आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा राज में दिल्ली में आईएएस अफसरों को बचाने के लिए बने आईएएस सिस्टम को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आईएएस अफसरों की मिलीभगत से अवैध इमारतें बनती हैं और एक्शन छोटे अधिकारियों पर किया जाता है। चिराग दिल्ली में भ्रष्टाचार की नींव पर बनी अवैध बिल्डिंग मामले में बिल्डर पर कार्रवाई को लेकर साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर की चुप्पी इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि 2021 में चिराग दिल्ली में घटिया मटेरियल से बनी अवैध बिल्डिंग झुक गई थी और हमारे दबाव में उसे गिराया गया। 2025 में वही बिल्डर दोबारा उसी इमारत को बना रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम डिप्टी कमिश्नर से पूछ रहे हैं कि पहले मामले में बिल्डर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, लेकिन वो जवाब नहीं दे रहे हैं। दिल्ली में जब भी कोई हादसा होता है, तो जेई जैसे छोटे अधिकारियों को सस्पेंड कर इतिश्री कर दी जाती है और बड़े-बड़े आईएएस अफसरों को सिस्टम बचा लेता है। हमारी तमाम शिकायत के बाद भी बिल्डर पर कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए अगर ये बिल्डिंग गिरती है तो एक्शन जिम्मेदार आईएएस अफसरों पर होना चाहिए। अगर बार-बार शिकायत के बाद भी डीसी बिल्डर पर कार्रवाई नहीं कर रहे तो इसका मतलब पैसा ऊपर तक पहुंचता है।
सोमवार को आईएएस सिस्टम का पर्दाफाश करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में यह आम बात हो गई है कि कहीं कोई इमारत गिर जाती है और उसमें बच्चे, बुजुर्ग व महिलाएं अपनी जान गंवा देते हैं। हर दो-तीन महीने में ऐसा हादसा होता है और उसके बाद किसी कनिष्ठ अभियंता (जेई) को बलि का बकरा बनाकर सस्पेंड कर दिया जाता है, जिससे मामला वहीं खत्म हो जाता है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज मैं इस बात को स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह मामला केवल जेई तक सीमित नहीं है। यह मामला उन बड़े आईएएस अधिकारियों का है, जिनकी देखरेख में यह भ्रष्टाचार पनपता है। जब कोई हादसा होता है, तो छोटे कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया जाता है, लेकिन असली जिम्मेदार बच निकलते हैं। उन्होंने बताया कि “आप” कार्यकर्ताओं ने एमसीडी के साउथ जोन में एक प्रयोग किया है, जिससे यह सच्चाई सामने आई है।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि चिराग दिल्ली वार्ड के अंदर एक इमारत बन रही थी। यह वही बिल्डर था जिसने साल 2021 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान चोरी-छिपे चिराग दिल्ली में मकान नंबर 699 का अवैध निर्माण किया था। उस समय इतना घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया कि इमारत झुक गई थी। झुकने के बाद एमसीडी पार्षद ने कई बार शिकायत की, लेकिन एमसीडी ने कोई सुनवाई नहीं की। अंततः जब इमारत गिरने की कगार पर थी और बड़ा हादसा हो सकता था, तब मैंने खुद एमसीडी कमिश्नर पर दबाव बनाया और उस इमारत को गिराया गया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसके बाद कई बार लिखित में पूछा गया कि ग्रेटर कैलाश के जिन बिल्डरों ने चिराग दिल्ली में आकर घटिया इमारत बनाई थी, उनके ऊपर क्या कार्रवाई हुई? पार्षद द्वारा पूछे जाने पर भी एमसीडी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद साल 2025 में वही बिल्डर दोबारा उसी इमारत को बनाने लगे। जब एमसीडी से पूछा गया कि पिछली बार इमारत गिरने पर इन पर क्या कार्रवाई हुई थी, तो एमसीडी ने चुप्पी साध ली।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस बार हमने तय किया कि हम जेई या अधिशासी अभियंता (एक्सियन) स्तर पर बात नहीं करेंगे, बल्कि उन बड़े आईएएस अफसरों को बेपर्दा करेंगे जो हर बार बच जाते हैं। इसलिए, इस बार शिकायत सीधे साउथ जोन के डीसी आईएएस अधिकारी दिलखुश मीणा को की गई। जब जुलाई 2025 में पार्षद द्वारा शिकायत की गई, तो उसका कोई जवाब नहीं आया। मेरे द्वारा की गई शिकायत में स्पष्ट कहा गया था कि ये वही लोग हैं जिनकी बनाई इमारत पहले झुक गई थी और बाद में गिराई गई थी। यह पूछा गया कि क्या उन पर कोई कार्रवाई हुई, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि इसके बाद अगस्त 2025 में आरटीआई लगाकर पूछा गया कि क्या उन बिल्डर्स के ऊपर कोई कार्रवाई की गई थी, लेकिन आरटीआई का भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद सितंबर में पार्षद ने डीसी से मुलाकात की और उन्हें बताया कि यह इमारत उसी बिल्डर द्वारा बनाई जा रही है और इसमें फिर से खतरा है। उन्होंने डीसी से आरटीआई का जवाब देने का अनुरोध किया, क्योंकि विभाग जवाब नहीं दे रहा था। डीसी ने आश्वासन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही आरटीआई का जवाब दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसके बाद डीसी को लगातार उनके फोन पर व्हाट्सएप के जरिए तस्वीरें भेजी जाती रहीं ताकि उन्हें पता चले कि इमारत दोबारा गिरने की स्थिति में है। हर महीने डीसी को तस्वीरें भेजी गईं। डीसी लगातार व्हाट्सएप देखते रहे और उन्होंने कोशिश की कि व्हाट्सएप की सेटिंग्स को ‘डिसअपीयरिंग मैसेजेस’ (गायब होने वाले संदेश) पर लगा दें, ताकि भेजे गए संदेश डिलीट हो जाएं। लेकिन मैने सेटिंग को दोबारा ऐसा कर दिया कि संदेश गायब न हों। इसके बाद डीसी ने जवाब देना बंद कर दिया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हर महीने डीसी को फोटो भेजकर बताया गया कि इमारत का काम चल रहा है और यह गिर जाएगी, लेकिन इसके बावजूद साउथ जोन के डीसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि इसके लिए किसी जेई या एक्सियन को सस्पेंड किया जाए। कार्रवाई सीधे डीसी यानी आईएएस अधिकारी पर होनी चाहिए, जो पिछले 8 महीने से शिकायतों पर चुप बैठे हैं और आरटीआई का जवाब नहीं दे रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि अधिकारी कार्रवाई इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि भ्रष्टाचार का जो पैसा जेई और मेट के स्तर पर इकट्ठा किया जाता है, वह ऊपर डीसी और कमिश्नर आदि अफसरों तक पहुंचता है। अगर डीसी बार-बार शिकायत और आरटीआई के बाद भी कार्रवाई नहीं करते और मामले को दबाए रखते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि पैसा डीसी तक पहुंच रहा है। और यदि सरकार डीसी पर कार्रवाई नहीं कर रही है, तो इसका अर्थ है कि पैसा सरकार तक भी पहुंच रहा है