आम आदमी पार्टी ने वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दबाव में आकर सीजफायर करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि ट्रम्प के दबाव में सीजफायर क्यों किए? क्या ट्रम्प ने व्यापार बंद करने की धमकी देकर सीजफायर के लिए मजबूर किया? उन्होंने पूछा कि पहलगाम में हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ने वाले आतंकवादियों को मौत के घाट क्यों नहीं उतारा गया? जब भारत पीओके पर कब्जा व बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग कर सकता था, तो फिर प्रधानमंत्री सीजफायर के लिए क्यों तैयार हुए? मोदी जी ने कहा था कि पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया है, तो फिर तीन घंटे बाद ही उसने सीजफायर का उल्लंघन क्यों किया? संजय सिंह ने मांग की कि प्रधानमंत्री संसद का विशेष सत्र बुलाएं और पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करें।
मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर संजय सिंह ने कहा कि आज 140 करोड़ हिन्दुस्तानियों के मन में सवाल है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के व्यापार बंद करने की धमकी के नाम भारत की संप्रभुता, स्वाभिमान और सम्मान के साथ समझौता कर लिया? पहलगाम में हमारी बहनों के सिंदूर उजाड़े गए, उसमें पाकिस्तान के चार आतंकवादियों का नाम आया। भारत सरकार ने कहा एक को भी नहीं छोड़ेंगे, पाकिस्तान में घुस कर मारेंगे। पूरे देश की जनता भारत सरकार के साथ खड़ी रही। सभी राजनीतिक दलों ने खुल कर कहा कि हम सरकार के साथ हैं। पाकिस्तान में घुसकर मारो, कोई आतंकवादी बचना नहीं चाहिए। पाक अधिकृत कश्मीर आतंकवादियों का अड्डा और यहीं से कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद फैलाया जाता है।
संजय सिंह ने कहा कि पूरे देश ने एक स्वर में कहा कि भारत पाक अधिकृत कश्मीर को वापस हिन्दुस्तान में ले और बलूचिस्तान में असंतोष चल रहा है, उसको पाकिस्तान से अलग करे। 1971 में भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को जिस तरह अगल किया था, उसी तरह बलूचिस्तान को भी अलग करने की देश की भावना थी। ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ। हम सभी भारतीय सेना के पराक्रम, साहस और शौर्य को सिर झुका कर नमन करते हैं। 7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकाने को उजाड़ दिया और 100 से अधिक आतंकवादियों व उनके सहयोगियों को मार गिराया। क्या प्रधानमंत्री मोदी जी ने उन आतंकवादियों के जनाजे में पाकिस्तान के सेना के अधिकारियों के खड़े होने की तश्वीरें नहीं देखी? आतंकवादियों के मरने पर पाकिस्तान मातम मना रहा था। यह देखकर पूरे देश को उस वक्त गर्व हुआ।
संजय सिंह ने कहा कि भारतीय सेना लगातार पाकिस्तान के हमलों का जवाब दे रही थी, उनके एयरबेस और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर रही थी। भारतीय सेना ने बताया कि पाकिस्तान में 21 आतंकवादी ठिकाने हैं। पूरे देश के मन में था कि सारे आतंकवादी ठिकाने ध्वस्त किए जाएंगे। भारत के 21 निर्दोष लोग राजौरी और पुंछ के एरिया में मार दिए गए। हमारे गुरुद्वारे और मंदिर पर हमला हुआ। भारतीय सेना पाकिस्तान को उसी की भाषा में एक-एक हमले का 10 गुना ज्यादा नुकसान करके जवाब दे रही थी। भारतीय सेना ने अपने 5 जवानों की शहादत का मुंहतोड़ जवाब दिया। देश शहीद हवलदार दिनेश शर्मा, पवन कुमार, इम्तियाज अली, शेख अली, सूरज यादव को नमन करता है। जब भारत पाक अधिकृत कश्मीर को वापस ले सकता था, बलूचिस्तान को पाकिस्तान के नक्शे से अलग कर सकता था, भारतीय सेना अपने शौर्य, पराक्रम और बहादुरी का परिचय दे रही थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प की मध्यस्थता को स्वीकार करते हुए सीजफायर का एलान कर दिए।
संजय सिंह ने कहा कि देश को किसी असमंजस में नहीं रहना चाहिए। किसी और ने नहीं, बल्कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीजफायर का एलान किया। देश को समझना चाहिए कि कोई विदेश सचिव सीजफायर का एलान नहीं कर सकता। मोदी जी के भक्तों की समझ छोटी हो सकती है, जो विदेश सचिव और उनके परिवार को गाली दे रहे हैं। सीजफायर का निर्णय मोदी जी का था। सोमवार को अपने संबोधन में मोदी जी ने कहा कि पाकिस्तान ने हमसे कहा कि अब हम सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाएंगे, आतंकवादी घटनाओं को अंजाम नहीं देंगे, तब हमने सीजफायर करने का विचार किया। मोदी जी पाकिस्तान पर विश्वास कर रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ हमारी बहनें हाथ जोड़ रही थीं और गुहार लगा रही थीं कि हमारे पति को मत मारो, हमारे सिंदूर को मत उजाड़ो। लेकिन खूंखार आतंकवादी नहीं माने। लेकिन मोदी जी पाकिस्तानियों के कहने पर मान गए।
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री से पूछा कि पहलगाम में हमारी बहनों के सिंदूर उजाड़ने वाले चारों आतंकवादी कहां हैं? प्रधानमंत्री ने तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार कैसे कर ली? लश्करे तैयबा, लश्करे उमर, जैश-ए-मोहम्मद, हरकत उल मुजाहिद्दीन, सिपाहे सबाहा, हिजबुल मुजाहिद्दीन समेत तमाम आतंकवादी संगठनों का पाकिस्तान सरगना है। पाकिस्तान आतंकवादियों का प्रमुख देश और पनाहगार है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री पाकिस्तान पर भरोसा कर रहे हैं। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति कह रहे हैं कि भारत-पाकिस्तान महान देश हैं, दोनों शक्तिशाली देश हैं, हमने दोनों देशों को व्यापार बंद करने की धमकी दी और सीजफायर करा दिया। देश को शर्म आती है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इसमें से एक भी बात का खंडन नहीं किया। भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत का एक स्वर्णिम इतिहास है। ट्रम्प पाकिस्तान की तुलना भारत के साथ कर रहे हैं, ट्रम्प ने 140 करोड़ आबादी वाले भारत को पाकिस्तान के बराबर लाकर खड़ा कर दिया, भूखा-नंगा पाकिस्तान को को शक्तिशाली देश कह रहे हैं, लेकिन मोदी जी के मुंह से एक शब्द नहीं निकला।
संजय सिंह ने कहा कि ट्रम्प के खिलाफ अमेरिका के लोग भी हो गए हैं और उन्होंने भी सवाल पूछा होगा कि जिस ओसामा बिन लादेन पर अमेरिका ने आक्रमण किया, उसको संरक्षण पाकिस्तान ने ही दिया था। पाकिस्तान आतंकवादियों का संरक्षक देख है, ट्रम्प उसको महान देश कैसे कह रहे हैं? अमेरिका के लोगों को भी बुरा लगा होगा, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को बुरा नहीं लगा। इसलिए एक शब्द नहीं बोल रहे हैं। 10 मई को अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने ट्वीट कर कहा कि 48 घंटे से सीजफायर को लेकर बात चल रही थी। क्या प्रधानमंत्री जेडी बैंस और मार्को रुबियो के साथ 48 घंटे से बातचीत कर रहे थे? मार्को रुबियो का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाहबाज सरीफ से भी बात की। प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि जब हमारी सेना पाकिस्तानियों को मुंहतोड़ जवाब दे रही थी, तब वह अमेरिका के साथ समझौते और बातचीत में जुटे थे।
