आम आदमी पार्टी ने एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को अभी तक यूनिफार्म, स्टेशनरी और स्कूल बैग का पैसा नहीं मिलने पर भाजपा को आड़े हाथ लिया है। एमसीडी में सह प्रभारी प्रवीण कुमार ने कहा कि फरवरी में परीक्षा के बाद सत्र खत्म हो जाएगा, लेकिन बच्चों का यूनिफार्म के लिए मिलने वाली 1670 रुपए की राशि का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। एमसीडी को कुल 109 करोड़ रुपए बच्चों के खाते में भेजने थे, लेकिन अभी 58 लाख रुपए ही बच्चों के खाते में पहुंचे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार गरीब परिवार से आने वाले इन बच्चों के खाते में यूनिफार्म का पैसा जल्द भेजे और पैसा रोकने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
मंगलवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर प्रवीण कुमार ने कहा कि भाजपा देश को विश्व गुरु बनाने और शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया भर में नाम रोशन करने की बातें करती है, लेकिन ये वादे धरातल पर बिल्कुल खोखले साबित हो रहे हैं। असलियत इसके ठीक विपरीत है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के एमसीडी स्कूलों में लगभग 2.30 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों की ड्रेस, कॉपी और किताबों के लिए सरकार उनके खातों में पैसे भेजती है, लेकिन भाजपा के शासन में अभी तक इन बच्चों के खातों में यह राशि क्रेडिट नहीं हुई है।
प्रवीण कुमार ने आंकड़ों का विवरण देते हुए बताया कि एमसीडी स्कूल के प्रत्येक बच्चे को हर साल 1670 रुपए दिए जाते हैं। इनमें से 1250 रुपए यूनिफॉर्म, 300 रुपए स्टेशनरी और 120 रुपए बैग के लिए दिए जाते हैं। भाजपा ने इन बच्चों का हक मारा है। फरवरी का महीना चल रहा है। मार्च में परीक्षाएं हो जाएंगी और अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जाएगा। पूरा शैक्षणिक सत्र समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक बच्चों के खातों में पैसे नहीं आए हैं। भाजपा दिल्ली के गरीब बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है? क्या भाजपा नहीं चाहती कि गरीब बच्चे कॉपी-किताबें और यूनिफॉर्म खरीदें?
प्रवीण कुमार ने कहा कि एमसीडी के प्राथमिक स्कूलों (पहली से पांचवीं कक्षा) में अत्यंत गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ने जाते हैं, जिनके माता-पिता रेहड़ी लगाते हैं या मजदूरी करते हैं। उनके लिए यह 1650 रुपए की यह राशि भी बहुत मायने रखती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की तरफ से मांग की कि बच्चों के खातों में तुरंत पैसा भेजा जाना चाहिए।
प्रवीण कुमार ने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से 109 करोड़ रुपए भेजे जाने थे, लेकिन आंकड़ों के अनुसार 58 करोड़ रुपए ही गए है और एमसीडी ने पैसा अपने पास ही रखा हुआ है। भाजपा केवल पल्ला झाड़ने का खेल खेलती है कि यह दिल्ली सरकार को करना है या एमसीडी को करना है। लेकिन असल में कोई भी बच्चों के अकाउंट में पैसे भेजने के लिए तैयार नहीं है। भाजपा देश के लोगों को मूर्ख बनाने और बच्चों को ठगने का काम कर रही है। भाजपा की चार इंजन वाली सरकार की यह मनमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आम आदमी पार्टी इसके खिलाफ लगातार आवाज उठाएगी।
प्रवीण कुमार ने भाजपा से पूछा कि क्या भाजपा जिस विश्व गुरु का सपना दिखाती है, उसमें स्कूल और दिल्ली के एमसीडी स्कूल शामिल नहीं हैं? भाजपा नेता इसका जवाब दें। क्या अगले साल भी पूरा सत्र इसी तरह गुजर जाएगा और बच्चों को पैसों के लिए इंतजार करना पड़ेगा? क्योंकि मार्च 2026 से नया सत्र शुरू होने वाला है। क्या बच्चों को फिर से इसी तरह गिड़गिड़ाना पड़ेगा। भाजपा के राज में एमसीडी स्कूलों की हालत अत्यंत जर्जर है। किसी भी स्कूल में चले जाइए, वहां शौचालय और दीवारों की स्थिति खराब है। आज भी कई स्कूलों में बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। भाजपा स्पष्ट करे कि एमसीडी स्कूलों की यह हालत कब तक ठीक होगी?
वहीं, प्रीति डोगरा ने कहा कि 2022 में जब भाजपा एमसीडी में सरकार नहीं बना पाई और चुनाव हार गई, तो उसके बाद जनादेश को न मानते हुए 2025 में उन्होंने जोड़-तोड़ कर अपनी सरकार बनाई और एमसीडी पर कब्जा किया। आज स्टैंडिंग कमेटी भाजपा की है, बहुमत भाजपा का है और मेयर भी भाजपा का है। इसके बावजूद एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को उनके यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और बस्ते के लिए मिलने वाली 1670 रुपए की सालाना राशि अब तक नहीं मिली है, जबकि सत्र शुरू होकर खत्म भी होने वाला है।
प्रीति डोगरा ने कहा कि एमसीडी के स्कूलों में गरीब या मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे आते हैं, जिनके लिए 1670 रुपए की राशि बहुत बड़ी होती है। कई परिवार वर्ष 2025-26 में अपने बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ रहे क्योंकि दिल्ली में भाजपा की चार इंजन वाली सरकार पूरी तरह से विफल रही है। भाजपा को देश में शिक्षा नहीं, सत्ता चाहिए। सत्ता के लालच में वे भूल गए हैं कि ये वे गरीब बच्चे हैं जो बड़े प्राइवेट स्कूलों में नहीं जा सकते, इसीलिए एमसीडी स्कूल में आते हैं।
प्रीति डोगरा ने मांग की कि तुरंत बच्चों के बैंक खातों में 1670 रुपए की राशि जारी की जाए। साथ ही, उन अधिकारियों और प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की जाए जिनकी वजह से बच्चों को यह राशि अब तक नहीं मिल पाई है। साथ ही, दोबारा ऐसी परेशानी न हो, इसके लिए एक समिति और टाइमलाइन तय की जाए ताकि हर वर्ष सत्र शुरू होने से पहले बच्चों को 1670 रुपए की राशि मिल सके। इससे वे अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकेंगे और माता-पिता बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकेंगे