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एपीजे स्कूल ने बच्चों के एडमिट कार्ड रोक दिए, जब ‘‘आप’’ ने पैरेंट्स के साथ प्रदर्शन किया तो उसे झुकना पड़ा- सौरभ भारद्वाज

  • February 25, 2026

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बच्चों के पैरेंट्स की तरफ से टाइम्स ऑफ इंडिया को लीगल नोटिस भेजने को ऐसे अखबारों के लिए सबक बताया है। उन्होंने कहा कि पैरेंट्स ने टाइम्स ऑफ इंडिया को लीगल नोटिस भेज कर आईना दिखाया है। पैरेंट्स ने यह नोटिस एकतरफा, असत्यापित, गलत और मानहानि कारक खबर छापने के लिए भेजा है। पैरेंट्स ने नोटिस में कहा है कि अखबार ने उनको बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ झूठे तथ्य छापकर एपीजे स्कूल और सरकार मुखपत्र बनने का काम किया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि निजी स्कूलों ने मनमानी फीस बढ़ाई और रेखा गुप्ता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर सरेंडर कर दिया। एपीजे स्कूल ने तो बच्चों के एडमिट तक कार्ड रोक दिए। जब ‘‘आप’’ ने पैरेंट्स के साथ प्रदर्शन किया तब उसे झुकना पड़ा।

बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2025 में प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ाने और दिल्ली सरकार के सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर करने के कारण दिल्ली का मध्यम वर्ग काफी तकलीफ में है। क्योंकि निजी स्कूलों में बढ़ी फीस पर नया कानून 2025-26 में लागू नहीं होगा। एपीजे स्कूल ने खुलेआम 10वीं और 12वीं बोर्ड के बच्चों के एडमिट कार्ड तक रोक दिए थे। इसके बाद अभिभावकों और “आप” नेताओं ने मिलकर संघर्ष किया, जिसके परिणामस्वरूप स्कूल को एडमिट कार्ड देने पड़े। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो अंग्रेजी अखबार मध्यम वर्ग और जनता की आवाज उठाने के लिए जाने जाते रहे हैं, उन्होंने स्कूल मालिकों की आवाज बनकर दिल्ली के मध्यम वर्ग को बहुत ज्यादा नाराज किया है।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि जिस तरह की रिपोर्टिंग टाइम्स ऑफ इंडिया में हुई, वह पूरी तरह से अभिभावकों के खिलाफ थी और एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश थी। उन्होंने इस बात पर खुशी और गर्व व्यक्त किया कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली का मध्यम वर्ग सड़कों पर उतर कर आया है। अब मुझे बहुत उम्मीद जगी है क्योंकि अभिभावकों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को लीगल नोटिस भेजा है।

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि यह लीगल नोटिस तीन दिन पहले तीन अभिभावकों और अभिभावकों की एसोसिएशन द्वारा टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिटर और संबंधित रिपोर्टर को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस लीगल नोटिस के अंदर जो बातें लिखी गई हैं, वह दिल्ली के पूरे मध्यम वर्ग को जाननी चाहिए। यह लीगल नोटिस वकील के माध्यम से टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिटर-इन-चीफ जयदीप बोस और रिपोर्टर मेघना धूलिया को भेजा गया है। यह नोटिस 15 फरवरी और 17 फरवरी को प्रकाशित एकतरफा, असत्यापित, तथ्यात्मक रूप से गलत और मानहानिकारक खबर छापने व पत्रकारिता के नैतिकता को तार-तार करने के लिए दिया गया है।

सौरभ भारद्वाज ने जानकारी दी कि अभिभावकों ने लीगल नोटिस के माध्यम से टाइम्स ऑफ इंडिया को सूचित किया है कि उनका प्रकाशित लेख तथ्यों का घोर गलत प्रस्तुतीकरण है और यह एक पूरी तरह से एकतरफा और पक्षपाती नैरेटिव पेश करता है, जो केवल स्कूल प्रबंधन और शिक्षा मंत्री आशीष सूद के पक्ष को ही दर्शाता है। अखबार ने एकतरफा खबर छापकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है और इसमें अभिभावकों का पक्ष नहीं दिया गया है। लीगल नोटिस में आगे लिखा गया है कि अखबार ने बिना किसी प्रभावित अभिभावकों या अभिभावकों की एसोसिएशन से संपर्क किए और उनका पक्ष जाने बिना ही लेख प्रकाशित कर दिया। अखबार ने अभिभावकों से बात किए बगैर ही उन्हें जानबूझकर फीस न देने वाले डिफॉल्टर के रूप में प्रस्तुत किया, जो कि सच्चाई नहीं है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अखबार ने महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि किए बिना स्कूल का बयान छाप दिया। सच्चाई यह है कि अभिभावक 2020 में हाई कोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग के अनुसार सही फीस की राशि लगातार चेक के माध्यम से भेज रहे हैं। डीएम के माध्यम से भेजे जाने के बावजूद स्कूल वे चेक स्वीकार नहीं कर रहा है। अखबार ने यह बात नहीं छापी, बल्कि केवल यह एकतरफा और झूठी खबर छापी कि अभिभावकों पर एक-दो लाख रुपये बकाया हैं।

