आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार द्वारा मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में पेश बजट को हवा-हवाई करार दिया। नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा पेश 1 लाख करोड़ रुपए के बजट का कोई भी आर्थिक विश्लेषण में आधार नहीं है। अगर सरकार के पास वास्तव में एक लाख करोड रुपए का रेवेन्यू आ रहा होता तो वह आर्थिक सर्वेक्षण सदन में जरूर रखती। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में रखे। इससे उसके फर्जी बजट की पोल खुल जाएगी। उन्होने कहा कि ‘‘आप’’ की सरकार ने हमेशा शिक्षा को एक चौथाई बजट दिया लेकिन ये 10 साल में पहली बार जब शिक्षा का बजट 20% से नीचे गया और स्वास्थ्य का बजट भी गिरकर 13 फीसद तक पहुंचा । एमसीडी को दिए जाने वाले बजट में हर साल वृद्धि होती रही है, लेकिन इस बार भाजपा ने पिछले साल की तुलना में 1526 करोड़ रुपए कम कर दिया। बजट में कटौती कर भाजपा ने अपना इरादा साफ कर दिया है कि वह शिक्षा, स्वास्थ्य और साफ-सफाई व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहती है।
आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने मंगलवार को भाजपा सरकार द्वारा लाए गए दिल्ली बजट को लेकर दिल्ली विधानसभा में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि भाजपा की दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट को अगर एक लाइन में वर्णन किया जाए तो यह एक हवा हवाई बजट है। इस 1 लाख करोड़ के तथाकथित बजट का कोई भी आर्थिक विश्लेषण में आधार नहीं है। आज जो बजट सदन में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रस्तुत किया, उसको देखकर साफ पता चल गया कि भाजपा ने आर्थिक सर्वेक्षण सदन पटल पर क्यों नहीं रखा?
आतिशी ने कहा कि अगर इस 1 लाख करोड़ तक के बजट का कोई वास्तव में आधार होता, अगर सरकार के पास वास्तव में एक लाख करोड रुपए का रेवेन्यू आ रहा होता तो इकोनॉमिक्स सर्वे सदन पटल पर होता, लेकिन नहीं रखा। आर्थिक सर्वेक्षण को इसलिए नहीं रखा गया, क्योंकि इनके हवा हवाई बजट में से इकोनॉमिक्स सर्वे के डेटा के आधार पर हवा निकल जाती, सारा दूध का दूध पानी का पानी हो जाता। दिल्ली और देश के लोगों को पता चल जाता कि फर्जी आंकड़ों और हवा हवाई आंकड़ों के आधार पर यह बजट प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने भाजपा की सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि इकोनामिक सर्वे को सदन पटल पर रखें। इकोनामिक सर्वे में आने वाले पूरे टैक्स व रेवेन्यू के आंकड़ों को सदन पटल पर रखें, उससे इस हवा हवाई बजट के दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
आतिशी ने कहा कि आज जो बजट भाजपा सरकार में सदन पटल पर रखा है, उसने भाजपा के इरादे बिल्कुल साफ कर दिए हैं। पहला इरादा सरकारी स्कूलों की शिक्षा को ध्वस्त करना है। पिछले 10 साल में पहली बार इतने कम बजट का आवंटन शिक्षा के लिए हुआ है। आम आदमी पार्टी की सरकार में लगभग बजट का एक चौथाई हमेशा शिक्षा को दिया जाता था। 10 साल में यह पहली बार हुआ है कि 20 फीसद से कम बजट का आवंटन शिक्षा के क्षेत्र को मिला है। इसलिए यह बिल्कुल साफ है कि अब भारतीय जनता पार्टी में सरकारी स्कूलों को ध्वस्त करने और गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की प्रक्रिया को खत्म करने का इरादा कर लिया।
आतिशी ने कहा कि भाजपा का दूसरा इरादा स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त करना है। इसलिए स्वास्थ्य के बजट को घटाकर मात्र 13 फीसद पर लाकर खड़ा कर दिया। पिछले 10 साल में हेल्थ सेक्टर को इतना कम बजट का आवंटन कभी नहीं हुआ। जो दिल्ली सरकार का हेल्थ मॉडल है, सरकारी अस्पतालों में हर व्यक्ति को फ्री इलाज मिलता है, चाहे लाखों रुपए का इलाज क्यों ना हो, चाहे मोहल्ला क्लीनिक में फ्री दवा, फ्री इलाज मिलता है, इसको भाजपा खत्म करना चाहती है। भाजपा का तीसरा इरादा दिल्ली में सफाई व्यवस्था को जर्जर करना है। दिल्ली के इतिहास में 1 बजट से दूसरे बजट में कभी भी एमसीडी को दिया गया एलोकेशन कम नहीं हुआ है, लेकिन इस बार एमसीडी को दिए जाने वाले बजट में 1526 करोड़ रुपए कम किया गया है। 2024-25 में 8423 करोड़ों रुपए का आवंटन था, जो इस बार घटाकर 6897 करोड़ों रुपए रह गया है। भाजपा ने शिक्षा, स्वास्थ्य और दिल्ली में साफ-सफाई की व्यवस्था को ध्वस्त करने का अपना इरादा साफ कर दिया है।
आतिशी ने कहा कि दो घंटे के बजट भाषण में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने डेढ़ घंटा अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को गालियां देने में बिताया। मैं भाजपा को याद दिलाना चाहती हूं चुनाव खत्म हो गया है, अब भाजपा चुनाव जीत गई है। अब दिल्ली के लोग चाहते हैं कि भाजपा अपना विजन और प्लान दिल्ली के लोगों के सामने रखे। अगर आज का बजट देखा जाए तो एक तरफ गाली-गलौज और दूसरी तरफ बड़े-बड़े जुमले, लेकिन बिना किसी आधार के। अगर मैं एक लाइन में भाजपा के इस बजट का वर्णन करूं तो काम कम-जुमला ज्यादा और 5 साल इनका गाली-गलौज का इरादा। आज हमने सदन पटल पर देख लिया। मैं तो भाजपा से यही आग्रह करूंगी कि दिल्ली की जनता ने आपको गाली-गलौज और फालतू बातें करने के लिए नहीं, बल्कि काम करने के