आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भाजपा सरकार द्वारा लाए गए दिल्ली बजट की हवा निकाल दी। उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार के बजट दस्तावेजों में आवंटित फंड के आंकड़े सदन पटल पर रखते हुए कहा कि भाजपा की ‘विपदा’ सरकार बजट पर भी जुमलेबाज निकली। एक लाख करोड़ रुपए का बजट सिर्फ हवा-हवाई है, दिल्ली का वास्तविक बजट मात्र 78 हजार करोड़ रुपए का है। क्योंकि सरकार के अनुमान से टैक्स कलेक्शन 5 हजार करोड़ रुपए कम होगा। नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से 15 के बजाय सिर्फ 5 हजार करोड़ ही लोन मिल सकेगा और केंद्र से 7 हजार करोड़ रुपए नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि पहले मोदी जी हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपए देने के जुमले देते थे और अब भाजपा की सरकार दिल्ली के बजट में जुमले दे रही है।
दिल्ली विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा की दिल्ली सरकार द्वारा विधानसभा में रखे गए बजट को देखकर समझ में आता है कि अक्सर मजाक में भाजपा को भारतीय जुमला पार्टी क्यों कहा जाता है? पहले तो मोदी जी बड़े-बड़े जुमले करते थे कि 15 लाख रुपए लाएंगे। फिर वह छोटे-छोटे जुमले करने लगे कि दिल्ली की महिलाओं को 2500 रुपए देंगे। इस बार भाजपा ने एक नई शुरूआत की है। सरकार के पास पैसा कहां से आएगा, इस पर भाजपा की दिल्ली सरकार ने एतिहासिक जुमलों की शुरूआत की है। सरकार के पास टैक्स और राजस्व कहां से आएगा, उस पर केवल झूठ है। जब बजट से पहले भाजपा की सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं किया तो मैं सोच रही थी कि आखिर क्यों नहीं हुआ और इसका क्या कारण था ?
आतिशी ने कहा कि यह बात सही है कि आर्थिक सर्वेक्षण सदन में पेश करना संविधान में लिखा है। लेकिन 1951 से बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की शुरूआत हो गई थी। 1951 से 1964 तक आर्थिक सर्वेक्षण बजट का हिस्सा होता था, लेकिन 1964 से आर्थिक सर्वेक्षण को बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता रहा है। क्योंकि आर्थिक सर्वे इकोनॉमी का ट्रेंड बताता है कि रियल स्टेट, सर्विस सेक्टर, व्यापार कैसे बढ़ेगा। उसी के आधार पर जीडीपी ग्रोथ के अनुमान होते हैं। भारत सरकार का आर्थिक सर्वेक्षण भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रखा, जो 6.5 फीसद जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बता रहा है। आर्थिक विकास के आधार पर ही तय किया जाता है कि आने वाले सालों में कितना टैक्स आने का अनुमान है। जब मैंने बजट के आंकड़े देखे कि 68700 करोड़ रुपए टैक्स राजस्व का अनुमान है, तब बात समझ में आई कि अगर आर्थिक सर्वेक्षण सदन में आ गया होता तो 68700 करोड़ रुपए के टैक्स राजस्व का आंकडा कितना निराधार है, यह दिल्ली के लोगों के सामने आ जाता।
आतिशी ने कहा कि जब पूरे देश का अनुमानित जीडीपी विकास दर 6.5 फीसद है तो फिर यह कुछ नई प्रकार की अर्थव्यवस्था है कि दिल्ली सरकार का टैक्स 20 फीसद से ज्यादा दर से बढ़ जाएगा। उन्होंने भाजपा के विधायकों से कहा कि भाजपा की सरकार ने एक लाख करोड़ रुपए के बजट का भाषण तो बहुत दिया, लेकिन विधायकों को ही अपने इलाके में काम कराने हैं। एक लाख करोड़ रुपए नहीं आने वाले हैं, इसकी उम्मीद मत कीजिएगा। आतिशी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीष महाना भी दिल्ली विधानसभा में आए हुए थे। उनसे जब मीडिया ने पूछा कि क्या बिना आर्थिक सर्वेक्षण के बजट पेश किया जाना चाहिए, तो उन्होंने ने भी कहा कि यह बहुत अचंभे वाली बात है। ऐसा कैसे हो सकता है।
आतिशी ने कहा कि मेरा अनुमान है कि दिल्ली सरकार ने जो आंकड़े दिखाए हैं, उसमें कम से कम 5 हजार करोड़ रुपए टैक्स कलेक्शन कम होगा। ऐसे में एक लाख करोड़ का बजट घटकर 95 हजार करोड़ हो जाएगा। जैसे देश के अन्य राज्य लोन ले सकते हैं, वैसे दिल्ली लोन नहीं ले सकती है। दिल्ली सरकार सिर्फ नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से लोन ले सकती है। इसका आधार यह होता है कि दिल्ली के लोगों ने जितना पैसा स्मॉल सेविंग फंड में डाला होता है, दिल्ली सरकार उसका 50 फीसद लोन ले सकती है। दिल्ली सरकार कह रही है कि वह 15 हजार करोड़ रुपए नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से लोन लेगी। तो नेशनल स्मॉल सेविंग फंड में कम से कम 30 हजार करोड़ रुपए होने चाहिए।
आतिशी ने कहा कि राज्यसभा में मंत्री पंकज चौधरी ने 2023 तक के आंकड़े प्रस्तुत किए थे और उन्होंने बिल्कुल साफ कर दिया था कि स्मॉल सेविंग फंड में जो पैसा जा रहा है, वो लगातार घटता जा रहा है। दिल्ली में तो बहुत तेजी से घट रहा है। दिल्ली में स्मॉल सेविंग फंड करीब 10 हजार करोड़ रुपए का होता था, जो 2020-21 में घटकर 8 हजार करोड़ हो गया और 2023 के अंत तक यह घटकर यह