जी, देश सब याद रखेगा। 2029 दूर नहीं है।
Stand against dictatorship Stand for democracy! Stand against dictatorship
Stand for democracy!
Look at how the BJP is using goons to silence the Look at how the BJP is using goons to silence the voices of the youth.
Prime Minister Modi, students are not demanding fa Prime Minister Modi, students are not demanding fast-track courts. They are demanding the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan. Stop diverting the issue.

-Arvind Kejriwal
National Convenor, AAP

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भाजपा ने अपने भाड़े के गुंडों को जंतर-मंतर भेजकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियाँ बरसवाईं, अब भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ उन्हीं छात्रों को “भाड़े का टट्टू” और “पत्थरबाज़” कह रहे हैं।

शर्म करो भाजपाइयों!
Once again, BJP’s propaganda has been exposed. T Once again, BJP’s propaganda has been exposed. The BJP is trying hard to divert attention from the core issue- the NEET paper leak and the demand for Dharmendra Pradhan’s resignation by pushing fake narratives.

Mr. Prime Minister, the nation needs accountability, not diversion. Sack Dharmendra Pradhan NOW.!
Brutal police action against students. Is this you Brutal police action against students. Is this your idea of policing, Home Minister Amit Shah?
No justice. No silence. No justice. No silence.
छात्रों पर हमला करने के लिए बीजेपी ने भेजे अपने गुंडे।
बच्चों, आपने जिस तरह का दमन और बर्बरता झेली है, और अपने साहस और हौसले से पूरे देश को जगाया है, आपको हमारा सलाम है। 🇮🇳
Prime Minister Modi, is this your idea of democrac Prime Minister Modi, is this your idea of democracy- lathis for those demanding accountability?
Once again, BJP’s propaganda has been exposed. T Once again, BJP’s propaganda has been exposed. The BJP is trying hard to divert attention from the core issue- the NEET paper leak and the demand for Dharmendra Pradhan’s resignation by pushing fake narratives.

Mr. Prime Minister, the nation needs accountability, not diversion. Sack Dharmendra Pradhan NOW.!
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavi मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis जी, आपकी पुलिस बच्चों की जेब में किस चीज़ की पुड़िया डालने की बात कर रही है?

दिल्ली में आपकी सरकार ने अपने गुंडे भेजकर बच्चों की मांग को कुचलने का काम किया, और अब महाराष्ट्र में ऐसी ओछी हरकत?

भाजपा वालों, सुन लो- बच्चों को डराने और धमकाने की कोशिश मत करो। देश जाग चुका है। आपके दिन पूरे हो गए हैं।
Where is Delhi CM Rekha Gupta? Where is Delhi CM Rekha Gupta?
प्रधानमंत्री जी, देश के बच्चे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं और आपसे पूछ रहे हैं कि पेपर लीक रोकने के लिए आपकी सरकार क्या करेगी। लेकिन आपका यह ट्वीट देखकर लग रहा है कि देश का प्रधानमंत्री हारा हुआ और दिशाहीन है।
छात्रों के साथ अरविंद केजरीवाल।
Rahul Gandhi’s protest in front of the PM’s re Rahul Gandhi’s protest in front of the PM’s residence lacked sincerity. He should have joined the students at Jantar Mantar.
Arvind Kejriwal ji छात्रों की रिहाई के लिए डटे रहे
लाठी-गोली से जो सत्ता सच दबाना चाहती है, उसे इस देश का युवा उखाड़ फेंकेगा।
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