आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के बुराड़ी और जगतपुरी इलाके में धड़ल्ले से हो रहे अवैध रेत खनन मामले में कार्रवाई को लेकर एलजी और सीएम रेखा गुप्ता की चुप्पी पर सवाल खड़ा किया है। ‘‘आप’’ दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज ने एलजी और सीएम से पूछा कि अवैध रेत खनन के सबूत देने के बाद भी जिम्मेदार अफसरों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। एलजी ने न तो डीसीपी पर कोई कार्रवाई की और न तो सीएम ने ही संबंधित डीएम को सस्पेंड किया। आखिर इनसे क्या मिलीभगत है और खनन माफिया पर अब तक एफआईआर क्यों नही हुई? उन्होंने कहा कि एनजीटी ने अवैध खनन को रोकने के लिए पुलिस और मुख्य सचिव को कई बार आदेश दिए। सरकार ने एनजीटी में बताया कि खनन रोक दिया गया है, जबकि अभी भी खनन जारी है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को एनजीटी कहा कि अवैध खनन रोकने के बजाय दिल्ली के मजिस्ट्रेट केवल आपसी चिट्ठीबाज़ी में व्यस्त हैं। अक्टूबर 2025 में दिल्ली सरकार ने एनजीटी में शपथ पत्र दाखिल कर कहा कि यहां कोई अवैध खनन नहीं हो रहा है, जबकि दिसंबर में खनन होने के सबूत पेश हो गए और अवैध खनन पर दिल्ली कोर्ट ने भी सवाल उठाए। ‘‘आप’’ विधायक संजीव झा ने सीएम, एलजी, केंद्रीय गृहमंत्री समेत जिले के अफसरों और पुलिस को शिकायत की थी, फिर भी अवैध खनन जारी है। यहां तक दिल्ली सरकार के अफसरों ने ट्रकों के आने-जाने के लिए गैर कानूनी रूप से सड़क बनाने तक की अनुमति दे दी।
शुक्रवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 13 जनवरी को आम आदमी पार्टी ने बुराड़ी और जगतपुर इलाके का दौरा किया और सबूतों के साथ वीडियो बनाकर दिखाया कियमुना के तट पर संगठित माफिया अवैध रेत खनन कर रहा है। लेकिन प्रशासन-पुलिस के लिए यह चौंकाने वाली बात नहीं है। यह मामला करीब एक वर्ष से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चल रहा है। इससे पहले हाई कोर्ट ने भी इस विषय में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। दिल्ली चुनाव से दो माह पहले दिसंबर 2024 में एनजीटी ने एडीएम (नॉर्थ) और सीपीसीबी को लिखित निर्देश दिए थे कि अवैध खनन को रोकने के लिए 24 घंटे पेट्रोलिंग की जाए।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को एनजीटी ने कड़ी टिप्पणी कर कहा कि डीएम समेत अन्य अफसर सिर्फ चिट्ठीबाजी कर रहे हैं। अवैध रेत खनन रोकने की इनकी कोई मंसा नहीं है। जुलाई 2025 में एनजीटी ने एक अंतर राज्यीय समन्वय समिति बनाकर अवैध खनन रोकने के लिए आदेश दिए और अनुपालन रिपोर्ट भी मांगा। अक्टूबर 2025 में दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने एनजीटी में एफिडेविट देकर यह दावा किया कि यमुना में कोई खनन नहीं चल रहा है। लेकिन, 19 दिसंबर को एनजीटी में अवैध खनन के सबूत पेश किए गए, जिनमें फोटो, वीडियो और लाइव लोकेशन शामिल थे।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को एनजीटी ने माना कि डीएम जमीनी कार्रवाई करने में विफल हो रहे हैं। वे केवल विभागों के बीच पत्र भेजने में व्यस्त हैं। फील्ड पर जाकर अवैध खनन रोकने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। दिसंबर 2025 में जब एनजीटी के सामने विरोधाभास आया, तो ट्रिब्यूनल ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि दिल्ली सरकार के अधिकारियों के एफिडेविट के बावजूद एनजीटी को हो रहे अवैध खनन के सबूत मिले। इससे पहले 2023 में हाईकोर्ट ने भी डीएम और दिल्ली पुलिस को वहां पुलिस चौकी बनाने के आदेश दिए। अब सवाल उठ रहा है कि जब रात-रात भर सैकड़ों ट्रक रेत यमुना की तलहटी से लाया जाता है, तो पुलिस की नजर से कैसे बच सकता है? यमुना से लेकर मुख्य सड़क तक 6-7 किमी लंबी कच्ची सड़क बनाई गई है।
सौरभ भारद्वाज ने पूरी रात सैकड़ों ट्रक गुजर रहे हैं, तो पुलिस या डीएम को पता न हो, यह संभव ही नहीं है। क्योंकि एनजीटी में प्रशासन हर दो-तीन महीने बाद एफिडेविट देकर कह रहा है कि वहां कोई खनन नहीं हो रहा है। यह भी ज्ञात हो कि दिल्ली में खनन के लिए कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। इसलिए, जितना भी खनन हो रहा है, वह सारा अवैध और गैर-कानूनी है। 19 दिसंबर को एनजीटी में मामला उजागर होने के बावजूद वहां खनन जारी रहा। ‘‘आप’’ वधायक संजीव झा 9 जनवरी 2025 को वहां गए और देखा कि रात के समय मिट्टी खोदी जाती है और उसके बड़े-बड़े टीले बना लिए जाते हैं। फिर अगले दिन उन टीलों से मिट्टी और रेत उठाकर ट्रकों में भरी जाती है।