संजय सिंह ने ट्रम्प कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत करने और समाधान निकाले की बात कह रहे हैं, जो बहुत खतरनाक बात है और इसका जवाब प्रधानमंत्री को देना ही चाहिए। इसमें कश्मीर कहां से आ गया? 1965-66 में लाल बहादुर शास्त्री, 1972, 1975 व 1983 में इंदिरा गांधी, 1978 में मोरारजी देसाई, 1987, 1989 में राजीव गांधी, 1990 में वीपी सिंह, 1991 में चंद्रशेखर, 1994 में पीबी नरसिंम्हा राव, 1996 में एचडी देवगौड़ा, 1997 में आईके गुजराल, 1999, 2001, 2003 में अलट बिहारी वाजपेयी, 2009, 2010 में मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की और भारत के सभी प्रधानमंत्रियों ने अमेरिका की मध्यस्थता को एक सिरे से खारिज कर दिया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका को चौधरी बना दिया और वह आकर चौधराहट कर रहा है। अमेरिका खुलेआम कह रहा है कि वह भारत-पाक मामले में मध्यस्थता कर रहा है।
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री से कई सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जब भारत की सेना पाक अधिकृत कश्मीर पर कब्जा कर सकती थी, पाकिस्तान के 21 आतंकी ठिकानें को तबाह कर सकती थी, आतंकवादियों का पूरी तरह से सफाया कर सकती थी, बलूचिस्तान को पाकिस्तान के नक्शे से अलग कर सकती थी, ऐसे समय में प्रधानमंत्री ने ट्रम्प के कहने पर सीजफायर की घोषणा क्यों की? ऑपरेशन सिंदूर की शुरूआत हमारी बहनों के उजाड़े गए माथे के सिंदूर का बदला लेने के लिए हुई थी। देश पूछ रहा है कि हमारी बहनों के सिंदूर उजाड़ने वाले चारों पाकिस्तानी आतंकवादी कहां हैंं और उनको मौत के घाट कब उतारा जाएगा? प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने बताया कि दोनों देशों को व्यापार बंद करने की धमकी देकर सीजफायर करा दिया। पूरा देश जानता है कि पाकिस्तान खाने के लिए मोहताज है, तो उसके साथ अमेरिका कौन सा व्यापार करेगा? अमेरिका का तो भारत के साथ लाखों करोड़ रुपए का व्यापार है। देश पूछ रहा है कि क्या ट्रम्प ने व्यापार बंद करने की धमकी देकर प्रधानमंत्री को सीजफायर के लिए मजबूर किया?
संजय सिंह ने चौथा सवाल पूछा कि ट्रम्प पाकिस्तान को महान और शक्तिशाली देश कह रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री को इसका खंडन नहीं करना चाहिए। देश मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री ट्रम्प की बातों का खंड करें और खुलेआम कहें कि पाकिस्तान आतंकवादी देश है। प्रधानमंत्री संसद का विशेष सत्र बुलाएं, पूरा विपक्ष सरकार के साथ मिलकर पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने का प्रस्ताव पास करेगा। पांचवां सवाल है कि प्रधानमंत्री ने कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने भविष्य में आतंकवादी घटनाएं और सैन्य दुस्साहस नहीं करने का भरोसा दिया। ऐसे में प्रधानमंत्री देश को बताएं कि सीजफायर की घोषणा के तीन घंटे बाद पाकिस्तान ने उसका उल्लंघन कर सैन्य दुस्साहस कैसे दिखाया? सीजफायर के बाद पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री के गृहराज्य गुजरात के कच्छ में हमला किया और वहां के गृहमंत्री को आपात बैठक करनी पड़ी। जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि सीजफायर का उल्लंघन हुआ है। सोमवार को पीएम मोदी ने जैसे ही अपना संबोधन खत्म किया, उसके तुरंत बाद पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया। अमृतसर में इंडिगो की फ्लाइट उतरनी थी, वह नहीं उतर पाई। वहां ब्लैक आउट हो गया। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि सीजफायर का उल्लंघन करने का पाकिस्तान का सैन्य दुस्साहस कैसे जागा?