आम आदमी पार्टी ने जनता को जुमले देने वाली भाजपा की ‘विपदा’ सरकार द्वारा लाए गए दिल्ली के एक लाख करोड़ रुपए के हवा-हवाई बजट को एक्सपोज कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष आतिशी का कहना है कि हकीकत में आगामी वित्तीय वर्ष में दिल्ली सरकार को सिर्फ 78 हजार करोड़ रुपए की ही आमदनी होने वाली है। एक लाख करोड़ का बजट सिर्फ जुमला है। सरकार के 68700 करोड़ रुपए के टैक्स रेवेन्यू के आंकड़े भी निराधार हैं। दिल्ली की अर्थव्यवस्था के हिसाब से सरकार को सिर्फ 63 हजार करोड़ ही टैक्स राजस्व मिलेगा। मोदी जी ने जैसे दिल्लीवालों से जुमले किए, वैसे ही रेखा गुप्ता सरकार के साथ भी कर दिए। उन्होंने दिल्ली को हजारों करोड़ रुपए देने का वादा तो किए, लेकिन बजट में एक रुपए भी नहीं दिए। केजरीवाल सरकार के नेतृत्व में दिल्ली देश की इकलौती सरकार थी, जो मुनाफे में थी, लेकिन भाजपा ने आते ही लूट-खसोट शुरू करके इसे 13 हजार करोड़ के घाटे में डाल दिया है।
दिल्ली के इतिहास में पहली बार बजट के आंकड़ों पर इतना झूठ बोला जा रहा है- आतिशी
आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में प्रेसवार्ता कर कहा कि 25 मार्च को भाजपा की सरकार ने विधानसभा के सदन पटल पर वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया। सीएम और वित्त मंत्री रेखा गुप्ता ने बार-बार कहा कि दिल्लीवालों को पहली बार एक लाख करोड़ रुपए का बजट मिला है। दिल्ली के इतिहास में पहली बार किसी बजट के आंकड़ों पर दिल्लीवालों से इतना झूठ बोला गया है। भाजपा अपने जुमलों के लिए जानी जाती है। लेकिन आजतक भाजपा के जुमले अपने वादों पर होते थे। मसलन, 15 लाख रुपए हर व्यकित के खाते में देंगे, स्वीस बैंक से कालाधन लेकर आएंगे। लेकिन अब बजट में पैसा कहां से आएगा, उस पर भी भाजपा ने झूठ बोलना और जुमलेबाजी शुरू कर दी है।
एक लाख करोड़ रुपए का बजट मात्र जुमला, सरकार की इतनी न आय है और ना हो सकती है- आतिशी
आतिशी ने कहा कि दिल्ली का एक लाख करोड़ रुपए का बजट पूरी तरह हवा-हवाई और निराधार जुमला है। भाजपा की दिल्ली सरकार के पास एक लाख करोड़ रुपए की आय ना है और ना हो सकती है। सीएम द्वारा पेश में बजट में बताया गया है कि कहां-कहां से दिल्ली सरकार को पैसे मिलेंगे। सरकार का कहना है कि उसके पास 68700 करोड़ रुपए टैक्स रेवेन्यू आएंगे, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 10 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। जब बजट से एक दिन पहले दिल्ली का आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं हुआ तो हम सबके मन में सवाल उठ रहे थे। आर्थिक सर्वेक्षण एक टेक्निकल दस्तावेज होता है। इसमें ऐसा क्या था, जिसके लिए भाजपा ने 70 साल पुरानी संसदीय परंपरा को तोड़ा दिया और आर्थिक सर्वेक्षण सदन में नहीं पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण तो 1951 से बजट का हिस्सा है। 1964 से आर्थिक सर्वेक्षण बजट से अलग एक दिन पहले सदन में पेश होता है।
देश की 6.50 फीसद जीडीपी विकास दर पर दिल्ली के टैक्स रेवेन्यू में 20 फीसद की वृद्धि का चमत्कार सिर्फ भाजपा ही कर सकती है- आतिशी
आतिशी ने कहा कि दिल्ली बजट में 68700 करोड़ टैक्स रेवेन्यू मिलने का आंकड़ा सामने आने के बाद स्थिति साफ हो गई कि भाजपा की दिल्ली सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण क्यों नहीं पेश किया? आर्थिक सर्वेक्षण दिल्ली की आर्थिक स्थिति बताता है। आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि रियल स्टेट, सर्विस सेक्टर, स्मॉल ट्रेडिंग, रिटेल, होलसेल ट्रेडिंग कितना बढ़ रहा है। अगर आर्थिक सर्वेक्षण सामने आ जाता तो भाजपा की सरकार 68700 करोड़ रुपए का हवा-हवाई टैक्स रेवेन्यू आने का आंकड़ा बजट में नहीं रख पाती। क्योंकि टैक्स रेवेन्यू पिछले साल से 20 फीसद की वृद्धि दिखा रहा है। भाजपा की केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में पूरे देश का जीडीपी विकास दर 6.5 फीसद अनुमानित है। देश की 6.50 फीसद जीडीपी विकास दर पर दिल्ली के टैक्स रेवेन्यू में 20 फीसद की वृद्धि होना अद्भुत और चमत्कारिक अर्थशास्त्र है। जो सिर्फ भाजपा पार्टी ही कर सकती है।
दिल्ली बजट में टैक्स रेवेन्यू का अनुमानित आंकड़ा पूरी तरह फर्जी है- आतिशी
आतिशी ने कहा कि भाजपा की सरकार द्वारा बजट में रखा गया टैक्स रेवेन्यू का अनुमानित आंकड़ा पूरी तरह फर्जी और निराधार है। इसीलिए से बजट से एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण सदन पटल पर नहीं रखा गया। देश और दिल्ली के उपलब्ध अर्थव्यवस्था के आंकड़ों के आधार पर हिसाब लगाएंगे, तो आगामी वित्त वर्ष में दिल्ली का टैक्स रेवेन्यू सिर्फ 63 हजार करोड़ रुपए के करीब होगा। इसका मतलब है कि भाजपा के अनुमानित 68700 करोड़ रुपए से 5 हजार करोड़ रुपए कम टैक्स रेवेन्यू सरकार को मिलेगा। इस तरह एक लाख करोड़ का बजट घटकर 95 हजार करोड़ रुपए का रह जाता है।