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अरविंद केजरीवाल को शिखर सम्मेलन में जाने की मंजूरी देने से विदेश मंत्रालय का इन्कार दिल्ली के लोगों का अपमान है: राघव चड्ढा

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कोपेनहेगन में C-40 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली सरकार के प्रतिनिधिमंडल को राजनीतिक मंजूरी से इनकार करने पर केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर के बयान पर निम्नलिखित प्रतिक्रिया जारी की है:

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शिखर सम्मेलन में जाने की मंजूरी देने से विदेश मंत्रालय के इन्कार के बारे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जो बयान दिया है, वह गलत और भ्रामक है। प्रकाश जावड़ेकर ने कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन को महापौर सम्मेलन कहा है और इसीलिए दिल्ली सरकार के प्रतिनिधिमंडल को विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी न देने की बात कही है।
C40 जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध दुनिया के सबसे बड़े शहरों का एक समूह है। श्री जावड़ेकर की ओर से बताए गए तर्क की जांच की जाए। श्री जावड़ेकर ने बोलने से पहले अपने तथ्यों की जाँच कर लेनी चाहिए थी। उन्हें पता होना चाहिए कि 2007 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री, स्वर्गीय शीला दीक्षित ने C40 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। वह कार्यक्रम न्यूयॉर्क में आयोजित किया गया था। उस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के विभिन्न महापौरों और मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया था।

श्री जावड़ेकर प्रमुख शहरों और शहरों के राज्यों के प्रशासनिक ढांचे से स्पष्ट रूप से अनभिज्ञ हैं, उदाहरण के लिए 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों का उद्घाटन तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था, जबकि अन्य प्रमुख शहरों में इनका उद्घाटन महापौरों द्वारा किया गया था।

C40 जैसे बहुपक्षीय शिखर अपने आमंत्रित अतिथियों को सावधानीपूर्वक चुनते हैं। क्या श्री जावड़ेकर यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि वह इस शिखर सम्मेलन के आयोजकों से अधिक जानते हैं, जबकि इसमें लगभग 100 प्रमुख शहर हिस्सा ले रहे हैं।

भाजपा अपने राजनीतिक इरादों को छिपाने के लिए व लोगों को गुमराह करने की भ्रमित बयान दे सकता है। भाजपा को पता होना चाहिए कि जिन शहरों को आमंत्रित किया गया है, उनके महापौरों के पास दिल्ली के निर्वाचित मुख्यमंत्री की तुलना में अधिक शक्तियां हैं, हालांकि उनकी भूमिकाएं कमोबेश समान हैं।

अगर मुख्यमंत्री को C40 शिखर सम्मेलन को संबोधित करने की अनुमति दी गई होती तो दुनिया के प्रमुख शहरों को पता चलता कि पिछले पांच वर्षों के दौरान दिल्ली ने 25% वायु प्रदूषण को कैसे कम किया।

क्या श्री जावड़ेकर यह बताएंगे कि उप मुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया को एमईए द्वारा अगस्त में मास्को में विश्व शिक्षा सम्मेलन में भाग लेने के लिए बुलाया गया था तब मंजूरी क्यों नहीं दी गई और स्वास्थ्य मंत्री श्री सत्येन्द्र जैन को मोहल्ला क्लीनिकों पर बात करने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने से क्यों मना किया गया?

प्रतिनिधि मंडल को जाने की अनुमति नहीं देकर केंद्र सरकार ने दिल्ली के लोगों का अपमान किया है। दिल्ली के लोगों के प्रति अवमानना ​​का ऐसा प्रदर्शन संघीय राजनीति के लिए अच्छा नहीं है।

भाजपा की केंद्र सरकार का यह निर्णय दिल्ली के लोगों और उनकी चुनी हुई सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रह को दर्शाता है। AAP अपने मार्ग में बाधाओं के बावजूद लोगों के मुद्दों को उठाती रहेगी।

दुर्भाग्य से यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री या मंत्री को एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी से वंचित किया गया है, मंजूरी मिली होती तो वह निश्चित रूप से देश के लिए वैश्विक प्रसिद्धि और सद्भावना लाती।

मास्को के विश्व शिक्षा सम्मेलन में बोलने के लिए उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को आमंत्रित किया गया था, जो शिक्षा क्षेत्र में दिल्ली के अभूतपूर्व सुधारों को दर्शाता । दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने पांच साल की छोटी अवधि में बुनियादी ढांचे, सीखने के स्तर, अभिभावकों की भागीदारी आदि में आश्चर्यजनक बदलाव के लिए दुनिया भर में प्रतिष्ठा हासिल की है।

सरकार के हैप्पीनेस करिकुलम को सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों जैसे वाशिंगटन पोस्ट, द स्ट्रेट्स टाइम्स, द गार्जियन, आदि से व्यापक कवरेज प्राप्त हुई है। दिल्ली में इन सुधारों को आगे बढ़ाने वाले भारतीय नेता के रूप में, मनीष सिसोदिया को पहली बार 2018 में शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। । केंद्र सरकार ने उस वर्ष भी अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन जब मनीष सिसोदिया ने इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाया, तो अंततः उनकी यात्रा को अनुमति दे दी गई थी।

हालांकि, अगस्त 2019 में, जब उन्हें उसी सम्मेलन के लिए मास्को में दिल्ली सरकार के उद्यमिता पाठ्यक्रम पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया, तो विदेश मंत्रालय ने मंजूरी नहीं दी। केंद्र सरकार ने उसी का कारण साझा करने से भी इनकार कर दिया था।

इसी प्रकार स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को नवंबर 2018 में मेलबर्न विश्वविद्यालय में मोहल्ला क्लीनिक और दिल्ली में स्वास्थ्य क्रांति पर एक सत्र को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। सतेंद्र जैन को विक्टोरिया राज्य के साथ संलग्न करने के लिए दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था लेकिन उन्हें भी इजाजत नहीं मिली थी।

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firoz

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