आम आदमी पार्टी विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के साथ सौतेला व्यवहार करने पर दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखा है। उन्होंने स्पीकर से कहा है कि भाजपा मंत्री कपिल मिश्रा ने नेता प्रतिपक्ष का फर्जी वीडियो प्रसारित करके विशेषाधिकार का हनन किया है, लेकिन आपने (स्पीकर) उन पर कार्यवाही नहीं की, क्योंकि वह सत्ता पक्ष से थे और आम आदमी पार्टी विपक्ष में हैं। भाजपा के मंत्री और विधायक वेल में आ गए, तख्तियां दिखाई, हंगामे किए, लेकिन उनको एक दिन के लिए भी सदन से निलंबित नहीं किया गया। वहीं, पांच दिन के सत्र में विपक्ष के विधायकों को बिना सफाई का मौका दिए 4 दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ‘‘आप’’ से भाजपा डरकर अपने स्पीकर के पीछे न छिपे। हमारे सवालों का सामना करे, तभी दिल्ली की जनता उस पर भरोसा करेगी।
संजीव झा ने एक्स पर पत्र को साझा करते हुए कहा कि 4 से 9 जनवरी 2026 तक चले दिल्ली विधानसभा सत्र में लोकतंत्र को दबाने की पूरी कोशिश की गई। 5 दिन के सत्र में 4 दिन मुझे और विपक्ष के विधायकों को बिना सुने, बिना सफ़ाई का मौका दिए सदन से बाहर किया गया। स्पीकर ने शांतिपूर्ण विरोध पर विपक्ष के विधायकों पर कार्रवाई की, लेकिन सत्ता पक्ष के खुले हंगामे, तख्तियों और अपमानजनक नारों पर पूरी तरह चुप रहे। हमें अपने ही विधानसभा स्थित कार्यालय में जाने से रोका गया। चुने हुए विधायकों को सदन में प्रवेश नहीं दिया गया। आखिर नियम तो सिर्फ विपक्ष के लिए नहीं हो सकते।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को लिखे पत्र में “आप” विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने कहा है कि मैं 9 जनवरी 2026 को सत्र के अंतिम दिन मार्शल आउट किए जाने पर अपनी गहरी पीड़ा और वेदना व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। सत्र के पांच दिनों में से, मुझे 4 दिनों के लिए मार्शल आउट किया गया और सत्र से वंचित रखा गया और हमें अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं दिया गया। जिस तरह मुझे सत्र में शामिल होने से रोका गया, वह अत्यंत अलोकतांत्रिक था और ऐसा लगता है कि मुझे जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मैं विपक्षी दल से हूं।
संजीव झा ने कहा है कि सत्र के पहले दिन, 5 जनवरी 2026 को हमारे विधायक विधानसभा हॉल के अंदर उपराज्यपाल का इंतजार कर रहे थे। लेकिन, अंबेडकर नगर से “आप” विधायक अजय दत्त को विधानसभा हॉल में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था। हम इसके विरोध में खड़े हुए कि एक विधायक को हॉल के अंदर जाने से कैसे रोका जा सकता है? क्या वह विधानसभा के सदस्य नहीं हैं? क्या वह किसी की सुरक्षा के लिए खतरा थे?
संजीव झा ने कहा कि ‘‘आप’’ विधायक इसके विरोध में खड़े हुए और हमें 3 दिनों के लिए जबरन सदन से निलंबित कर दिया गया। शुरुआत में विधानसभा सत्र 4 दिनों का था। स्पीकर ने इसमें से 3 दिनों के लिए हमें निष्कासित कर दिया। चार दिन के सत्र में 3 दिन के लिए विपक्ष के चार विधायकों को निलंबित करना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। इसके अलावा, मैं विपक्षी दल का चीफ व्हिप हूं और विधानसभा परिसर के अंदर मेरा एक कार्यालय है जिसे स्पीकर ने ही आवंटित किया है। फिर भी मुझे निलंबन के दौरान 3 दिनों तक सुरक्षाकर्मी विधानसभा परिसर में आने की अनुमति नहीं दिए। सुरक्षाकर्मी मुझे मेरे ही कार्यालय में जाने से कैसे रोक सकते हैं? आखिर भाजपा कैसा उदाहरण स्थापित करने की कोशिश कर रही है?
