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चौराहा ख़ुद तय कर लें PM मोदी, देश की जनता से सज़ा पाने के लिए रहें तैयार

PR/AAP/50DaysOfDemonetisation/28Dec

नोटबंदी के 50 दिन हुए पूरे, समस्याएं कम होने कि बजाए बढ़ रही हैं

चौराहा ख़ुद तय कर लें PM मोदी, देश की जनता से सज़ा पाने के लिए रहें तैयार

नोटबंदी की वजह से हुईं मौतों और उजड़ते परिवारों की ज़िम्मेदारी लेने से क्यों भाग रही है मोदी सरकार?

नोटबंदी की वजह से देश आर्थिक बर्बादी की तरफ़ बढ़ रहा है लेकिन मोदी सरकार की तरफ़ से इसकी कोई ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। तारीख़ के अनुसार नोटबंदी को 50 दिन पूरे हो गए लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुईं हैं। प्रधानमंत्री साहब ने ख़ुद कहा था कि '50 दिन बाद अगर कोई कमी रह जाए तो जिस चौराहे पर कहोगे उस चौराहे पर आकर जनता जो सज़ा देगी वो स्वीकार करूंगा'। हम प्रधानमंत्री जी को याद दिलाना चाहते हैं कि 50 दिन पूरे हो चुके हैं और प्रधानमंत्री जी अब चौराहा ख़ुद तय कर लें। देश अभी भी गहरी पीड़ा में है और वो पीड़ा कम होने की बजाए बढ़ती ही जा रही है।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में आयोजित हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि "नोटबंदी को 50 दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन देश की जनता अभी भी उसी आर्थिक बवंडर में फंसी हुई है और उससे निकलने का रास्ता भी नज़र नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 13 नवम्बर को ख़ुद कहा था कि 'उन्हें 50 दिन का वक्त देश की जनता दे उसके बाद देश से काला धन ख़त्म हो जाएगा, भ्रष्टाचार ख़त्म हो जाएगा, आतंकी गतिविधियां हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगीं और नकली नोट बाज़ार से ख़त्म हो जाएंगे और भारतीय में राम राज्य स्थापित हो जाएगा। और अगर इसके बाद भी सरकार की कोई कमी रह जाए या सरकार ग़लत साबित हो जाए तो जनता जिस चौराहे पर कहेगी उस चौराहे पर आकर प्रधानमंत्री जी देश की जनता द्वारा दी जाने वाली सज़ा को स्वीकार करेंगे' हम प्रधानमंत्री जी से कहना चाहते हैं कि वो अब चौराहा ख़ुद तय कर लें। क्योंकि जनता अभी भी उसी पीड़ा में है जिस पीड़ा को वो पिछले 50 दिन से सहन कर रही है और देश की जनता को यह पीड़ा मोदी सरकार ने ही दी है"

"नोटबंदी की वजह से सौ से ज़्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं, लाखों करोड़ों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं, काम-धंधे चौपट हो चुके हैं, उद्योग-धंधे बंद हो गए हैं, किसानों की फ़सलें ख़राब हो गई हैं, हज़ारों की संख्या में शादियां टूट चुकी हैं और पूरा देश आर्थिक ढलान की तरफ़ अग्रसर है। इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री जी 10 दिसम्बर को कहते हैं कि 'छोटी-मोटी तकलीफ़ ज़रूर होंगी'। हम मोदी जी से पूछना चाहते हैं कि उन्हें यह तकलीफ़ें छोटी लग रही हैं? हम मोदी सरकार से कुछ प्रश्न पूछना चाहते हैं

1. नोटबंदी की वजह से देश में सौ से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं, आज तक प्रधानमंत्री जी ने संवेदना का एक शब्द अपने श्रीमुख से नहीं निकाला है। इन मौतों की ज़िम्मेदारी कौन लेगा? आज से पहले तक मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी को दलित विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी माना जाता रहा है लेकिन क्या अब यह भी मान लिया जाए कि मोदी जी और BJP नागरिक विरोधी भी हैं?