सौरभ भारद्वाज ने 9 जनवरी का वह वीडियो दिखाते हुए कहा कि इतने बड़े-बड़े मिट्टी के टीले जेसीबी मशीन से खोद के बनाए जाते हैं। यह जगतपुर और बुराड़ी का इलाका है, जहां यमुना का पूरा तट खराब किया जा चुका है। इस खनन को देखते हुए 10 जनवरी को डीसीपी पुलिस, एलजी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पुलिस कमिश्नर को शिकायत की गई। संजीव झा दिल्ली विधानसभा के सदस्य और डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कमेटी (डीडीसी) के चेयरमैन भी हैं। इसलिए उनके द्वारा यह शिकायत भेजी गई थी। 10 जनवरी को ही ईमेल के माध्यम से दूसरी शिकायत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, डीएम, एलजी, डिविजनल कमिश्नर, एडीएम (नॉर्थ), एसएचओ बुराड़ी और एसएचओ वजीराबाद को भी भेजी गई।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि ये शिकायतें 10 जनवरी को तब भेजी गईं, जब प्रशासन ने अक्टूबर में एफिडेविट देकर दावा किया था कि वे 24 घंटे निगरानी रख रहे हैं और कोई खनन नहीं हो रहा है। इसके बाद दिसंबर में एनजीटी के सामने सबूत पेश किए गए, जिस पर एनजीटी ने दिल्ली सरकार और डीएम को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बावजूद खनन जारी रहा। 9 जनवरी के वीडियो के बाद, 13 जनवरी को फिर से वीडियो बनाया गया, जिसमें वहां मशीनें खड़ी दिखाई दे रही थीं।
सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब हाई कोर्ट और एनजीटी का निर्देश है कि डीएम और पुलिस 24 घंटे निगरानी रखेंगे, तो खनन कैसे हो रहा है? यह खनन दिल्ली की सीमा के अंदर 7 किमी भीतर हो रहा है। बाकायदा एसडीएम ने खनन माफिया को सड़क बनाने और उस पर से ट्रक ले जाकर लूट करने की अनुमति दी। यह अनुमति लिखित में दी गई, जबकि यमुना के तट पर पक्की सड़क या किसी भी तरह का निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। इसके बावजूद एसडीएम ने मिट्टी और रेता चोरी करने के लिए सड़क बनाने की अनुमति दे दी। जब एसडीएम से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने यह अनुमति उत्तर प्रदेश वालों को दी है। लेकिन एनजीटी ने पाया कि यह खनन यूपी बॉर्डर से 7 किमी दूर दिल्ली के अंदर चल रहा है और जो उत्तर प्रदेश की अनुमति दिखाई जा रही है, वह भी झूठी और नकली है। इतने बड़े स्तर पर लूट पुलिस के डीसीपी और डीएम की बगैर जानकारी के नहीं हो सकती। यह भी संभव नहीं है कि मुख्यमंत्री और एलजी को न पता हो, क्योंकि संजीव झा ने एलजी, मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर, डीसीपी और डीएम सबको लिखित में बता दिया था। इसके अलावा, दिसंबर में एनजीटी ने भी कोर्ट में बता दिया था कि प्रशासन की निगरानी में खनन चल रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एलजी क्यों चुप और डरे हुए हैं? एलजी बताएं कि उन्होंने डीसीपी पर क्या कार्रवाई की? एलजी की डीसीपी से क्या साठगांठ है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी बताएं कि उनकी डीएम से क्या साठगांठ है? एनजीटी ने कह दिया कि चोरी हो रही है और विधायक ने वीडियो बनाकर अवैध खनन का सबूत दे दिया। फिर भी डीएम पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लोकतंत्र में इतनी बड़ी घटना पर कोई चुप नहीं बैठ सकता। कोर्ट के ऑर्डर, वीडियो सबूत और लिखित शिकायत के बाद भी एलजी और मुख्यमंत्री की चुप्पी उनकी जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभी तक खनन माफिया पर एफआईआर क्यों नहीं हुई? और अगर हुई है, तो किन धाराओं में हुई है? जब हजारों करोड़ रुपये की रेत चोरी हो रही है, तो इसमें पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) क्यों नहीं लगाया गया? यह सब ब्लैक मनी का खेल है और इतने बड़े संगठित स्तर पर चल रहा है, तो अभी तक ईडी क्यों नहीं आई? कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा सरकार सिर्फ ट्रक या डंपर वालों पर एफआईआर दर्ज कर खानापूर्ति कर रही है? इतने बड़े कारनामे में सिर्फ ड्राइवरों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा। दिल्ली सरकार बताए कि किन-किन माफियाओं पर एफआईआर दर्ज हुई है। क्या उन पर मकोका, यूएपीए या पीएमएलए जैसी धाराएं लगाई गई हैं? अगर माइनिंग एक्ट के तहत सिर्फ 1 लाख का चालान काटकर मामला रफा-दफा किया गया, तो यह और भी बड़ी मिलीभगत का सबूत होगा।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि खुद को दिल्ली का लोकल गार्जियन कहकर सड़क पर टहलने वाले एलजी साहब अब कहां हैं? वे सर्दियों में न तो रैन बसेरों में जा रहे हैं, न बहते सीवर देख रहे हैं और न ही टूटी सड़कें। वे छुपकर बैठे हैं और जनता अपने लोकल गार्जियन को ढूंढ रही है। उन्होंने कहा कि एलजी साहब को लंबी-लंबी चिट्ठियां लिखने का शौक है और उनके पास एक बड़ा पीआर डिपार्टमेंट है। वे अपने उसी चिट्ठी लिखने वाले आदमी से एक चिट्ठी इस विषय में भी लिखवाएं कि वे डीएम और डीसीपी पर क्या कार्रवाई कर रहे हैं?