आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को जनकपुरी में घटना स्थल का दौरा किया, जहां सड़क में खोदे गए गड्ढे में गिर कर बाइक सवार की मौत हो गई थी। उन्होंने घटना स्थल के चारों तरफ बड़ी बारिकी से मुआयना किया और पाया कि दिल्ली पुलिस ने भाजपा सरकार को बचाने के लिए घटना स्थल पर छेड़छाड़ की है। उन्होंने कहा कि गड्ढे में गिरने से एक परिवार का चिराग बुझ गया और पुलिस फर्जीवाड़ा करके भाजपा सरकार को बचाने में लगी है। अगर पहले से ही गड्ढे के चारों तरफ बैरिकेडिंग थी तो क्या बाइक सावार हवा में उड़कर अंदर आ गिरा? पुलिस ने जानबूझ कर पीड़ित परिवार को लोकेशन देने के बाद डिलीट कर दिया, ताकि घटना स्थल पर छेड़छाड़ कर सरकार को बचा सके।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि क्राइम सीन पर सड़क के एक तरफ 8 फुट ऊंची बैरिकेडिंग है, जिसके ऊपर तार लगी हुई है। सड़क के दूसरी तरफ और तीसरी तरफ भी इतनी बड़ी लोहे की बैरिकेडिंग है और गड्ढे के दूसरी तरफ भी बैरिकेडिंग है। सीधे तौर पर दिल्ली पुलिस ने क्राइम सीन में बदलाव करके खुल्लम-खुल्ला फर्जीवाड़ा किया है। जब चारों तरफ बैरिकेडिंग और बाउंड्री है, तो क्या बाइक सवार युवक हवा में उड़कर गड्ढे में आ गया? यहां बाइक सवार तभी गिर सकता है जब कोई उसे ऊपर से हवाई जहाज से फेंक दे। क्या कोई सरकार इस हद तक गिर सकती है कि सिर्फ यह साबित करने के लिए कि सरकार की गलती नहीं थी और लड़का खुद ही गड्ढे में गिरकर मर गया। यह देखकर साफ पता चलता है कि क्राइम सीन पर बाद में चारों तरफ से लोहे के बैरिकेड लगाए गए?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक बैरिकेडिंग वह होती है जो क्राइम सीन के लिए की जाती है, जिसमें पन्नियां बांधी जाती हैं। लेकिन यह वह बैरिकेडिंग नहीं है, यह फर्जीवाड़ा करने के लिए बनाई गई है। यह दिखाने के लिए कि बैरिकेडिंग तो चारों तरफ लगी हुई थी, वह लड़का ही पागल था और उसका दिमाग खराब था। वह रोहिणी से यहां तक आया, फिर लोहे की बैरिकेडिंग खोली, बाइक लेकर अंदर आया, फिर बैरिकेडिंग बंद की और फिर सोचा कि अब इस गड्ढे में कूदकर मरूंगा, क्योंकि मुझे भाजपा की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद और पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को बदनाम करना है। इसलिए अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय ताकतों और जॉर्ज सोरोस ने उसे पैसा दिया, ताकि वह यहां आकर इस गड्ढे में कूदकर मर जाए और इन लोगों को बदनाम कर सके। सरकार यही स्पष्टीकरण दे रही है, जो पूरी तरह से शर्मनाक है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आंकड़ों का फर्जीवाड़ा करना आज भाजपा सरकार का सबसे पहला काम बन गया है। पिछले तीन दिनों से खबर चल रही है कि दिल्ली के अंदर साल के पहले 15 दिनों में 800 से ज्यादा लोग गायब हो गए हैं। इसमें बड़ी संख्या में 12, 13 और 14 साल की नाबालिक लड़कियां हैं। जब इसके बारे में सवाल पूछा जाता है, तो पुलिस एफआईआर दर्ज करने की धमकी दे रही है। पुलिस हमारे खिलाफ सैकड़ों एफआईआर दर्ज कर लें। हम भाजपा की ईडी, सीबीआई और पुलिस की एफआईआर से नहीं डरते हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यहां मरने वाला कोई भी हो सकता था। गायब होने वाली भी किसी की भी बेटी हो सकती है। एक लड़का नोएडा में मर गया, तो दो दिन बाद दूसरे राज्य गुड़गांव के रेस्टोरेंट की सीसीटीवी फुटेज ले आए कि वह लड़का वहां पार्टी कर रहा था। ये लोग इतने घटिया हैं कि एक बाप का लड़का मर गया और ये साबित करने में लगे हैं कि वह पार्टी कर रहा था, इसलिए उसे मरना ही था। सरकार अभी तक इस घटना की सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं लाई? इस बात पर इतना सस्पेंस क्यों बना हुआ है? जब हर चौराहे, सड़क और गली में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो फुटेज क्यों नहीं मिली?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मृतक युवक की मोबाइल लोकेशन पुलिस के पास थी, उसका मोबाइल चल रहा था और घंटी बज रही थी। पुलिस ने रात को लोकेशन शेयर की और तुरंत डिलीट कर ली। पुलिस क्या छिपाना चाहती थी? क्या वे इस बात को छिपाना चाहते थे ताकि सुबह उनके राजनीतिक मालिक उठें और बताएं कि खबर को कैसे बाहर देना है? पुलिस और स्थानीय मंत्री आशीष सूद की भूमिका सीधा-सीधा एक आपराधिक कृत्य है। इस पूरे क्राइम सीन को ड्रेस अप किया गया है और छेड़छाड़ करके सरकार व प्रशासन को बचाने की भूमिका बनाई गई है।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि नोएडा वाले मामले में भी एक हफ्ते तक कमेटी की बातें होती रहीं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला, इसलिए यहां भी कमेटी बनाने से कुछ होगा। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक कर बताना चाहिए कि रात को यहां क्या हुआ था और सुबह-सुबह यह बैरिकेडिंग किसने की? उन्होंने मुआवजे के सवाल पर कहा कि मुआवजा बहुत छोटी चीज है। मृतक को सबसे पहले इंसाफ मिलना चाहिए। ये लोग मुआवजा केवल भाजपा वालों को देते हैं। पिछले एक साल में दिल्ली में डूबने, जलने, करंट लगने या दीवार गिरने से 100 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई है, लेकिन सरकार ने मुआवजा और नौकरी सिर्फ एक भाजपा कार्यकर्ता के परिवार को दी। भाजपा को कुछ देना ही है, तो वह अपनी पार्टी के फंड से दे दे। यदि दिल्ली के टैक्सपेयर का पैसा दिया जा रहा है, तो सभी पीड़ितों को दिया जाना चाहिए। सभी को समान रूप से नौकरी दी जानी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है।