2. उत्तर प्रदेश और बिहार से दिहाड़ी मज़दूरी करने आए लाखों लोगों की नौकरियां इस नोटबंदी की वजह से जा चुकी हैं, उद्योग-धंधे बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं, लोग भूखो मरने की कगार पर पहुंच चुके हैं, इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

3. किसानों की ख़रीफ़ की फ़ैसलें ख़राब हो गईं क्योंकि खरीदार ही नहीं था और अब रबी की फ़सल के लिए भी बीज खरीदने के पैसे नहीं है। किसानों की हालत पहले से ज़्यादा दयनीय हो गई है, किसानों की आत्महत्याएं पहले से ज़्यादा बढ़ गई हैं। इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

4. देश में हज़ारों की संख्या में शादियां टूट चुकी हैं। लोगों के पारिवारिक और सामाजिक तानेबाने की डोर ना केवल कमज़ोर हुई है बल्कि शादी करने जा रहे युवाओं के भविष्य में भी अंधकार पैदा करने का काम इस नोटबंदी ने किया है। इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

5. अब अगर भविष्य में देश में कोई भी आतंकी गतिविधियां पेश आती हैं या फिर नकली नोट पकड़े जाते हैं तो क्या प्रधानमंत्री जी इस्तीफ़ा देंगे?

उपरोक्त सभी परेशानियां सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी की नोटबंदी की वजह से ही हुई है। मोदी सरकार ना केवल इसकी ज़िम्मेदारी ले बल्कि उनके अपने कथन के अनुसार वो ख़ुद तय कर लें कि जनता की तरफ़ से दी जाने वाली सज़ा को पाने के लिए वो किस चौराहे पर आ रहे हैं। 

 

 

PR/AAP/DonationIssue/28Dec

AAP को मिले चंदे के नाम पर देश को भ्रमित कर रही है BJP

AAP की छवि खराब करने के मक़सद से पिछले 3 साल से बिना सुबूतों के झूठे आरोप लगा रही है BJP

आर्थिक पारदर्शिता रखने वाला AAP देश का एकमात्र राजनीतिक दल

भारतीय जनता पार्टी अपने पुराने हथकंडे से एक बार फिर आम आदमी पार्टी की छवि ख़राब करने की कोशिश कर रही है। ग़ैरकानूनी तौर पर विदेशों से मिले चंदे का झूठा आरोप लगाकर बीजेपी फिर से आम आदमी पार्टी की छवि को ख़राब करने की वही कोशिश कर रही है जो उसने साल 2013  और 2015 के दिल्ली चुनाव से पहले की थी। सुबूत बीजेपी के पास हैं नहीं और वो सिर्फ़ जनता का गुमराह करने और झूठ फैलाने का काम कर रही है जिसे करने के लिए अब वो नए-नए लोगों को भी सामने ला रही है।

पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने कहा कि 'भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के पास सारी एजेंसियां हैं, IT से लेकर CBI, ED और पुलिस तक लेकिन बीजेपी सिर्फ़ आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी को बदनाम करने का वही पुराना काम कर रही है जो वो पिछले तीन साल से करती आई रही है। चंदे के नाम पर आरोप तो लगाए जा रहे हैं लेकिन कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हक़ीकत यह है कि बीजेपी और उनके साथियों के पास कोई सुबूत हैं ही नहीं । हर बार चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी की छवि ख़राब करने के लिए इस तरह के हथकंडे को अपनाया जाता है ताकि पब्लिक में झूठ फैलाकर एक भ्रम पैदा किया जा सके।

' जबकि दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस खुद विदेशों से ग़ैरकानूनी ढंग से चंदा लेती है और यह बात खुद माननीय दिल्ली हाई कोर्ट  ने कही है, बावजूद इसके वो अपनी पार्टियों के खातों की जांच कराने को कभी तैयार नहीं होते। बिना सुबूतों के झूठे आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी की छवि ख़राब करने की साज़िश भारतीय जनता पार्टी और उससे कुछ सहयोगी कर रहे हैं।'

'आम आदमी पार्टी अपना 92 प्रतिशत चंदा बैंकिंग के माध्यम से लेती है और सिर्फ़ 8 प्रतिशत चंदा ही नकद लिया जाता है और उसे भी पूरी जानकारी के साथ बैंक में जमा करा दिया जाता है। हम भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी को भी चुनौती देते हैं कि वो भी अपने चंदे का हिसाब उसी प्रकार से दें जैसे आम आदमी पार्टी देती है।'

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