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देश की जनता ने की चौराहे पर चर्चा, अपने ही वादे को भूल..नहीं आए PM मोदी

PR/AAP/National/02Jan17

देश की जनता ने की चौराहे पर चर्चा, अपने ही वादे को भूल..नहीं आए PM मोदी

नोटबंदी के दुष्परिणामों पर PM के साथ चर्चा करना चाहती है देश की जनता ग

जनता ने आदेश पत्र जारी कर सांकेतिक तौर पर नरेंद्र मोदी को किया PM पद से बर्खास्त

सोमवार को देश की जनता के साथ आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी देशभर के प्रमुख चौराहों पर इकठ्ठा हुए ताकि नोटबंदी के दुष्परिणामों पर प्रधानमंत्री जी के साथ चर्चा कर सकें, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अपने ही द्वारा किए गए वादे को भूलते हुए जनता से संवाद करने नहीं पहुंचे और देश की जनता ने एक आदेशपत्र जारी करते हुए श्री नरेंद्र मोदी जी को सांकेतिक तौर पर देश के प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है।

आपको बता दें कि खुद प्रधानमंत्री जी ने ही देश की जनता से 50 दिन की मांग करते हुए यह वादा किया था कि अगर इन 50 दिन में हालात ना बदलें तो देश के किसी भी चौराहे पर देश की जनता द्वारा दी जाने वाली सज़ा को स्वीकार करने वो आएंगे।

देश की जनता इतनी निर्दयी नहीं है कि वो अपने पीएम को सज़ा दे लेकिन जनता संवाद ज़रूर करना चाहती है। लेकिन अफ़सोस कि देश के प्रधानमंत्री जी अपने ही वादे को भूल गए हैं और अब मुंह छुपाते फिर रहे हैं।

दिल्ली की सभी 70 विधानसभाओं में और देशव्यापी स्तर पर अलग-अलग राज्यों के सभी ज़िला मुख्यालयों पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और देश की जनता ‘चौराहे पर चर्चा’ करने के लिए इकठ्ठा हुई थी। जनता प्रधानमंत्री जी से यह जानना चाहती है कि इन 50 दिनों में देश ने क्या खोया और क्या पाया? जनता जानना चाहती है कि देश से भ्रष्टाचार कितना कम हुआ? देश से कालाधन कितना कम हुआ? आतंकवाद कितना खत्म हुआ? नकली नोट कितने खत्म हुए? देश की अर्थव्यवस्था ने कितनी उड़ान भरी या फिर अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है?  

दिल्ली के ही एक व्यस्ततम चौराहे पर जनता की इस चर्चा का हिस्सा बनने पहुंचे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने खुद गोवा में आयोजित हुए एक कार्यक्रम में कहा था कि देश की जनता उन्हें सिर्फ़ 50 दिन दे और उसके बाद देश की सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। लेकिन हक़ीकत यह है कि आज भी ग़रीब आदमी बैंकों की लाइनों में खड़ा है, बाज़ार में नए नोटों की भारी कमी है, अपने ही पैसे निकालने को लेकर सरकारी प्रतिबंध आज भी लगे हुए हैं, नोटबंदी की वजह से डेढ़ सौ लोगों ने अपनी जान गंवा दी है, लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं, करोड़ों लोगों के काम-धंधे चौपट हो गए हैं और वो आज दो वक्त की रोटी खाने को भी तरस रहे हैं, हज़ारों शादियां टूट गई हैं और देश की अर्थव्यवस्था ढलान पर है। इन्हीं सब पर देश की जनता अपने प्रधानमंत्री जी से बात करना चाहती है लेकिन वो बात करने को तैयार ही नहीं हैं’

‘प्रधानमंत्री जी ने ख़ुद कहा था कि अगर 50 दिन में देश के हालात ठीक ना हों तो जनता जिस चौराहे पर कहेगी उस चौराहे पर जनता जो सज़ा देगी वो सज़ा को स्वीकार्य करने को तैयार रहेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री जी आज अपने ही वादे से मुकर गए हैं, हम प्रधानमंत्री जी से कहना चाहते हैं कि जनता इतनी निर्दयी नहीं है कि अपने प्रधानमंत्री को सज़ा दे लेकिन जनता संवाद करना चाहती है सर, और आपसे जवाब लेना चाहती है। देश का कोई भी चौराहा चुनने का प्रस्ताव भी देश की जनता ने हाल ही में मीडिया के अलग-अलग मंचों के माध्यम से प्रधानमंत्री जी के सामने रखा था लेकिन मोदी जी का कोई जवाब ही नहीं आया। अब देश की जनता अपने-अपने इलाकों में अलग-अलग चौराहों पर प्रधानमंत्री जी का इंतज़ार कर रही है ताकि किसी एक चौराहे पर तो प्रधानमंत्री जी जनता से बात करने के लिए आ जाएं लेकिन अफ़सोस कि वो जनता का सामना ही नहीं करना चाहते’

‘प्रधानमंत्री जी ने देश से वादा किया था कि नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा, कालाधन खत्म हो जाएगा, आतंकवाद की कमर टूट जाएगी, नकली नोटों का गोरखधंधा जड़ से खत्म हो जाएगा और देश की अर्थव्यवस्था समेत देश की जनता को भारी लाभ होगा। लेकिन बड़े अफ़सोस से कहना पड़ रहा है कि इन सभी मोर्चों पर स्थितियां ठीक होने कि बजाए बद से बदतर होती जा रही हैं। देश के प्रधानमंत्री देश की जनता को यह बताने को भी तैयार नहीं हैं कि जनता कौन-सी तारीख़ से पहले की तरह अपने पैसे बैंकों से निकलवा पाएगी और सामान्य जीवन जी पाएगी।

‘देश की स्थितियां जब ठीक होती नहीं दिख रही थीं तो भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपना गोल-पोस्ट बदल लिया और देश की जनता के हाथ में कैशलेस का झुनझुना पकड़ा दिया। बिना पर्याप्त ढांचे के आज देश की जनता को ज़बरदस्ती डिजिटल पेमेंट के उस रास्ते पर लाने की कोशिश की जा रही है जहां कमज़ोर तकनीक के चलते जनता अपना ही पैसा डिजिटल तरीके से गंवा रही है। आर्थिक बवंडर की इस स्थिति में ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने वाले लोगों की कोई सुनने वाला भी नहीं है।

पेटीएम जैसी चीनी कम्पनियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए देश के प्रधानमंत्री खुद उनके विज्ञापन करने में व्यस्त हैं और उनका साथ देने के लिए उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी देश की जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए पेटीएम के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं लेकिन जनता के पैसों की डिजिटल सुरक्षा के बारे में ना प्रधानमंत्री बात करते हैं और ना ही उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता।‘

‘देश की जनता देश के उस प्रधानमंत्री से नोटबंदी के परिणामों और दुष्परिणामों पर बात करना चाहती है जिस प्रधानमंत्री ने छाती ठोककर पचास दिन मांगे थे। लेकिन अफ़सोस कि आज प्रधानमंत्री जी जनता से मुंह छिपाते हुए फिर रहे हैं’

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