आम आदमी पार्टी ने दिल्ली नगर निगम के जर्जर स्कूलों को लेकर भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया है। एमसीडी के सह प्रभारी प्रवीण कुमार ने कहा कि इस एआई युग में एमसीडी के खंडहर स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे दुनिया का कैसे मुकाबला करेंगे? जब बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, तभी भारत में एआई का भविष्य भी मजबूत होगा, लेकिन एमसीडी के 668 स्कूल जर्जर हालत में हैं, जहों ेटीचर और बच्चे डर के साये में रहने को मजबूर हैं। बाबरपुर स्थित एक जर्जर एमसीडी स्कूल की मरम्मत के लिए प्रिंसिपल ने कई पत्र लिखे, लेकिन विभाग नजरअंदाज कर रहा है। अगर भाजपा सरकार एमसीडी के जर्जर स्कूलों की जल्द मरम्मत नहीं कराती है तो आम आदमी पार्टी सड़क पर आंदोलन करेगी।
सोमवार को सिविक सेंटर स्थित एमसीडी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर प्रवीण कुमार ने कहा कि दिल्ली में अभी पिछले दिनों एआई समिट हुआ और उसमें नए-नए आविष्कारों के बारे में बताया गया। लेकिन असलियत में यह आविष्कार जहां लागू होने हैं या जिस पीढ़ी को इनका उपयोग करना है या जहां सिखाए जाने हैं, क्या वो इसके लिए तैयार है? दिल्ली के नगर निगम स्कूलों की हालत इतनी ज्यादा बुरी है कि वहां पर बच्चों, शिक्षकों और प्रधानाचार्य को जाने में भी डर लगता है।
प्रवीण कुमार ने कहा कि सभी को अंदर से भय लगता है कि कहीं छज्जा उनके ऊपर ना गिर जाए या शौचालय जाते हुए दरवाजा ना गिर जाए। नगर निगम के स्कूल पहली से पांचवी तक होते हैं और बच्चे बहुत छोटे होते हैं। उन्हें तो पता ही नहीं उनके साथ क्या हो रहा है, लेकिन शिक्षक और प्रधानाचार्य लगातार रोज इस खौफनाक स्थिति से गुजर रहे हैं। उन्होंने बाबरपुर के एक स्कूल के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि क्या भाजपा का कोई भी नेता अपने बच्चे को इस स्कूल में डालना चाहेगा? दीवारों और शौचालय का बहुत बुरा हाल है।
प्रवीण कुमार ने कहा कि अधिकारी 2023 से लगातार सर्वेक्षण कर रहे हैं और कह रहे हैं कि नई बिल्डिंग की जरूरत नहीं है। इसे मरम्मत कर देंगे। स्कूल में लगातार 24 घंटे पानी टपकता रहता है और सारे लेंटर खुल रहे हैं। पिछले कई सालों से प्रधानाचार्य द्वारा विभागीय अधिकारियों को कई पत्र लिखा गया है। लेकिन पैसा न होने का जवाब मिलता है। विभाग पत्रों को अनदेखा कर रहा है और प्रधानाचार्य को मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानाचार्य और देखभाल करने वाले कर्मचारियों द्वारा विभाग को लिखे गए पत्र को पढ़कर बताया कि उन्होंने अपनी विडंबना जाहिर की है। पत्र में लिखा गया है कि हमारे अभिभावक हैं और बहुत देर होने से पहले यथाशीघ्र निवारण करें।
प्रवीण कुमार ने बताया कि पत्र के अनुसार, प्रधानाचार्य इन सबके चलते मानसिक पीड़ा के दौर से गुजर रही हैं। बीमा की राशि एक माता-पिता के बच्चे की जान की भरपाई वित्तीय रूप से भले ही कर दे, परंतु सब जानते हुए भी सभी अधिकारियों का चुप रहना उनकी सबसे बड़ी पीड़ा है। उनकी जान की कीमत शायद निर्धारित हो सकती है, परंतु उनकी और उनके परिवार जनों की मानसिक स्थिति के मुआवजे का क्या हो सकता है। पत्र में 24 घंटे उमड़ते घुमड़ते सवालों का समाधान करने और इस दुख, असमंजस व पीड़ा की जिम्मेदारी निभाने की शक्ति देने की बात कही गई है।