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि अभिभावक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी गए थे, जिसने 16 फरवरी 2026 को अभिभावकों के पक्ष में फैसला देते हुए स्कूल को बच्चों के एडमिट कार्ड देने का निर्देश दिया था। लेकिन यह खबर भी टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रकाशित नहीं की। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून का एक तय मानक है। हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार, शिक्षा भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा के अधिकार में शामिल एक महत्वपूर्ण अधिकार है। फीस विवाद को लेकर बच्चों को परीक्षा से रोककर उनके भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। अखबार ने इस कानूनी संदर्भ को छिपाकर जनता के सामने एक विकृत तस्वीर पेश की है।

लीगल नोटिस में यहां तक कहा गया है कि अखबार लगभग एपीजे स्कूल और प्राइवेट स्कूलों का मुखपत्र बन गया है। इस लेख के प्रकाशन से अभिभावकों और उनके नाबालिग बच्चों को गंभीर मानसिक आघात, पीड़ा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। अखबार ने उन्हें समाज, रिश्तेदारों और दोस्तों की नजरों में वित्तीय दायित्व न निभाने वाले व्यक्तियों के रूप में गलत तरीके से चित्रित करके सार्वजनिक उपहास का पात्र बनाया है। अखबार की रिपोर्ट ने स्कूल की अवैध मांगों को वैध ठहराने और अभिभावकों के जायज संघर्ष को कमजोर करने का काम किया है। इस तरह की चुनिंदा रिपोर्टिंग ने उन सभी अभिभावकों को डराने का काम किया है जो शक्तिशाली स्कूल प्रबंधन के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकते थे।

अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि अखबार को यह बताना चाहिए था कि यह वह स्कूल है जो कानून नहीं मान रहा है और जबरदस्ती बांह मरोड़कर बढ़ी हुई फीस लेना चाहता है। ऐसा न करके अखबार ने उन सभी अभिभावकों को पीछे धकेल दिया है जो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ लड़ सकते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि मीडिया द्वारा समाज में उन्हें इसी तरह बदनाम किया जाएगा। अखबार ने इस बदनामी में स्कूल प्रबंधन की सहायता की और उनका मुखपत्र बनने का काम किया।

सौरभ भारद्वाज ने नोटिस की अंतिम और महत्वपूर्ण पंक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि अखबार ने सार्वजनिक डोमेन में मौजूद सच्चे और सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों को सत्यापित किए बिना रिपोर्टिंग की। 5 मई 2020 के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने न केवल अभिभावकों और आम जनता के साथ बल्कि सरकार के साथ भी धोखाधड़ी की थी, जिसके लिए स्कूल को सील किया गया था। स्कूल ने शिक्षा विभाग में कार्यरत एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के माध्यम से फीस बढ़ाने की फर्जी ईमेल अप्रूवल तैयार की थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्य सचिव ने प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और स्कूल को सील करने का निर्देश दिया था।

सौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि 2020 में तत्कालीन आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा इस स्कूल को सील कराया गया था। भाजपा मंत्री आशीष सूद जो बातें कहते हैं, वे गलत हैं। सच्चाई यह है कि इस स्कूल ने सरकार की मर्जी के खिलाफ फीस बढ़ाई थी और शिक्षा निदेशालय के एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी से फर्जी ईमेल कराकर बढ़ी हुई फीस की सहमति प्राप्त की थी। जब इसकी जांच पेटीशंस कमेटी द्वारा कराई गई और मामला हाई कोर्ट के सामने आया, तो यह साबित हो गया कि स्कूल ने फर्जीवाड़ा किया था। हाई कोर्ट ने स्कूल को कड़ी फटकार लगाई थी और मुख्य सचिव को इस फर्जीवाड़े के लिए स्कूल पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एपीजे स्कूल न सिर्फ फर्जीवाड़ा करके और नकली ईमेल जनरेट कराकर अपनी फीस बढ़ाता है, बल्कि बढ़ी हुई फीस न देने पर अभिभावकों को डराता-धमकाता है और बच्चों के एडमिट कार्ड रोक लेता है। ऐसे में टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे अखबारों को एपीजे स्कूल की यह सच्चाई पहले पन्ने पर छापनी चाहिए थी और जनता को बताना चाहिए था कि ये लोग क्या कर रहे हैं। इसके विपरीत, अखबार ने खबरों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया ताकि हाई कोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सड़क पर हजारों बच्चों के लिए संघर्ष कर रहे अभिभावकों की लड़ाई को कमजोर किया जा सके।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुझे ऐसे अभिभावकों पर बहुत गर्व है जिन्होंने आज पहली बार टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे अखबार को आईना दिखाया है और उन्हें मानहानि का लीगल नोटिस भेजा है।

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aamaadmiparty

The Fastest Growing Political Startup 🚀 Leading Alternative Politics for a Better India 🇮🇳

Schools turning into liquor hubs — this is the r Schools turning into liquor hubs — this is the reality under BJP-NDA rule.

