आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने संसद में लोकहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं कराने से भागने पर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में विभिन्न विषयों पर चर्चा कराने की बजाय भाग रही है। इसलिए सोमवार को हमने सदन का वहिष्कार किया। भाजपा ने चुनाव आयोग को अपनी घरेलू संस्था बना दिया है और उसकी केंद्र व राज्य सरकारें मतदाताओं के वोट कटवाकर अपने फ़र्ज़ी वोट बनवा रही हैं। हमने शेयर मार्केट में लोगों के लाखों करोड़ रुपए डूबने और डिलिमिटेशन में दक्षिण के राज्यों में सीटें कम नहीं करने समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन सरकार तैयार नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मैंने शेयर बाजार में भारी गिरावट से खुदरा निवेशकों को हुए भारी नुकसान और नियामक तंत्र की प्रभावशीलता पर नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा के लिए सस्पेंशन ऑफ बिजनेस का नोटिस भी दिया है।
सांसद संजय सिंह ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग जैसी संस्था को अपनी घरेलू संस्था बना दिया है। भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके चुनावों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसा मामला महाराष्ट्र में सामने आ चुका है। महाराष्ट्र में लाखों वोट फर्जी बनाए गए। इसी तरह का मामला हरियाणा में भी सामने आया है। हरियाणा में भी लाखों मतदाताओं का हेर-फेर हुआ है। दिल्ली में वोटरों में हेर-फेर का मामला सामने आया। आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से मिलकर इसकी शिकायत भी की कि कैसे भाजपा के लोग वोटरों के वोट कटवा रहे थे और फर्जी वोट जुड़वा रहे थे, लोगों के वोट शिफ्ट करा रहे थे।
संजय सिंह ने कहा कि दिल्ली में एक और घोटाला हुआ है। बवाना से जो आम आदमी पार्टी के विधायक थे और इस बार वो चुनाव हार गए। उन्होंने हमें बताया कि बवाना विधानसभा में भारी संख्या में एक बूथ के वोटर दूसरे बूथ पर शिफ्ट कर दिए गए। चुनाव में हराने का भाजपा का यह भी एक अच्छा तरीका है। मतदाता अपने बूथ पर वोट करने के लिए पहुंचेगा और पता चलेगा कि वहां तो उसका वोट ही नहीं है। पंश्चिम बंगाल में एक ही मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) का मामला आया है। अगर देश के अंदर चुनाव ही निष्पक्ष नहीं होंगे तो आम लोग संसद के अंदर कैसे पहुंचेंगे? भाजपा से जुड़े लोग ही इस चुनावी घोटाले की प्रक्रिया जीत कर संसद और विधानसभा में पहुंच पाएंगे। इसलिए विपक्ष ने सरकार से सदन में इस विषय पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन सरकार भाग गई।
संजय सिंह ने कहा कि सदन में पिछले पांच महीने में भारतीय शेयर मार्केट में निवेशकों के 94 लाख करोड़ रुपए डूब गए। मैंने सदन में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन सरकार भाग गई। इसके बाद हमने मुद्दा उठाया कि डी-लिमिटेशन में दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, उनकी सीटें कम नहीं होनी चाहिए। इस पर भी सरकार कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। आज भारत के एकजुट होने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि हम विविधता में एकता वाले देश हैं। भारत का लोकतंत्र संघीय ढांचे में विश्वास करता है। किसी राज्य का अधिकार छीनना ठीक नहीं है। इन सभी मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सदन का वहिष्कार किया। हमारा यह विरोध आगे भी जारी रहेगा।
वहीं, गिरते शेयर मार्केट को लेकर संसद में चर्चा कराने के लिए राज्यसभा के सभापति को दिए नोटिस में संजय सिंह ने कहा है कि मैं सदन का ध्यान शेयर बाजार में आई हालिया भारी गिरावट की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। पिछले पांच महीनों में शेयर बाजार में अभूतपूर्व गिरावट देखी गई है, जिसने करोड़ों खुदरा निवेशकों को व्यापक आर्थिक क्षति पहुंचाई है। विशेष रूप से, मध्य और निम्न आय वर्ग के निवेशकों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। सितंबर 2024 में, बीएसई बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट हुई, जबकि निफ्टी अपने सर्वाेच्च स्तर से 16 प्रतिशत नीचे आ गया। इसके अतिरिक्त, मिड और स्मॉल कैप इंडेक्स में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जो मुख्य सूचकांकों की तुलना में और भी अधिक चिंताजनक है। यह अत्यंत विचारणीय है कि छोटे शहरों के करोड़ों खुदरा निवेशकों ने मुख्यतः मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में पूंजी निवेश किया था, जिससे उन्हें अपार वित्तीय हानि सहनी पड़ी। इस अवधि में निवेशकों को कुल 94 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।
संजय सिंह ने कहा है कि इस संदर्भ में यह अनिवार्य हो जाता है कि हम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) समेत अन्य संबंधित नियामक निकायों की कार्यप्रणाली एवं प्रभावशीलता की गहन समीक्षा करें। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इन निकायों द्वारा बाजार में होने वाले हेर-फेर, अत्यधिक सट्टेबाजी समेत अन्य अनियमित गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं या नहीं। साथ ही. निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नीतियों का क्रियान्वयन कितना कारगर रहा है, इसका भी आकलन आवश्यक है।
संजय सिंह अंत में सभापति से अनुरोध करते हुए कहा है कि नियम 267 के तहत इस गंभीर मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि सरकार इस संकट के प्रभावों को कम करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा सके।