प्रवीण कुमार ने कहा कि इतनी पीड़ा में प्रधानाचार्य, देखभाल करने वाले, स्कूल प्रभारी और शिक्षक जी रहे हैं। यह सिर्फ एक उदाहरण है। सारे पार्षदों से आंकड़े मंगाने पर पता चला है कि दिल्ली में ऐसे 668 स्कूल हैं जो इस समय पूरी तरीके से जर्जर स्थिति में हैं, जिनका कभी भी छज्जा, दीवार या दरवाजा गिर सकता है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब भाजपा को देना पड़ेगा कि क्या इस बुरी स्थिति में दिल्ली के स्कूल चल सकते हैं? जिस एआई मॉडल की बात करते हैं, क्या दिल्ली के नगर निगम स्कूल उसे ग्रहण करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय दिल्ली में भाजपा की चार इंजन वाली सरकार चल रही है, फिर भी वो आखिर इन स्कूलों को ठीक क्यों नहीं करती है? केंद्र सरकार देश को विश्व गुरु बनाने की बात करती है, लेकिन जहां गुरु ही इतना डरा हुआ है और बच्चों को सुविधाएं नहीं हैं, वहां विश्व गुरु कैसे बनेगा? उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि आखिर दिल्ली के स्कूल कब तक ठीक होंगे? अगर ये स्कूल ठीक नहीं होते तो आम आदमी पार्टी अभिभावकों के साथ मिलकर एक बड़ा आंदोलन चलाएगी।
एमसीडी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि आज देश को बताया जा रहा है कि भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है और एआई सम्मेलन चल रहा है। उसी भारत देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रहते हैं तथा जहां संसद भवन है, वहीं दिल्ली के गौरव पार्क स्थित नगर निगम स्कूल में बच्चों को जर्जर हालत वाले स्कूल में जाना पड़ रहा है। वहां दीवारें और शौचालय बुरी हालत में हैं। लेकिन बच्चों को मजबूरन वहां बैठकर शिक्षा लेनी पड़ रही है। क्या भाजपा डॉलर अर्थव्यवस्था की चमक में इतनी खो गई है कि वह बच्चों की जान को खतरे में डाल रही है?
प्रीति डोगरा ने कहा कि भाजपा दिखावे की राजनीति कर रही है और अपनी सत्ता चमका रही है, लेकिन किसी भी देश में सरकार को केवल आंकड़ों से नहीं मापा जाता, बल्कि इससे मापा जाता है कि आने वाली पीढ़ी और उनका भविष्य कितना सुरक्षित है तथा उनकी जान कितनी सुरक्षित है। भाजपा कहती है कि उनके चार इंजन विकास की ओर हैं, लेकिन क्या यही उनका विकास है कि स्कूलों में बच्चों के पास जाने के लिए शौचालय तक नहीं है? शौचालयों की हालत बद से बदतर हो गई है। जब हम वहां पहुंचे और उस स्कूल को देखा तो हमारी खुद की आंखें भर आईं और आंखें नम हो गईं कि यहां पर बच्चे आखिर कैसे आ रहे हैं और कैसे पढ़ रहे हैं? दिल्ली में 668 एमसीडी स्कूल जर्जर हालत में हैं, जहां टीचर और बच्चे रोजाना डर के साये में रहने को मजबूर हैं।
प्रीति डोगरा ने कहा कि मध्यम और गरीब वर्ग के बच्चे वहां पढ़ रहे हैं। भाजपा को शर्म आनी चाहिए कि जिस देश में वे कहते हैं कि उनकी चार इंजन की सरकार है और विकास कर रही है, वहां राजधानी के बच्चों को ऐसे जर्जर स्कूल की हालत में पढ़ना पड़ रहा है। क्या यही उनका विकास है? भालपा सरकार जल्द से जल्द स्कूलों की हालत सुधारी जाए और देश के बच्चों को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता, नेतागण और सभी लोग मिलकर अभिभावकों के साथ जरूर सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन करेंगे। हम सड़क पर आंदोलन करके जरूर स्कूलों की हालत को सुधारेंगे।
लाडोसराय से “आप” पार्षद व एमसीडी शिक्षा समिति के सदस्य राजीव सनवाल ने कहा कि एक साल से लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से पत्राचार किया गया। कमिश्नर से लेकर डीडी तक चिट्ठियां लिखी गईं, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अधिकारी सिर्फ इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कोई हादसा हो जाए, तब वहां लीपापोती कर दी जाए। यह केवल बाबरपुर के एक स्कूल की बात नहीं है, बल्कि एमसीडी के अधिकतर स्कूलों में यही स्थिति है। पहले उपराज्यपाल के माध्यम से भाजपा ने एमसीडी के कार्यों को ठप किया। पिछले एक साल से जब स्थायी समिति और शिक्षा समिति बन गई है, तो आज से लगभग 10 महीने पहले हुई शिक्षा समिति की पहली ही बैठक में इस स्कूल का विषय रख दिया गया था। समिति में इसकी गंभीरता बता दी गई थी कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
राजीव सनवाल ने कहा कि जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार का बजट आता था, तो उसमें लगभग 27 से 28 फीसदी हिस्सा शिक्षा के लिए रखा जाता था। वहीं पिछले महीने आए नगर निगम के बजट में शिक्षा विभाग को कुल मिलाकर केवल 16 फीसद के आसपास की राशि दी गई है। पैरेंट्स को अपने बच्चों को स्कूल भेजते हुए डर लगता है। इमारतों की स्थिति इतनी जर्जर है कि यदि उनके बच्चे को कुछ हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। माता-पिता का मानना है कि बच्चा अनपढ़ रह जाए, लेकिन कम से कम उनके सामने सुरक्षित तो रहेगा। इतना सब कुछ होने के बावजूद बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और सर्व शिक्षा अभियान जैसे नारे लगाने वालों के ये सब नारे केवल कागजी और खोखले हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है।
राजीव सनवाल ने कहा कि इस विषय को लेकर लगातार एडिशनल कमिश्नर से लेकर हर विभाग में बात की गई है, लेकिन किसी पर कोई असर नहीं हो रहा है। “आप” यह उम्मीद करती है कि दिल्ली नगर निगम इसका संज्ञान लेगा और जल्द कार्रवाई करेगा। अन्यथा आम आदमी पार्टी अभिभावकों के साथ मिलकर दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी, क्योंकि शिक्षा हर बच्चे का पहला अधिकार है। आज का शिक्षित बच्चा ही कल भारत का एक अच्छा नागरिक बनेगा। शिक्षा विभाग के अंदर अनेक खामियां चल रही हैं, जिन्हें शिक्षा समिति की बैठक में बार-बार रखा गया है। लेकिन बच्चों की जान की गंभीरता से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता। इसलिए पार्टी इस मुद्दे को सबसे अधिक प्रमुखता से उठा रही है।
वहीं, वार्ड 235 गोरख पार्क से निगम पार्षद प्रियंका सक्सेना ने कहा कि मैं लगातार पिछले तीन साल से क्षेत्रीय स्तर और शिक्षा समिति की बैठकों में यह मुद्दा उठा रही हूं। इसके साथ ही स्कूलों द्वारा भी हर तीन और छह महीने में पत्र दिए जा रहे हैं, लेकिन इसका कोई समाधान निकल कर नहीं आ रहा है। मेरे क्षेत्र के स्कूल की स्थिति इतनी खराब है कि जब बरसात होती है तो छत से पानी टपकता है। शौचालय में 12 महीने पानी टपकता रहता है और कभी भी ऊपर से पलस्तर गिर जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार तो स्कूल में बच्चों की कक्षाएं चलने के दौरान प्लास्टर गिरा है, लेकिन गनीमत रही कि कोई भी बच्चा दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ। कोई बड़ी घटना हो सकती थी, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन और भाजपा सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
प्रियंका सक्सेना ने कहा कि “आप” द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर यह मुद्दा उठाए जाने के बाद अधिकारियों ने कहा था कि वे इमारत का सर्वेक्षण करेंगे। अधिकारियों ने इमारत का सर्वेक्षण किया, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि उन्होंने ना तो पार्षद को उसमें शामिल किया और ना ही स्कूल के शिक्षकों को शामिल किया। यह सब करने के बाद अधिकारियों ने कहा कि इमारत सुरक्षित स्थिति में है और वे इसकी मरम्मत करवा देंगे। मरम्मत के लिए अधिकारियों ने धनराशि का पत्र भी भेजा, लेकिन अभी तक कोई धनराशि नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि नई इमारत बनाना तो बहुत दूर की बात है, स्कूल की मरम्मत भी नहीं हो पा रही है।
प्रियंका सक्सेना ने आगे कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा और बच्चों की जान, दोनों को लेकर राजनीति कर रही है। भाजपा अपने वार्ड के निगम पार्षदों को वहां भी धनराशि उपलब्ध करवा रही है जहां जरूरत नहीं है। लेकिन जहां सच में बच्चों की जान मुसीबत में है, उसे वे अनदेखा कर रहे हैं क्योंकि वहां आम आदमी पार्टी के पार्षद हैं। भाजपा द्वारा की जा रही इतनी बड़ी लापरवाही को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर अभी भी हालात नहीं सुधरे तो हम प्रदर्शन करेंगे और चाहे कुछ भी हो जाए, बच्चों के इस मुद्दे को मजबूती से उठाते रहेंगे।