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· CM, Dy CM discuss retirement of corrupt babus with hon’ble LG
· CM also discusses the issue with the Chief Secretary
· CM directs cabinet members to prepare a list of such officers
· Officers found to be corrupt to be retired under 56 J

Chief Minister Sh. Arvind Kejriwal and Deputy Chief Minister Sh. Manish Sisodia called on the hon’ble Delhi Lieutenant Governor on Saturday to discuss the issue of compulsory retirement of corrupt officials of the Delhi Government.

The Chief Minister has also discussed this issue with the Chief Secretary of Delhi in detail.

After the discussions, the Chief Minister has directed all the cabinet members to prepare a list of such officers in their respective departments so that they can be made to retire compulsorily.

This will be in line with the Central government’s initiative of retiring such officers under Fundamental Rule 56(J) of Central Civil Services (Pension) Rules, 1972.

Chief Minister Sh. Arvind Kejriwal and the Delhi Government has a zero tolerance policy against corrupt officials and corruption.

Mr Kejriwal had shown his intent during his first stint as the Chief Minister when he ordered a major crackdown against corrupt officials during his 49-day tenure in 2013-14. Huge number of officials faced the wrath for being corrupt during that tenure.

During his current second tenure also, the present government has been totally non-tolerant of corruption and corrupt officials. It is of the firm belief that such officials ruin the various welfare schemes for the people of Delhi and fill their own coffers.

During last four and a half years, the elected Delhi government has come across officials who opposed public welfare policies for extraneous considerations and harmed the interests of Delhi. The government is aware of some cases is which officers refused to implement welfare policies for completely untenable reasons, which require a through probe into their acts of omission and commission.

However, due to lack of agencies like ACB, the Delhi government has been only able to raise the issue of corruption with the hon’ble LG, since it cannot take any direct action.

It was because of the ACB during the first tenure that the government led by CM Sh. Arvind Kejriwal cracked down on corrupt officials in big way.

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मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री ने उप-राज्यपाल के साथ
भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति पर चर्चा की

  • मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य सचिव के साथ भी इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की है
  • मुख्यमंत्री ने कैबिनेट को ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिये हैं
  • भ्रष्ट पाए गए अधिकारियों/कर्मचारियों को 56 (जे) के तहत जबरन सेवानिवृत्ति दी जाएगी

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं उप- मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार के भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति देने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली के उप-राज्यपाल के साथ शनिवार को बैठक की।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ भी इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है।

चर्चा के बाद, मुख्यमंत्री ने सभी कैबिनेट सदस्यों को अपने-अपने विभागों में ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक सूची तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि उन्हें जबरन सेवानिवृत्त किया जा सके।

यह सेंट्रल सिविल सर्विसेस (पेंशन) रूल्स, 1972 के फंडामेंटल रूल 56 (जे) के तहत ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवानिवृत्त करने की केंद्र सरकार के पहल के तर्ज पर होगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं दिल्ली सरकार हमेशा से ही भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोरता बरतने नीति पर काम करती रही है।

अरविंद केजरीवाल ने बतौर मुख्यमंत्री अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना इरादा दिखा दिया था, जब उन्होंने 2013-14 में अपने 49 दिनों की सरकार के दौरान भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई का आदेश दिया था। उस कार्यकाल के दौरान भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों में ऐसा खौफ पैदा हो गया था कि भ्रष्टाचार करना तो दूर, भ्रष्टाचार के नाम से भी अधिकारी कांपने लगे थे।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वर्तमान कार्यकाल में भी, दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति पूरी तरह से कठोर रही है। सरकार का ऐसा मानना है कि ऐसे अधिकारी दिल्ली के लोगों के लिए बनाई जाने वाली विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को बर्बाद करते हैं और जनता के हक के पैसों से अपना घर भरते हैं।

पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान, दिल्ली सरकार के संज्ञान में ऐसे कई अधिकारी आए, जिन्होंने जनता के हित की लोक कल्याणकारी नीतियों का विरोध किया और दिल्ली के लोगों के हितों को नुकसान पहुंचाया। सरकार के संज्ञान में ऐसे कुछ मामले मौजूद हैं जिसमें कुछ अधिकारियों ने बेवजह कल्याणकारी नीतियों को लागू करने से इनकार कर दिया।

दिल्ली सरकार के पास अब एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) जैसी एजेंसियां भी नहीं हैं, इसलिए दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को केवल उप-राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है, ऐसे मामलों में खुद कार्रवाई नहीं कर सकती।

अरविंद केजरीवाल की 49 दिन वाली सरकार के वक्त एसीबी दिल्ली सरकार के पास थी,तब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बड़े पैमाने पर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसा था।

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firoz

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