नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सदन से निलंबित आम आदमी पार्टी के विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से रोके जाने को पूरी तरह से गैर कानूनी बताया। उन्होंने सदन में रूल बुक के प्रावधानों को रखते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायकों को पूरी तरह अवैध तरीके से विधानसभा परिसर में प्रवेश से रोका गया। रूल बुक के अनुसार, निलंबित सदस्यों को विधानसभा परिसर, गांधी मूर्ति और नेता प्रतिपक्ष ऑफिस में जाने पर रोक नहीं है। हमें रूल बुक के अनुसार विधानसभा परिसर में प्रवेश से नहीं रोका गया और ना ही कोई आदेश पास किया गया। वहीं, सोमवार को सदन से निष्कासित किए जाने पर विधायक कुलदीप कुमार ने विधानसभा परिसर से बाहर निकाले जाने का सख्त विरोध किया।
वहीं, आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय ने एक्स पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश की संसद की तरह अब दिल्ली विधानसभा का संचालन संविधान व नियम से करने की जगह तानाशाही से करना चाहती है। भाजपा के एक विधायक 40 मिनट बोलते हैं और आम आदमी पार्टी के विधायक की आवाज 4 मिनट में रोक दी जाती है। चुने हुए विधायकों की विधानसभा में एंट्री बैन क्यों की गई?
सदन में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने आगे कहा कि विधानसभा के सदन से किसी सदस्य के निलंबन का तात्पर्य विधानसभा सभा कक्ष, दीर्घाएं, विधानसभा सचिवालय के नियंत्रण के कमरे, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कक्ष, समिति कक्ष, विधानसभा पुस्तकालय, विधानसभा वाचनालय, पार्टियों के कमरे, विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के अधिनस्त सभी स्थान है। इस रूल बुक में विधानसभा की लॉन शामिल नहीं है। गांधी मूर्ति का एरिया शामिल नहीं है। इस रूल बुक में नेता प्रतिपक्ष का ऑफिस शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायकों ने डॉ. अंबेडकर की मूर्ति के पास प्रदर्शन किया और वह रूल बुक के अनुसार सदन के परिसर की परिभाषा में नहीं आता है। आपने हमें गैर कानूनी और गैर संवैधानिक तरीके से गेट के अंदर से आने से रोका। हमें रूल बुक के अनुसार गेट के अंदर प्रवेश से नहीं रोका गया और ना तो इसके लिए कोई आदेश ही पास किया गया।
सदन से एक दिन के लिए निलंबित किए जाने के बाद कुलदीप कुमार ने कहा कि मुझे सदन से बाहर किया गया और मैं बाहर आ गया। अब ये कह रहे हैं कि परिसर से बाहर जाइए। कल को ये कहेंगे कि आप अपने घर से बाहर जाइए और फिर कहेंगे कि देश छोड़कर जाइए। यह पहली बार हो रहा है कि सदन से बाहर होने का मतलब परिसर से बाहर होना है। हमने पहले कभी नहीं सुना था। भाजपा भी 10 साल विपक्ष में रही थी। पहली बार सुनने को मिल रहा है कि विधानसभा के सदन से हटने का मतलब है कि आपको परिसर से भी बाहर जाना पड़ेगा। यह तो अच्छा हुआ कि उन्होंने दिल्ली से बाहर जाने के लिए नहीं बोला। मैं तो सीएजी की रिपोर्ट पर बात कर रहा था। लेकिन ये लोग हमें बोलने नहीं देना चाहते हैं।
कुलदीप कुमार ने कहा कि सत्ता पक्ष चाहता है कि हम उनकी वाहवाही करें। उनकी वाहवाही के लिए भाजपा वाले बैठे हैं। हमारा काम है कि इनके झूठ का खुलासा करना है। ये लोग न सीएजी पर चर्चा करना चाहते हैं और ना ही इनको दिल्ली की जनता की चिंता है। ये लोग महिलाओं को 2500 रुपए देने और बाबा साहब की फोटो हटाने पर बात ही नहीं करना चाहते हैं। ये लोग दिल्ली के अंदर तानाशाह से सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन दिल्ली की जनता इनको माफ नहीं करेगी। इनके लोग सदन मे ं20 मिनट बोलेंगी और हमें पांच मिनट भी नहीं बोलने देंगे। ये तानाशाही फरमान से सदन चलाना चाहते हैं। ये केवल दिल्ली की जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं।