आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने ‘‘आप’’ विधायकों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किए जाने को लेकर शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने कहा है कि आप सभी विधायकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कर अभिभावक होने का अपना कर्तव्य निभाएं। 25 फरवरी को आपने सदन में ‘‘जय भीम’’ के नारे लगाने पर विपक्ष के 21 विधायकों को 3 दिन के लिए निलंबित कर दिया, लेकिन ‘‘मोदी-मोदी’’ के नारे लगाने पर सत्ता पक्ष के विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, गुरुवार को निलंबित विधायकों को विधानसभा परिसर में जाने से रोक दिया गया। दिल्ली विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। जबकि संविधान हमें लोकतंत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है। अगर जनता के सवाल सदन में उठाने से रोका जाएगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?
आतिशी ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी में कहा है कि यह पत्र मैं अत्यंत पीड़ा और व्यथा के साथ लिख रही हूं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता और समानता होती है। लेकिन बीते दिनों में जो कुछ भी दिल्ली विधानसभा में हुआ, वह केवल विपक्ष के विधायकों के साथ अन्याय ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी कड़ा प्रहार है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि मंगलवार (25 फरवरी 2025) को उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों ने ‘‘मोदी-मोदी’’ के नारे लगाए, जबकि विपक्षी विधायकों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का सम्मान करते हुए ‘‘जय भीम’’ के नारे लगाए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्ता पक्ष के किसी भी विधायक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन विपक्ष के 21 विधायकों को मात्र ‘‘जय भीम’’ का नारा लगाने पर सदन से 3 दिन के लिए निलंबित कर दिया गया।
आतिशी ने कहा है कि यह अन्याय यहीं नहीं रुका, गुरुवार को जब निलंबित विधायक लोकतांतिक तरीके से विधानसभा परिसर में मौजूद गांधी जी की प्रतिमा के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने जा रहे थे, तो उन्हें विधानसभा के गेट से 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया और विधानसभा परिसर में दाखिल होने से ही रोक दिया गया। यह केवल विधायकों का ही नहीं, बल्कि जनता द्वारा दिए गए जनादेश का भी अपमान है।
अध्यक्ष जी, आप भी वर्षों तक विपक्ष के नेता रहे हैं। जब आपको किसी कारण वश सदन से निलंबित किया जाता था, तब भी आपको विधानसभा परिसर में जाने और गांधी प्रतिमा के समक्ष विरोध दर्ज कराने से नहीं रोका जाता था। क्योंकि यह हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन आज, विपक्ष के विधायकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
आतिशी ने कहा है कि हमने देश की संसद में भी यह परंपरा देखी है कि जब किसी सांसद को सदन से निलंबित किया जाता है, तो उन्हें संसद परिसर में जाकर गांधी प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन करने की अनुमति होती है। यह एक संवैधानिक परंपरा रही है, जिसे आज तक किसी ने नहीं तोड़ा। लेकिन दिल्ली विधानसभा में यह पहली बार हुआ है कि चुने गए विधायकों को विधानसभा परिसर में घुसने तक नहीं दिया गया।
अध्यक्ष जी, जिस नियम का हवाला देकर विपक्षी विधायकों को रोका गया, उसमें कहीं भी यह नहीं लिखा है कि निलंबित विधायक विधानसभा गेट के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते या गांधी और अंबेडकर की प्रतिमा तक नहीं जा सकते। ऐसे में यह स्पष्ट है कि यह निर्णय केवल विपक्ष को दबाने और उनकी आवाज़ को कुचलने के लिए लिया गया। हमारा संविधान हमें यह अधिकार देता है कि हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठा सकें। लेकिन अगर विपक्ष की आवाज़ को ही दबा दिया जाएगा, अगर विधायकों को जनता के सवाल सदन के अंदर और बाहर उठाने से रोका जाएगा, तो फिर लोकतंत्र बचेगा कैसे?
आतिशी ने कहा है कि अध्यक्ष जी, आप इस विधानसभा के अभिभावक हैं। अभिभावक का कर्तव्य होता है कि वह सभी विधायकों के साथ समान न्याय करें, चाहे वह पक्ष के हों या विपक्ष के। मैं आपसे आग्रह करती हैं कि आप लोकतांतिक मूल्यों की रक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी विधायक को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर जी ने हमें संविधान देकर लोकतंत्र की जो नींव रखी थी, हमें उसकी रक्षा करनी होगी। यह केवल विपक्ष का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का सवाल है|