आम आदमी पार्टी ने रविवार को पार्टी मुख्यालय पर बड़ी धूमधाम के साथ शहीदी दिवस मनाया। शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के बलिदान दिवस के मौके पर पार्टी मुख्यालय पर ‘एक शाम, शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल रहे। इस अवसर पर, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज, नेता प्रतिपक्ष आतिशी व गोपाल राय समेत अन्य वरिष्ठ नेता, सभी पदाधिकारी, विधायक, प्रत्याशी, पार्षद समेत बड़ी तादात में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरूआत भक्ति संगीत कार्यक्रम के साथ हुआ और अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं ने शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखेदव की तश्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज भी हर भारतीय युवा के दिल में भगत सिंह बसते हैं। हमने उन्हें अपना आदर्श माना है, उनकी विचारधारा पर चलते हुए देश की सेवा करते रहेंगे।
भगत सिंह देश में सबको बराबरी के अधिकार, गरीबों को उनका हक, सबको अच्छी शिक्षा-स्वास्थ्य दिलाने के पक्षधर थे- केजरीवाल
‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 23 मार्च को शहादत दिवस मनाया जाता है। आज ही के दिन हमारे स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दी थी और उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया और भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी शहादत से प्रेरित किया था। उनकी शहादत के लगभग 100 साल हो गए। 100 साल बाद भी आज के एक-एक नौजवान के दिल के अंदर भगत सिंह बसते हैं। हमने भगत सिंह और बाबा साहब अंबेडकर को अपना आदर्श माना है। भगत सिंह ने कहा था कि मेरा मकसद केवल अंग्रेजों को देश से बाहर निकलना नहीं है, मेरा मकसद एक नया समाज गठित करना है जहां सबको बराबरी का अधिकार हो, गरीबों को उनका हक मिले, कोई गरीब ना रहे, सबको अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं मिले, जाति-धर्म का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
भगत सिंह के सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार एक भी काम नहीं कर रही है- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शहीद भगत सिंह ने कहा था कि अगर हमने ऐसे समाज का निर्माण नहीं किया तो यह गोरे अंग्रेज चले जाएंगे और काले अंग्रेज आकर बैठ जाएंगे। उनको पता था कि यह होने वाला है। उन्होंने 100 साल पहले ही यह बोल दिया था और आज हमारे देश के अंदर वही हो रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों के मन में जो सपने थे और जिन सपनों के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे दी, इतने अत्याचार बर्दाश्त किए, आज उनका एक भी सपना पूरा नहीं हो रहा है। बल्कि उलटी दिशा में गंगा बहानी चालू हो गई है। अरविंद केजरीवाल ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि भगत सिंह जी ने जेल से अपने पिताजी और साथियों समेत कई लोगों को चिट्ठियां लिखी थी। वह चिट्ठियां जेल से जब बाहर जाती थी, तो बाकायदा अंग्रेज अधिकारी उसको पढ़कर बाहर भेजते थे। उन चिट्ठियों मे ंअंग्रेजों के खिलाफ काफी कुछ लिखा होता था। फिर भी अंग्रेज उन चिट्ठियों को उनके पिताजी, साथियों और रिश्तेदारों के पास भेजते थे।
मैंने एलजी साहब को चिट्ठी लिखी, लेकिन उन तक नहीं पहुंचाई गई, क्या इसीलिए आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब मैं जेल गया और मैंने एलजी साहब को दो लाइन की एक चिट्ठी लिखी। जब मैं जेल में था, मैं मुख्यमंत्री था। मैंने इस्तीफा नहीं दिया था। 15 अगस्त के मौके पर मुख्यमंत्री झंडा फहराता है। जेल में मुझे चिंता हुई कि 15 अगस्त को इस बार कौन झंडा फहराएगा? मैंने एलजी साहब को चिट्ठी लिखी कि चूंकि मैं जेल में हूं, मैं झंडा नहीं फहरा पाउंगा। इसलिए इस बार 15 अगस्त को हमारी मंत्री आतिशी को झंडा फहराने की इजाजत दी जाए। इसमें तो कोई आतंकवाद नहीं है, मैं किसी को भड़का नहीं रहा हूं। इसमें कोई गलत बात नहीं है। यह एक साधारण सी चिट्ठी थी। मैंने चिट्ठी को जेल के सुपरिटेंडेंट को दी और उनसे कहा कि इसको देख लो, चिट्ठी को पढ़ लो और एलजी साहब तक पहुंचा दो, लेकिन वह चिट्ठी एलजी साहब को नहीं पहुंचाई गई। इसके अगले दिन मुझे एक कारण बताओ नोटिस मिला कि आपको ऐसी चिट्ठी लिखने की हिम्मत कैसे हो गई? क्यों न आपकी जेल में मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी जाए। मैं सोच रहा था क्या इसलिए आजादी की लड़ाई लड़ी थी। मैंने भगत सिंह की चिट्ठियों की किताब जेल में पढ़ी थी।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अंग्रेजों ने भगत सिंह को सारी चिट्ठियां लिखने की आजादी दी थी। मैने दो लाइन की चिट्ठी एलजी साहब को लिखी, वह भी एक तरह से औपचारिकता वाली चिट्ठी थी। उस चिट्ठी की एवज में मुझे कारण बाताओ नोटिस जारी कर दिया। तुम तो अंग्रेजों से भी