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किसान कंगाल, मज़दूर बेहाल, भाजपा के यार हैं मालामाल, जुमला सरकार के तीन साल

किसान कंगाल, मज़दूर बेहाल, भाजपा के यार हैं मालामाल, जुमला सरकार के तीन साल
 
अर्थव्यवस्था के हर पैमाने पर भाजपा सरकार फ़ेल, अपने करीबी उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचा रही है सरकार
 
 
देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बने तीन साल हो गए हैं लेकिन हक़ीक़त यह है कि अर्थव्यवस्था के हर पैमाने पर भाजपा सरकार फ़ेल साबित हुई है। देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन सरकार अपने कुछ बेहद क़रीबी उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचा रही है।
 
आप कार्यालय में आयोजित हुई प्रैस कॉंफ्रैंस में बोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि जिस तरह से देश की सरकार के तीन साल पूरे होने पर जश्न मनाया जा रहा है वो हक़ीक़त में जश्न मनाने के काबिल नहीं है। आंकड़े उठाकर देखें तो हर मोर्चे पर देश की भाजपा सरकार बुरी तरह से फ़ेल साबित हुई है। कैसे बीजेपी की सरकार के आने के बाद सिर्फ़ बीजेपी के कुछ चुनिंदा उद्योगपति दोस्तों को फ़ायदा पहुंचाया जा रहा है। देश में तीन साल से भाजपा सरकार है और अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है, तो आप समझ सकते हैं कि भ्रष्टाचार के मसले पर इनकी राय क्या है। व्यापम घोटाले में शिवराज सिंह चौहान हों या फिर दूसरे मामलों में वसुंधरा राजे हों, किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
 
अडानी ग्रुप पर 72 हज़ार करोड़ का जो लोन बकाया है उसको वापस लेने की कोई कोशिश केंद्र की भाजपा सरकार की तरफ़ से होती नहीं दिख रही है। तकरीबन इतना ही यानि 72 हज़ार करोड़ रुपए देश के किसानों पर भी लोन बकाया है और अगर देश की भाजपा सरकार किसानों के बारे में भी थोड़ा सोच ले तो देश का अन्नदाता आत्महत्या नहीं करेगा लेकिन अफ़सोस कि भाजपा सरकार किसानों के बारे में ना सोचती है और ना ही कुछ करती है।
 
सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि कैसे केंद्र सरकार ने अडानी और अंबानी की कम्पनियों को नियमों से परे जाकर फ़ायदा पहुंचाया है जिसमें सरकार को 5 हज़ार करोड़ का नुकसान हुआ है। अडानी और अम्बानी के फ़ायदे के रास्ते में अगर कोई नियम या कानून आता भी है तो उस नियम-कानून को हटा दिया जाता है या फिर बदल दिया जाता है।
 
आजकल एक नए व्यापारी हुए हैं उनका नाम है बाबा रामदेव। सरकार की तरफ़ से उनको 2 हज़ार एकड़ ज़मीन उपहार में दे दी गई है, क्यों ये ज़मीन बाबा रामदेव को दी गई इसका कारण किसी को नहीं पता। पिछले तीन साल में बाबा रामदेव के व्यापार में ज़बदस्त उछाल आया है और अब तो वो 10 हज़ार करोड़ रुपए के टर्नओवर का टारगेट लेकर चल रहे हैं। कौन सा योगा सिखाते हैं इसका तो नहीं पता लेकिन वो अपना व्यापार भाजपा सरकार की मदद से बहुत अच्छे से और तेज़ी से बढ़ा ज़रूर रहे हैं।
 
केंद्र की भाजपा सरकार ने अडानी के लिए 370 एकड़ जंगल की ज़मीन का आवंटन कर दिया। देश की सरकार के लिए अगर देश का किसान मरता है तो मरे लेकिन अडानी और अंबानी के लिए सारे दरवाज़े खुले हैं और अगर कोई रास्ते में आएगा तो उसे रास्ते से हटा दिया जाता है, जैसे आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को हटाया गया, उनकी जगह गुजरात के ही उर्जित पटेल को लाकर आरबीआई गवर्नर के पद पर बिठा दिया है और पूरा देश जानता है कि वो किसके हक़ में और क्यों काम कर रहे हैं।
 
तमिलनाडु के किसानों ने लम्बे समय तक जंतर-मंतर पर आंदोलन किया लेकिन देश के प्रधानमंत्री को इन किसानों की तरफ़ देखने की फुर्सत तक नहीं मिली। ये हाल तो तब है जब खुद भाजपा ने अपने मैनिफैस्टो में ये वादा किया था कि सरकार बनने के बाद उनकी प्राथमिकता किसान और खेती रहेगी।
 
भाजपा सरकार के वक्त भारत देश में 7 अरबपतियों के पास उतनी सम्पत्ति है जितनी देश की 70 प्रतिशत आबादी के पास है। उद्योगपतियों का 4.6 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ माफ़ किया गया है। हमें उद्योगपतियों से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन अगर उद्योगपतियों का लोन माफ़ हो सकता है तो किसानों का भी होना चाहिए।
 
किसानों की आत्महत्या की बात करें तो साल 2014 में 12,360 किसानों ने आत्महत्या की और साल 2015 में 12,602 किसानों के आत्महत्या की है। वर्तमान केंद्र सरकार देश के अन्नदाता की नहीं सुन रही है लेकिन भाजपा सरकार को अपने उद्योगपति दोस्तों की ज्यादा चिंता है। इसलिए हम कह रहे हैं तीन साल जुमला सरकार
 
 
 
 
 
 
लोकतंत्र को बचाने के लिए पूरी तरह मशीन से छेड़छाड़ की इजाजत दे चुनाव आयोग: AAP
 
 
 
चुनाव आयोग ने 3 जून को मशीन को हैक करने की चुनौती तो दी है लेकिन ये चुनौती तब तक बेकार है जब तक कि मशीन को छेड़ने की अनुमति चुनाव आयोग नहीं दे देता। आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर चुनाव आयोग को ख़त लिखकर यह कहा कि है कि हम चुनाव आयोग के बंदोबस्त में पूरी सुरक्षा के बीच आयोग की मशीन को टैम्पर करके दिखा देंगे बशर्ते हमें मशीन के हार्डवेयर के साथ छेड़छाड़ की इज़ाज़त दी जाए और हैकाथॉन का सही तरीका भी यही है।  
 
पार्टी कार्यालय पर आयोजित हुई प्रैस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी वरिष्ठ नेता एंव दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने कहा कि हम चुनाव आयोग का सम्मान करते हैं और इस देश के लोकतंत्र की संचालक शक्ति चुनाव आयोग में ही निहीत हैं लेकिन हैकाथॉन के नाम पर जो प्रदर्शनी लगाने का काम चुनाव आयोग कर रहा है उससे ईवीएम पर उठे सवालों का कोई समाधान नहीं निकलने वाला।
 
हमने 24 तारीख़ को यह बात चुनाव आयोग के समक्ष रखी थी कि हमें ईवीएम को टैम्पर करने की पूरी छूट दी जाए जिसके जवाब में कल चुनाव आयोग ने कहा है कि हम ईवीएम को टैम्पर करने के लिए किसी भी प्रकार का टूल इस्तेमाल नहीं करने देंगे, मशीन को छूने नहीं देंगे। हम चुनाव आयोग को कहना चाहते हैं कि किसी इंजीनियर को जादू तो आता नहीं है कि वो आंखो के जादू से मशीन को हैक कर लेगा।
 
इसीलिए हम दोबारा चुनाव आयोग को चिठ्ठी भेज रहे हैं जिसमें हमने लिखा है कि आखिर चुनाव आयोग को ईवीएम को छेड़ने से क्या आपत्ति हो रही हैहमारे एक साथी विधायक सौरभ भारद्वाज ने विधानसभा में यह डैमो करके दिखाया था कि कैसे मदरबोर्ड चेंज करके मशीन को टैम्पर किया जाता है और वोट ट्रांसफ़र की जाती हैं।
 
हम चुनाव आयोग से कहना चाहते हैं कि आयोग के अधिकारी, एक्सपर्ट के सामने, पुलिस के सामने, केंद्र सरकार के अधिकारियों के सामने, आयोग के ही घेरे में हमारे इंजीनियर को ईवीएम देने में आयोग को डर किस बात का लग रहा हैदुनियाभर में हैकाथॉन कराने के कुछ पैरामीटर्स हैं लेकिन चुनाव आयोग उन पैरामीटर्स को फॉलो करने के लिए भी तैयार नहीं है।
 
चुनाव आयोग को यह सोचना चाहिए कि अगर ईवीएम पर उठे सवालों का संदेह देश की जनता के मन से नहीं गया तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा ख़तरनाक है क्योंकि चुनाव में लाखों लोग मेहनत करते हैं पसीना बहाते हैं और करोड़ों-अरबों रुपया खर्च होता है लेकिन अगर ईवीएम की सेटिंग से वोट ट्रांसफ़र किए जाते रहे तो ये देश के लोकतंत्र के लिए बेहद ही गंभीर मसला है
 
 
  
प्रेस कॉंफेंस में मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा कि देश-विदेशों में काम कर रहे भारतीय पृष्ठभूमि के करीब डेढ़ दर्जन इंजीनियर्स और टैक्नोक्रेट्स ने मिलकर भारत के चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर यह बताया है कि ईवीएम पर उठे सवाल बेहद ही गंभीर हैं क्योंकि ईवीएम टैम्पर-प्रुफ़ नहीं हैं। ये सारे टैक्नोक्रेट्स ईवीएम से जुड़े सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के एक्सपर्ट हैं और ये सभी ये मान रहे हैं कि ईवीएम को आसानी से कोई भी थोड़ी बहुत तकनीक की जानकारी रखने वाला इंसान टैम्पर करके किसी के भी पक्ष में वोट डलवा सकता है।
 
 
ये सभी इंजीनियर्स भारत की पृष्ठभूमि से हैं और भारतीय लोकतंत्र के प्रति इनकी चिंता ही है कि ये लोग सीधा चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस ख़तरे से अवगत करा रहे हैं। ये लोग दुनियाभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और दूसरे शिक्षण संस्थानों में पढ़ा रहे हैं या फिर इस विषय पर शोध कर रहे हैं और इस विषय के एक्सपर्ट हैं लिहाज़ा ये लोग भारत के चुनाव आयोग को इस ख़तरे से अवगत करा रहे हैं अब चुनाव आयोग पर निर्भर करता है कि वो इनकी इस बात पर ग़ौर करता है या फिर नहीं।

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