आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार द्वारा कांवड़ शिविर लगाने को लेकर की जा रही गंदी राजनीति पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ‘‘आप’’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार कांवड़ समितियों को पैसा देने में भेदभाव कर रही है। भाजपा सरकार ने कहा था कि वह टेंड, बिजली, साउंड का खर्च नहीं उठाएगी, बल्कि समितियों के खाते में सीधे पैसा देगी। कांवड़ शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी को पैसा नहीं मिला है। भाजपा कांवड़ शिविर लगाने में भी राजनीति कर रही है। इसी गंदी राजनीति के तहत गुरुवार को कोंडली में वर्षों से लग रहे कांवड़ शिविर को पुलिस से हटवा दिया गया। अब यहां किसी भाजपा नेता से शिविर लगवाया जाएगा। वहीं, भाजपा सरकार ने अपने विधायकों को नई समितियां बनाने को कहा है, ताकि उन्हें पैसा मिले, लेकिन वर्षों से चल रही समितियों को पैसा नहीं देगी।
“आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कोंडली के “आप” विधायक कुलदीप कुमार के साथ पार्टी मुख्यालय में कांवड़ यात्रा को लेकर प्रेस वार्ता कर कहा कि सावन में उत्तर भारत में गंगा से कांवड़ लाने का पुराना चलन है। लाखों शिव भक्त गंगाजल लेकर अपने गांव-मोहल्ले के शिव मंदिरों में भोले बाबा को जल चढ़ाते हैं। पिछले 10-11 साल तक आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने इसे बहुत व्यवस्थित ढंग से चलाया। कांवड़ शिविरों के लिए “आप” सरकार टेंट, लाइट, साउंड, फर्नीचर, कूलर, पंखे, म्यूजिक सिस्टम, स्टेज का खर्च उठाती थी। कांवड़ समितियों को सिर्फ सेवा और प्रसाद वितरण की व्यवस्था करनी होती थी। ‘‘आप’’ सरकार कांवड़ समिति किस पार्टी से जुड़ी है, इसमें कोई फर्क नहीं करती थी और सबको निष्पक्ष होकर आर्थिक मदद करती थी।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मेरी विधानसभा ग्रेटर कैलाश में दो कांवड़ शिविर लगते थे। कुछ न्यूट्रल लोग थे, तो कुछ भाजपा से जुड़े थे। इसके बाद भी हम पूरी श्रद्धा से उनका काम कराते थे। टेंट, लाइट, साउंड लगवाते थे। हमने कभी उन पर कब्जा करने की कोशिश नहीं की। 10 साल बाद भी वही लोग शिविर चलाते रहे। लेकिन अब भाजपा सरकार ने कांवड़ यात्रा में भी गंदी राजनीति घुसा दी है। भाजपा सरकार ने कहा कि सरकार टेंट, लाइट, साउंड नहीं लगवाएगी, सीधे कावंड़ समितियों को पैसा देगी। कांवड़ समितियों में असमंजस की स्थिति थी कि सरकार कितना और कब पैसा देगी। सचिवालय में मंत्री ने इसको लेकर मीटिंग ली, उसका विरोध किया गया। वहां कांवड़ वालों और शिविर के लिए आपत्तिजनक शब्द भी कहे गए। सरकार ने कहा कि कावंड़ समितिके खाते में पैसा देगी। अब कांवड़ शिविर लगने का समय आ गया, लेकिन अभी तक किसी को पैसा नहीं मिला। कांवड़ वालों को यह भी नहीं पता है कि कितना और कब पैसा मिलेगा।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अब भाजपा सरकार कावंड़ शिविरों में भेदभाव शुरू कर दी है। जो कांवड़ शिविर भाजपा से नहीं जुड़े हैं, उनको सरकार द्वारा अनुमति नहीं दी जा रही है। भाजपा नेताओं को कहा गया है कि अपनी समितियां बनाकर सोसाइटी रजिस्टर कराओ, उसका बैंक अकाउंट खुलवाओ और उसमें सरकार पैसा देगी। भाजपा सरकार दिल्ली के करदाताओं का पैसा उन कांवड़ समितियों को नहीं देना चाहती, जो 5-20 साल से शिविर लगा कर सेवा रही थीं। उनकी जगह भाजपा नेताओं के नए शिविरों को पैसा देने की योजना बनाई जा रही है। “आप” विधायक कुलदीप कुमार की संस्था पिछले 6 साल से कोंडली पुल पर शंखवार अस्पताल के सामने कांवड़ शिविर लगाती थी। यहां सरकार द्वारा टैंट, लाइट, साउंड की व्यवस्था की जा रही थी। यह दिल्ली का सबसे बड़ा कांवड़ शिविर था। यहीं से दिल्ली की शुरुआत होती है। लेकिन इस बार गंदी राजनीति के चलते बृहस्पतिवार को सुबह दिल्ली पुलिस ने इस शिविर का टेंट हटा दिया। पुलिलस ने कहा कि यह शिविर नहीं लगेगा। अब किसी नए आदमी से लगवाएंगे।
इस दौरान, “आप” विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली सरकार कांवड़ियों और भोले भक्तों के लिए व्यवस्थाएं करती है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली “आप” सरकार शानदार व्यवस्थाएं करती थी, जिसमें टेंट, लाइट, साउंड, टॉयलेट की व्यवस्था शामिल होती थीं। संस्थाएं सिर्फ सेवा और भोजन का काम करती थीं। यह चलन दिल्ली में लगातार रहा है। दिल्ली में बड़े-बड़े पंडाल लगते हैं, जिनका खर्च 25-40 लाख तक होता है। शाहदरा जैसे यूपी बॉर्डर इलाके में 15-20 दिन पहले कांवड़ कैंप लग जाते हैं। लेकिन पहली बार दिल्ली में ऐसा देखने को मिल रहा कि 10 जुलाई हो चुकी है और 23 जुलाई को कांवड़ियों ने जल चढ़ाना है। मात्र 13 दिन ही बचे हैं, लेकिन अभी तक किसी कांवड़ समिति को नहीं पता लग पाया कि उनका टेंट लगेगा या नहीं।
कुलदीप कुमार ने कहा कि समिति के लोग बात कर रहे हैं कि अगर टैंट लगेंगे तो पैसा कहां से आएगा। चंदा कैसे इकट्ठा करेंगे। हर कांवड़ समितियां संशय में हैं। सचिवालय में हुई मीटिंग के दौरान कांवड़ समितियों ने सरकार के फैसले का विरोध किया। मंत्री कपिल मिश्रा ने आश्वासन दिया कि समितियों की बात मानेंगे, इसे सीधे पैसा नहीं देंगे। इसके बावजूद तानाशाही तरीके से इसे लागू कर दिया गया। दिल्ली में अफरातफरी है। पिछले 6 साल से कोंडली में लगने वाले कांवड़ कैंप की अनुमति को रद्द कर किसी दूसरी संस्था को अनुमति दे दी गई।