देश की राजधानी दिल्ली ने एक बार फिर निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी है। महिला सुरक्षा का राग अलापने वाली भाजपा की चार इंजन की सरकार में दिल्ली की सड़कों पर चलती बस के अंदर एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। हैरत की बात तो यह है कि बस दो घंटे तक सात किलोमीटर के दायरे में दौड़ती रही, लेकिन दिल्ली पुलिस ने कहीं भी बस रोक कर जांच करने की जहमत नहीं उठाई। देश की राजधानी में निर्भया जैसी दोबारा हुई दरिंदगी पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि दिल्ली में एक बार फिर चलती बस में गैंगरेप हुआ। हमने निर्भया से कुछ नहीं सीखा। यह हादसा पूरे समाज के लिए कलंक है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि दिल्ली में निर्भया कांड दोहराया गया है। 30 साल की एक महिला को रात में बस में समय पूछने के बहाने अगवा कर लिया गया और इसके बाद चलती बस में करीब दो घंटे तक कई लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। यह बस दिल्ली के रानी बाग इलाके में 7 किमी तक घूमती रही। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस से और क्या उम्मीद की जा सकती है, जिसके मुखिया एलजी साहब चाहते हैं कि दिल्लीवासी उनकी रील देखें, जिनमें वे छोले- भटूरे और जलेबी खा रहे हैं। एलजी साहब के पास 3 साल की स्कूली बच्ची के साथ हुए बलात्कार के मामले में हमसे मिलने तक का समय नहीं है।
सौरभ भारद्वाज ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि चलती बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने महिला का सामूहिक बलात्कार किया। यह जानकारी दिल्ली पुलिस ने मीडिया को देर से क्यों दी। इसके पीछे क्या कारण था? क्या पुलिस रेप की घटना को दबाना चाहती थी? क्या पुलिस पीड़िता पर दबाव बनाना चाहती थी, मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी या फिर आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद मीडिया को बताना चाहती थी कि ऐसा हुआ था, मगर पुलिस ने उसे पकड़ लिया है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पूरी सरकार रील्स पर चलती है। हमारी आपत्ति रील्स बनाने पर नहीं है, बल्कि उन्हें अपने हिसाब से एडिट और पेश करने पर है। दिल्लीवाले सरकार के ऑडियंस नहीं हैं। लेकिन आज भाजपा ने दिल्ली के नागरिकों और मतदाताओं को महज़ एक ऑडियंस बना दिया है। जो उम्मीद करती है कि जनता उसकी रील्स को पसंद करती रही।
सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि यह किस तरह की कानून व्यवस्था है, जहां रानीबाग जैसे सेंट्रल दिल्ली के इलाके में एक बस दो घंटे तक घूमती रही। इस दौरान बस के अंदर एक लड़की का गैंगरेप किया गया और फिर उसे सड़क पर फेंक दिया गया? उसके बाद, कथित तौर पर दो दिनों तक घटना को छिपाया गया। आम आदमी पार्टी जानना चाहती है कि ऐसा क्यों किया गया? क्यों इस घटना को छिपाया गया और ऐसी घटना दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसका मतलब अब दिल्ली पुलिस भी मीडिया मैनेजमेंट करने लग गई है। जिस राज्य में एलजी, पुलिस व मुख्यमंत्री मीडिया मैनेजमेंट करें और सारी की सारी सरकार रील बनाने में लगी रहे, तो वहां क्या होगा? आपत्ति इस बात पर है कि ये लोग अपने हिसाब से रील बनाकर और एडिट करके उसे जनता को भेज देते हैं। हम उनके दर्शक नहीं हैं। भाजपा ने आज दिल्ली के नागरिकों व वोटर को केवल दर्शक बना दिया है कि वे बस इनकी रील देखकर लाइक करते रहें। जनता इनकी मालिक है और इनकी जवाबदेही जनता के प्रति है। ये लोग तय नहीं करेंगे कि वे किस चीज की रील बनाकर जनता को भेजें। हमारे सवाल हैं और इन्हें हमारे सवालों का जवाब देना पड़ेगा।
सौरभ भारद्वाज ने आगे दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से पूछा कि यह कैसी कानून व्यवस्था है कि शहर में 2 घंटे तक एक बस चलती रही और रानी बाग कोई दूर-दराज का इलाका नहीं है, यह बिल्कुल सेंट्रल दिल्ली है। उसमें बस घूमती रही, एक लड़की के साथ दो घंटे तक गैंगरेप होता रहा और फिर उस लड़की को सड़क पर फेंक दिया गया। इसके बाद भी इस खबर को दो दिन तक छिपाया गया। हम कमिश्नर साहब से जानना चाहते हैं कि इस खबर को क्यों छिपाया गया और आगे ऐसी घटना न हो, इसके लिए वे क्या कर रहे हैं?
उधर, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और ‘‘आप’’ पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने भी चलती बस में हुई घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि दिल्ली में एक और निर्भया कांड! चलती बस में फिर से गैंगरेप। दिल्ली में भाजपा के सारे इंजन ठप हो चुके हैं। स्कूल में बच्चियाँ सुरक्षित नहीं, बसों में में भी सुरक्षित नहीं हैं।
आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने दिल्ली की कानून व्यवस्था पर गहरा दुख और रोष व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में निर्भया जैसा खौफनाक मंजर दोबारा दिखना बेहद दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि रानी बाग में चलती बस में 2 घंटे तक दरिंदगी होती रही, लेकिन भाजपा सरकार की प्राथमिकता जवाबदेही के बजाय सिर्फ रील्स और ब्रांडिंग तक सीमित रह गई है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का डर ही नहीं बचा। दिल्ली की बहन-बेटियां कब तक भाजपा के इस कुशासन के खौफ में जिएंगी?