संजीव झा ने कहा कि मंत्रियों सहित भाजपा विधायकों ने 6, 7 और 8 जनवरी को तीन दिनों तक लगातार सत्र को बाधित किया। उन्होंने न केवल हमारा समय बर्बाद किया, जिसका उपयोग बेहतर उद्देश्य के लिए किया जा सकता था, बल्कि विधानसभा का भी समय बर्बाद किया। 7 जनवरी को, दिन की शुरुआत भाजपा विधायकों द्वारा स्पीकर के सामने वेल में विरोध प्रदर्शन के साथ हुई, वे तख्तियां लिए हुए थे और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री के बारे में अपमानजनक बातें कर रहे थे।
संजीव झा ने कहा है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। विधानसभा को बाधित करने के लिए एक भी भाजपा विधायक को निष्कासित नहीं किया गया। स्पीकर सिर्फ उनसे शांत रहने का अनुरोध करते रहे, लेकिन भाजपा विधायक उनका अनुरोध सुनने को तैयार नहीं थे। भाजपा विधायक स्पीकर की बात ही नहीं सुन रहे थे। फिर भी, स्पीकर ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
संजीव झा ने पत्र में आगे कहा है कि उसी दिन, मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा नेता प्रतिपक्ष व विधायक के बारे में एक कथित फर्जी वीडियो प्रसारित किया गया। उस दिन स्पीकर ने उन पर क्या कार्रवाई की? मंत्री पद पर बैठा एक सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य, जो दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, का फर्जी वीडियो प्रसारित करना, क्या विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं है, या इसे सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया जा रहा है, क्योंकि हम विपक्ष के सदस्य हैं?
संजीव झा ने कहा कि 8 जनवरी को फिर से मंत्रियों सहित भाजपा के सभी विधायक वेल में आ गए। मंत्री आशीष सूद खुद अन्य भाजपा विधायकों के लिए तख्तियां लिखते हुए देखे गए। दिल्ली विधानसभा की वेबसाइट पर सदन की कार्यवाही के पर्याप्त फुटेज मौजूद हैं। उनमें से किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आखिर क्यों? इसके बजाय, 9 जनवरी को जब हमने फर्जी वीडियो के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया (जबकि भाजपा ने पहले हंगामा शुरू किया था), तो हमें फिर से सत्र की शेष अवधि के लिए मार्शल आउट कर दिया गया।
संजीव झा ने कहा कि दिल्ली की जनता को अब यह महसूस होने लगा है कि भाजपा, आम आदमी पार्टी द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों से डर गई है। इसलिए, सबसे आसान तरीका यह है कि किसी न किसी बहाने हमें तुरंत निशाना बनाया जाए और सदन से निष्कासित कर दिया जाए। दूसरी ओर, भाजपा विधायक जो विधानसभा के अंदर पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गए, वे बिना किसी कार्रवाई के बच जाते हैं।
संजीव झा ने कहा कि स्पीकर पार्टी लाइनों से ऊपर होते हैं और उनका कार्यालय एक गरिमामयी संवैधानिक पद है। स्पीकर, भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों के लिए अभिभावक के समान हैं। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, अन्यथा दिल्ली की जनता को लगेगा कि पक्षपात हो रहा है। मुझे लगता है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों के साथ अनुचित रूप से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। संजीव झा ने स्पीकर के माध्यम से भाजपा से अनुरोध किया कि आम आदमी पार्टी से भाजपा डरे नहीं और स्पीकर के पीछे न छिपें। भाजपा के लोगों को आम आदमी पार्टी का सामना करना चाहिए, तभी दिल्ली की जनता का उन पर विश्वास बहाल होगा