When education spaces are compromised like this, it’s not just negligence, it’s a complete collapse of priorities.
Different places, same condition of healthcare. We Different places, same condition of healthcare. Welcome to the BJP’s rule‼️
अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध 15 दिनों के लिए रुका है, लेकिन इस दौरान ईरान को सावधान रहना होगा।

इस युद्धविराम के दौरान पाकिस्तान मध्यस्थ बनकर उभरा और इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ख़राब और “ही-ही, खी-खी” वाली विदेश नीति रही है।

हम महात्मा गांधी और बुद्ध के देश हैं, लेकिन अमेरिका के दबाव में हमने अपने पुराने और परंपरागत देशों से रिश्ते बिगाड़ लिए हैं। प्रधानमंत्री ने अपने खास दोस्त Adani को बचाने के लिए ईरान से दुश्मनी ले ली।

— @sanjaysinghaap जी, राज्यसभा सांसद, AAP
And the Prime Minister and the Home Minister remai And the Prime Minister and the Home Minister remain silent and unaccountable… again.
कानून-व्यवस्था ढेर कानून-व्यवस्था ढेर, अमित शाह हुए फेल
दिल्ली में अपराधियों का बढ़ता खेल‼️
यह कोई और नहीं बल्कि भाजपा के पोस्टर बॉय और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा बोल रहे हैं।

BJP के लिए ‘गौ माता’ महज़ एक चुनावी जुमला और दंगा-फसाद का मुद्दा है। उत्तर भारत में BJP और उसके समर्थक ‘गौरक्षा’ के नाम पर हत्याएँ करते हैं।

लेकिन इनके नेता खुद कह रहे हैं, गौ मांस खाओ‼️
‘जल जीवन मिशन’ के नाम पर भाजपा सरकार में सिर्फ भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी।
“असम में बीजेपी का मुख्यमंत्री कहता है कि “मुसलमानों की दुकानों से सामान नहीं खरीदना है।”

बीजेपी के अंधभक्त तय कर लें कि वे मुस्लिम देशों से आने वाली गैस से खाना नहीं बनाएंगे और तेल से गाड़ी नहीं चलाएंगे।”

— @sanjaysinghaap , राज्यसभा सांसद, आम आदमी पार्टी

#रोजगार_दो_सामाजिक_न्याय_दो
दिल्ली चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि सरकार बनते ही हर महिला को हर महीने ₹2500 मिलेंगे। 8 मार्च 2025 तक पैसे देने की बात भी कही गई थी।

मार्च बीत गया, लेकिन दिल्ली की महिलाओं को एक पैसा भी नहीं मिला।

अब वही जुमला केरलम में भी परोसा जा रहा है।
सवाल सीधा है—
दिल्ली में किया गया वादा कब पूरा होगा, साहब?
योगी सरकार का फर्जीवाड़ा
Kaam-kaaj ❌ Reelbaaz ✅ Kaam-kaaj ❌
Reelbaaz ✅
नशे के खिलाफ मान सरकार की नीति है एकदम साफ।
 
जो नशा तस्करों का साथ देगा, उस पर तुरंत सख्त एक्शन होगा।
गुजरात में आम आदमी पार्टी को जबरदस्त प्यार, जनसमर्थन और आशीर्वाद मिल रहा है। 

इसी से भाजपा की तानाशाह सरकार घबराई हुई है और झूठे मुकदमे लगाकर AAP के कार्यकर्ताओं को जेल भेज रही है‼️
ये वायरल वीडियो वाराणसी का बताया जा रहा है, जिसमें गंगा नदी में बड़ी नाव पर DJ बज रहा है और लोग शराब पीते हुए वीडियो भी बना रहे हैं।

सवाल ये है कि क्या UP की सरकार और वाराणसी प्रशासन ने मां गंगा में इन शराब पार्टियों की आधिकारिक परमिशन दे दी है?
पंजाब के शानदार 4 सा पंजाब के शानदार 4 साल,
काम दमदार, नतीजे कमाल 🙌
Inse Delhi to sambhal nahi rahi… Inse Delhi to sambhal nahi rahi…
मोदी जी के जुमलों और जमीनी सच्चाई में जमीन आसमान का फ़र्क़ है‼️
मैं प्रधानमंत्री ज मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि आप Kerala Files पर बात करते हैं, आइए Epstein Files पर भी बात करते हैं।
Topibaj pro max 💀 Topibaj pro max 💀
Claims vs Reality ‼️ Claims vs Reality ‼️
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