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  •  बजट में किसानों, महिलाओं, शिक्षित बेरोजगारों के लिए न तो फौरी राहत, न ठोस योजनाओं का खाका
  •  एकमात्र अच्छी बात यही है कि यह भाजपा सरकार का आखिरी बजट है

आम तौर पर एक विपक्षी दल से संबंध रखने के कारण मुझसे यही उम्मीद की जाएगी कि मैं शिवराज सरकार के आखिरी बजट को खराब बताऊंगा, लेकिन आज मैं सुबह से राज्य के वित्त मंत्री जी के भाषण का इंतजार कर रहा था और चाहता था कि बजट भाषण के बाद उन्हें बधाई दूं। मुझे उम्मीद थी कि चुनाव के पहले संभवत: सरकार चाहेगी कि वह जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और आम परिवार का जीवन स्तर ऊंचा करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। लेकिन बजट के सभी बिंदुओं को देखने के बाद लगता है कि अपने आखिरी वक्त में भी शिवराज सरकार को जनता की सुध नहीं है। जाहिर है कि बीते 14 साल में यह सरकार जनता से इतना कट चुकी है कि उसे ख्याल ही नहीं है कि आखिरी जनता की जरूरतें क्या है। बस इस बजट की एकमात्र अच्छी बात यही है कि यह भ्रष्ट शिवराज सरकार का आखिरी बजट है। यह बयान आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक और राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक अग्रवाल ने मध्य प्रदेश के वर्तमान बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिया।

उन्होंने कहा कि बजट में किसान, महिला, शिक्षित बेरोजगारों के लिए न तो कोई फौरी राहत उपलब्ध कराई गई है, और न ही कोई दीर्घकालिक उपाय की घोषणा की गई है।

सरकार की प्राथमिकता में नहीं हैं किसान

उन्होंने बिंदूवार बजट का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्रदेश की 73 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, जो मुख्यत: कृषि पर निर्भर है। इस बड़ी आबादी के लिए सरकार ने कृषि क्षेत्र में 37 हजार 498 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो कि कुल बजट का महज 18.32 प्रतिशत है। 73 प्रतिशत जनता के लिए 18.32 प्रतिशत राशि का आवंटन शिवराज सरकार की प्राथमिकताओं की ओर इशारा करता है। प्रदेश की इस सरकार को ग्रामीण क्षेत्र की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक कर्ज चुकाने के लिए किसानों को समझौता योजना के तहत 350 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जबकि कुल कर्ज 88 हजार करोड़ रुपए है। ऐसे में यह योजना ही अपने आप में किसानों के साथ मजाक है।

बिजली के दाम करने चाहिए थे आधे

उन्होंने कहा कि इसी तरह उम्मीद थी कि बजट में बिजली के दामों को कम से कम आधा करने के लिए तत्काल कोई व्यवस्था की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए जो 18 हजार करोड़ का आवंटन किया गया है वह भी बड़ी परियोजनाओं में ही लगाया जाएगा, जबकि प्रदेश के पास पहले से ही अतिरिक्त बिजली है, जो सस्ते दामों पर दूसरे राज्यों को बेची जा रही है।

शिक्षा पर महज 10 प्रतिशत खर्च

उन्होंने कहा कि शिक्षा पर सरकार ने 21 हजार 724 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है, जो कुल बजट का 10.61 प्रतिशत है। वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार अपने बजट का 24 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती है। प्रदेश में शिक्षा की हालत किसी से छुपी नहीं है। मेडिकल शिक्षा की बात करें तो एक बार फिर वित्त मंत्री ने 6 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही है, जबकि पिछले बजट में भी 6 मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही गई थी।

बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की रणनीति नहीं

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में नाकाम रही है। वहीं बजट में 7.5 लाख व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण करने की घोषणा की जा रही है, जबकि सरकार खुद जानती है कि प्रदेश के 40 लाख परिवार एक किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं। ऐसे में शौचालय का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।

सिंचाई के लिए आधा भी नहीं प्रावधान

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज भी 38.27 प्रतिशत जमीन असिंचित है, इससे जुड़े किसानों को पानी पहुंचाने के लिए सरकार ने कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं रखी है। प्रदेश में सिंचाई के लिए 10928 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह बजट का 5.34 प्रतिशत है। इस साल बारिश कम हुई, ऐसे में सिंचाई योजनाओं के लिए कम से इससे दोगुना प्रावधान करना आवश्यक था, लेकिन शिवराज सरकार की ऐसी मंशा ही नहीं है कि प्रदेश का किसान खुशहाली की दिशा में आगे बढ़े।

निवेश के नाम पर पैसे की बर्बादी

उन्होंने कहा कि इस बजट में एक बार फिर निवेश प्रोत्साहन के नाम पर 800 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पहले भी निवेश को आकर्षित करने के लिए करोड़ों रुपए बर्बाद किए गए हैं। सरकार को बताना चाहिए कि जमीनी स्तर पर कितने नए उद्योग प्रदेश में आए। इसके अलावा उद्योग संवर्धन के नाम पर भी 1158 करोड़ रुपए खर्च करना तय किया गया है, जो आखिरकार सरकार के कार्यक्रमों के विज्ञापन से ज्यादा साबित नहीं होगा।उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला और बच्चों की स्थिति बेहद खराब है। इसके बावजूद महिला एवं बाल विकास के लिए महज 3722 करोड़ यानी 1.82 प्रतिशत का प्रावधान किया है।

उपचुनाव के नतीजों से सबक ले भाजपा

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने बजट के अलावा उपचुनाव के नतीजों पर कहा कि इन नतीजों से सत्ता के मद में चूर भाजपा सरकार को सबक लेना चाहिए कि चुनाव को धनबल से नहीं जीता जा सकता है। अपनी पूरी सरकार को उपचुनाव के प्रचार में लगाने, पानी की तरह पैसा बहाने और सत्ता बल के खुले प्रयोग के बावजूद जनता ने शिवराज सरकार को नकार दिया है। इससे साफ है कि प्रदेश की जनता अब भाजपा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी और अगले चुनाव में उसे सत्ता से बेदखल कर देगी।

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sudhir