आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और सांसद संजय सिंह ने शुक्रवार को प्रयागराज जाकर परमपूज्य जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की और यूपी पुलिस द्वारा उनके शिष्यों के साथ हुई मारपीट की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्वामी जी के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के साथ घोर अन्याय किया गया। उनके शिष्यों को घसीट-घसीट कर पीटा गया और 90 वर्ष के बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। ये पाप यूपी की भाजपा सरकार ने किया। जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वही लोग स्वामी जी से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे हैं। स्वामी जी का अपमान हिंदू धर्म की आस्था पर सीधी चोट है।
संजय सिंह ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है। इसका उदाहरण न पहले कभी मिला और न ही शायद आगे कभी मिलेगा कि शंकराचार्य जी के शिष्यों को चोटी पकड़कर घसीट-घसीट कर मारा जाए और शंकराचार्य जी को स्नान से वंचित किया जाए। यह घोर अपराध और पाप उत्तर प्रदेश की सरकार ने किया है। इससे भी ज्यादा अपमानजनक बात यह है कि शंकराचार्य जी से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा जा रहा है। जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वे शंकराचार्य जी से उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे हैं। यह कैसा अधर्म है? शंकराचार्य कौन हैं और कौन नहीं, यह कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर या कानूनगो तय नहीं करेगा। शंकराचार्य हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों से तय होते हैं और उस पर किसी को प्रश्न उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
संजय सिंह ने कहा कि मैं शंकराचार्य जी के साथ उस वक्त भी था जब उन्होंने वाराणसी में गंगा के निर्मल और अविरल होने का आंदोलन चलाया था। उस वक्त मैं उनके आंदोलन में शामिल हुआ था। इसके बाद स्वामी जी ने गौ हत्या के खिलाफ अभियान चलाया। स्वामी जी सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते हैं और सरकार में कौन है, इसकी परवाह नहीं करते। चाहे वह भाजपा हो, सपा हो, कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी हो, यदि किसी भी पार्टी द्वारा धार्मिक रीति-रिवाजों के खिलाफ कोई काम हो रहा है, तो शंकराचार्य जी उसका विरोध करते हैं।
स्वामी जी सिर्फ सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते हैं, सरकार में कौन है, इसकी परवाह नहीं करते- संजय सिंह
संजय सिंह ने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि आज कुछ मीडिया में इस दल या उस दल के समर्थन में चर्चा होती है, लेकिन जो सत्य और सही बात है, उसकी चर्चा शंकराचार्य जी करते हैं। उन्होंने प्रयागराज प्रशासन से सवाल किया कि प्रशासन ने महाकुंभ में अन्य दो शंकराचार्यों के साथ इनका स्नान कराया था। जब भारत के प्रधानमंत्री शंकराचार्य जी के पैर छूते हैं, तब तो वह शंकराचार्य हैं, लेकिन जब उन्होंने सरकार की आलोचना कर दी, तो उनसे पूछा जा रहा है कि वे शंकराचार्य हैं या नहीं?
संजय सिंह ने कहा कि मेरा मन बहुत दुखी और पीड़ित है। पदयात्रा के दौरान मेरी शंकराचार्य जी से फोन पर बात हुई थी और मैंने कहा था कि मैं स्वामी जी का आशीर्वाद लेने आऊंगा। हम लोग उनके आंदोलन में पूरी तरह से उनके साथ हैं। किसी राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि एक समर्पित भक्त के रूप में उनके साथ हैं और जो भी उनका आदेश होगा, उसका पालन करेंगे।
संजय सिंह ने बताया कि मणिकर्णिका घाट को तोड़ दिया गया और वहां मंदिरों को तोड़ दिया गया। मैंने यह विषय उठाया तो मेरे ऊपर एफआईआर दर्ज हो गई। कोई बोल नहीं सकता और कोई आवाज नहीं उठा सकता। काशी कॉरिडोर के नाम पर मंदिरों को तोड़ा गया। पूरे हिंदुस्तान में किसने आवाज उठाई? आदरणीय परम पूज्य शंकराचार्य जी ने आवाज उठाई। वहां 150 से ज्यादा शिवलिंग तोड़े गए, जो आज लंका थाने में पड़े हुए हैं। क्या यह विषय उठाना गलत या अपराध है?
संजय सिंह ने आगे कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य जी ने जब भी कोई बात कही है, वह धर्म के पक्ष में कही है। अधर्मी लोगों को इनसे समस्या हो सकती है, होती रहे, इसकी कोई चिंता नहीं है। हम सब लोग स्वामी जी के साथ हैं