आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने स्पीकर द्वारा दिल्ली बजट पर चर्चा के लिए बहुत कम समय आवंटित करने पर सवाल उठाया है। उन्होंने आपत्ति जताते हुए दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को चिट्ठी लिखी है और पूछा है कि आखिर भाजपा की सरकार दिल्ली की जनता से क्या छिपाना चाहती है, जो वह वार्षिक बजट पर विस्तृत चर्चा से भाग रही है? उन्होंने पूछा है कि राज्य के बजट पर चर्चा लिए मात्र एक घंटा क्यों आवंटित किया गया और सरकार सदन में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने से क्यों बच रही है?
नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने दिल्ली बजट 2025-26 की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या यह बजट काल्पनिक रेवेन्यू अनुमानों पर आधारित है और यही कारण है कि सरकार बजट पर विस्तृत चर्चा नहीं कराना चाहती है। उन्होंने प्रश्न किया कहा कि क्या 70 विधायकों वाली विधानसभा में वार्षिक बजट पर चर्चा के लिए सिर्फ एक घंटा खर्च किया जाएगा और क्या इसे पांच अन्य एजेंडा आइटम्स के बीच दबा दिया जाएगा? मेरा स्पीकर से अनुरोध है कि अगले दो दिनों तक सदन में सिर्फ बजट पर चर्चा की जाए और जरूर हो तो सत्र को एक दिन के लिए बढ़ा दिया जाए।
स्पीकर को लिखे पत्र में आतिशी ने कहा है कि मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के समक्ष मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा वार्षिक बजट अनुमान 2025-26 प्रस्तुत किया गया। आप (स्पीकर) एक अनुभवी विधायक और उससे भी अधिक अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं। इसलिए आप अच्छे से जानते हैं कि वार्षिक बजट अनुमान किसी भी विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत होने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसे प्रस्तुत करने के बाद कई दिनों तक इस पर चर्चा होती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक अपने विचार रखते हैं और वित्त मंत्री उन सभी मुद्दों का जवाब देते हैं, जिसके बाद बजट विधानसभा द्वारा पारित किया जाता है। यह चर्चा और बहस न केवल विधायकों के लिए महत्वपूर्ण होती है, बल्कि दिल्ली के मतदाता और देश भर के लोग इसे बड़े ध्यान से देखते हैं।
आतिशी ने लिखा है कि हमें अपेक्षा थी कि वर्तमान सत्र के शेष तीन दिन मुख्य रूप से बजट पर चर्चा में खर्च किए जाएंगे। लेकिन मंगलवार को देर रात मुझे बुधवार के लिए कार्यसूची प्राप्त हुई, जिसे देखकर मैं स्तब्ध रह गई कि कार्यसूची में इतने सारे विषय शामिल हैं कि बजट पर चर्चा के लिए मुश्किल से एक घंटा ही बच पाएगा।
आतिशी ने आगे लिखा है कि चूंकि, सत्र का समय सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक है, जिसमें एक घंटा नियम 280 के तहत, एक घंटा प्रश्नों के लिए और एक घंटा दोपहर के भोजन के लिए जाता है, तो केवल तीन घंटे ही शेष बचते हैं। इन तीन घंटों में बजट पर चर्चा सीएजी रिपोर्ट, नियम 55 के तहत जल संकट और जलभराव पर संक्षिप्त चर्चा, नियम 107 के तहत एक प्रस्ताव, विधानसभा समितियों की दो रिपोर्टों को अपनाना और मुख्यमंत्री द्वारा वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करना जैसे कार्य शामिल हैं।
आतिशी ने सवाल किया है कि क्या इस तरह से बजट पर विस्तृत चर्चा हो सकती है? क्या 70 विधायकों वाली विधानसभा वार्षिक बजट पर केवल एक घंटे चर्चा करेगी? क्या इसे पांच अन्य एजेंडा आइटम्स के बीच दबा दिया जाएगा? ऐसा प्रतीत होता है मानो सरकार बजट पर विस्तृत चर्चा से बचना चाहती हो। यह बेहद चिंताजनक है। सबसे पहले, सरकार ने सभी संसदीय परंपराओं के विपरीत जाकर बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत नहीं किया और अब बजट पर चर्चा को इतने सारे मुद्दों के बीच दबा दिया गया है। यह भी नहीं बताया गया कि बजट पर चर्चा के लिए कितना समय दिया जाएगा या सत्तारूढ़ दल और विपक्ष को कितना समय मिलेगा।
आतिशी ने चिंता जताते हुए कहा है कि ऐसा लगने लगा है कि सरकार कुछ छिपाना चाहती है। इकोनॉमिक सर्वे में ऐसा कौन सा आर्थिक डेटा और विश्लेषण है, जो सरकार सामने नहीं लाना चाहती? क्या यह बजट 2025-26 काल्पनिक राजस्व अनुमानों और आर्थिक रुझानों पर आधारित है? क्या यही कारण है कि सरकार न तो आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करना चाहती है और ना ही बजट पर ठोस चर्चा करवाना चाहती है?
आतिशी ने स्पीकर विजेंद्र गुप्ता से कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में संसदीय प्रक्रियाओं और परंपराओं की पवित्रता सुनिश्चित करना आपका दायित्व है। मेरा आपसे अनुरोध है कि अगले दो दिन केवल बजट पर चर्चा के लिए समर्पित किए जाएं। शेष चर्चा और कार्य 28 मार्च को रखे जा सकते हैं या यदि आवश्यक हो तो सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है।