दिल्ली चुनाव के दौरान भाजपा ने दिल्लीवालों से वादा किया था कि ‘‘आप’’ सरकार की कोई भी जनहित की योजना बंद नहीं करेगी, लेकिन हकीकत इसके उलट है। भाजपा की सरकार ने केजरीवाल सरकार द्वारा शुरू की गई दिल्ली आरोग्य कोष योजना को चुपचाप बंद कर दिया है। सरकार ने बजट में इस योजना के लिए फंड नहीं दिया है। लिहाजा अब दिल्ली के लोग सरकार के खर्चे पर निजी अस्पतालों व लैब में अपना ऑपरेशन या जांच नहीं करा सकेंगे। यह बड़ा खुलासा करते हुए ‘‘आप’’ के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के एम्स समेत कई सरकारी अस्पतालों में सर्जरी व जांच के लिए महीनों इंतजार करना होता है, इससे बचने के लिए ‘‘आप’’ सरकार ने यह योजना शुरू की थी और पहले ही साल 47 हजार से अधिक लोगों ने लाभ उठाया। लेकिन बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए ही भाजपा ने यह योजना खत्म कर दी है।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर कहा कि दो दिन पहले भाजपा की दिल्ली सरकार द्वारा पेश बजट की डिटेल अब सामने आने लगी है। बजट की कुछ डिटेल्स ऐसी सामने आई हैं कि उनकी वजह से दिल्ली के अंदर हाहाकार मचने वाला है। दिल्ली विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा ने सीएजी की रिपोर्ट को खूब प्रचारित-प्रसारित किया था। सीएजी की रिपोर्ट में दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग को लेकर कुछ खास बातें थीं। सीएजी रिपोर्ट में दिल्ली में कई अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर्स को नॉन-फंक्शनल होने का आरोप लगा है और कहा गया कि इन अस्पतालों में जितनी सर्जरी होनी चाहिए, उतनी सर्जरी नहीं हुए। सीएजी रिपोर्ट में इसका कारण भी बताया गया है कि इन अस्पतालों में आवश्यक डॉक्टर और विशेषज्ञों की भर्ती नहीं की गई है। दिल्ली सरकार के अस्पतालों में डॉक्टर और विशेषज्ञ की भर्ती का काम केंद्र सरकार और एलजी का है। लिहाजा जानबूझ कर इन अस्पतालों में डॉक्टर और विशेषज्ञ की भर्ती नहीं की गई। जिसकी वजह से कम सर्जरी हुए।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार का एम्स या सफदरजंग अस्पताल हो या फिर उत्तर प्रदेश का सरकारी अस्पताल हो, बार-बार खबरें छपती हैं कि मरीजों को एमआरआई या सीटी स्कैन के लिए कई महीने का इंतजार है। एम्स के अंदर अगर इलेक्टिव सर्जरी करानी है तो औसत छह से आठ महीेने तक इंतजार करना पड़ता है। नवंबर 2024 में एक खबर छपी कि एम्स में ऑर्थोपैडिक सर्जरी के लिए वेटिंग टाइम छह महीने बढ़कर 12 महीने हो हो गया है। यानी एक साल इंतजार करने के बाद आप अपने हड्डी का कोई ऑपरेशन करा सकेंगे।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही दिल्ली सरकार के किसी भी विभाग के अंदर भर्तियां हों, वह केंद्र सरकार के अधीन थी। इसी स्थिति को देखते हुए 2017 में अरविंद केजरीवाल की सरकार ने फैसला किया कि यदि कोई मरीज दिल्ली सरकार के अस्पताल में आता है और एक महीने के अंदर उसकी सर्जरी नहीं हो पाती है तो हम प्राइवेट अस्पताल में उसकी सर्जरी करा देंगे और उसका सारा खर्च दिल्ली सरकार देगी। ‘‘आप’’ सरकार ने तय किया कि अगर किसी मरीज का सीटी स्कैन या एमआरआई दिल्ली सरकार के अस्पताल में नहीं हो पा रहा है तो उसे प्राइवेट लैब में रेफर कर दिया जाएगा और उसका पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। जब अरविंद केजरीवाल की सरकार ने यह स्कीम लागू की तो एक साल के अंदर करीब 47 हजार मरीजों को इसका फायदा हुआ। इन मरीजों ने प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सर्जरी कराई, प्राइवेट लैब में टेस्ट कराए।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि भाजपा की दिल्ली सरकार द्वारा पेश बजट में इस योजना को खत्म कर दिया गया है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था किए इस योजना को खत्म करना लगभग मरीजों की हत्या करने के बराबर है। क्योंकि भाजपा की सरकार अभी तक तक अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों की भर्ती नहीं की, ऑपरेशन थिएटर्स को भी ऑपरेशनल नहीं किया है, खराब एमआरआई व सिटी स्कैन मशीनों को भी ठीक नहीं कराया है और ना तो रेडियोलॉजिस्ट की ही भर्ती की। भाजपा की सरकार ने कुछ भी नहीं किया। इसके बावजूद उसने दिल्ली आरोग्य कोष (डॉक्स) नाम की स्कीम को खत्म कर दिया और हजारों मरीजों को मौत के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया।
सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पूछा कि सरकार बनने के बाद उसने दिल्ली में कितने रेडियोलॉजिस्ट, सर्जन, विशेषज्ञ भर्ती हुए, कितने ऑपरेशन थिएटर ऑपरेशनल कर दिए। अगर भाजपा की सरकार ने कुछ भी नहीं किया है तो फिर कैसे दिल्ली आरोग्य कोष स्कीम को बंद कर दी। इस योजना को बंद करने से पहले भाजपा की सरकार ने किसी को नहीं बताया और चुपचाप डॉक्स स्कीम पर खर्च होने वाले पैसे को बंद कर दिया। यह बहुत बड़ी बात है और इससे दिल्ली के अंदर गरीब लोगों को काफी नुकसान होगा।