आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने नोएडा के एक नाले में डूबने से हुई इंजीनियर की दर्दनाक मौत मामले में भाजपा की यूपी सरकार द्वारा नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि नोएडा की जिलाधिकारी मेघा रूपम भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। इसलिए भाजपा सरकार डीएम मेधा रूपम को मचाने में जुटी है। इंजीनियर की मौत डीएम के अधीन एसडीआरएफ की रेस्क्यू में विफलता के चलते हुई है। इंजीनियर दो घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन वहां मौजूद एसडीआरएफ ने उसे बचाने की कोशिश ही नहीं की। इसलिए सवाल उठ रहा है कि जब एसडीआरएफ की जिम्मेदारी डीएम मेधा रूपम की थी, तो सरकार ने सीईओ का तबादला क्यों किया?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर के लोगों में भारी गुस्सा है। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात को अपने घर नोएडा लौट रहा था, तभी उसकी गाड़ी सड़क पर बने नाले में गिर गई। नाले में गिरने के बाद भी वह बेटा जिंदा था और उसने अपने पिता को फोन किया। पिता मौके पर पहुंचे, पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) भी वहां पहुंच गई, जिनका काम ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन करना होता है। वह लड़का दो घंटे तक जिंदा रहा और मदद मांगता रहा। उसके पिता और वहां मौजूद एसडीआरएफ समेत सभी लोग उसकी आवाज सुनते रहे, लेकिन उसे बचाया नहीं गया और वह वहीं डूबकर मर गया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एसडीआरएफ, चश्मदीदों और आसपास के लोगों के मुताबिक, एसडीआरएफ के जवान पानी में नहीं कूदना चाहते थे क्योंकि पानी बहुत ठंडा था और उसमें लोहे के सरिए होने की संभावना थी। सवाल यह है कि दो घंटे तक तमाम सुरक्षाबलों और एसडीआरएफ के सामने वह लड़का चिल्लाता रहा, लेकिन उसे नाले से नहीं निकाला जा सका। इस घटना पर बहुत गुस्सा है और बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का तबादला कर दिया है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस कार्रवाई के बाद हमने यह जानने की कोशिश की कि आखिर सीईओ और नोएडा के डीएम का क्या काम होता है। नोएडा की डीएम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी, मेधा रूपम हैं। जब हमने दोनों की जिम्मेदारियों को देखा, तो पाया कि डीएम की जिम्मेदारी राजस्व संग्रह, चुनाव और आपदा प्रबंधन की होती है। डीएम ही डीडीएमए (जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) की प्रमुख होता हैं और रेस्क्यू प्रयासों का समन्वय करता हैं। वहीं, सीईओ की जिम्मेदारी अर्बन डेवलपमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, लैंड मैनेजमेंट और म्युनिसिपल कार्यों की होती है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में खामी थी, इसलिए गलती सीईओ की भी है। लेकिन सवाल यह था कि एसडीआरएफ किसके अधीन आती है? जब हमने यह पता किया कि नोएडा में एसडीआरएफ सीईओ के अधीन आती है या डीएम के, तो जवाब मिला कि एसडीआरएफ की तैनाती और लोकल स्तर पर समन्वय मुख्य रूप से जिलाधिकारी, यानी मेधा रूपम के अधीन आता है।
सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब रेस्क्यू में विफलता और एसडीआरएफ की जिम्मेदारी डीएम मेधा रूपम की थी, तो तबादला सीईओ का क्यों किया जा रहा है? क्या यह कार्रवाई इसलिए तो नहीं की जा रही क्योंकि मेधा रूपम के पिता भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जो एक पावरफुल ब्यूरोक्रेट हैं, सरकार के बहुत करीब हैं और उन पर भाजपा की मदद करने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए यह सवाल उठता है कि उनकी बेटी को बचाने के लिए सीईओ का तबादला तो नहीं किया जा रहा है?