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कांग्रेस-बीजेपी को खुली चुनौती, जंतर-मंतर पर जनता के सामने रखें अपनी-अपनी पार्टियों का बही खाता, हम तैयार हैं: AAP

AAP/PR/Nat/24Dec2016

कांग्रेस का 80 प्रतिशत और बीजेपी का 70 प्रतिशत चंदा बेनामी स्रोतों से नक़द में आता है: AAP

भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष को आम आदमी पार्टी की खुली चुनौती है कि वो अपनी पार्टियों के बही खातों को लेकर जंतर-मंतर पर आएं और जनता के सामने सारे खातों को रखें। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरविंद केजरीवाल जनता के समक्ष अपनी पार्टियों के बही खातों को रखने के लिए तैयार है लेकिन क्या बीजेपी और कांग्रेस पार्टियां ऐसा करेंगी?

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एंव राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि ‘जनता को यह जानने का पूरा हक़ है कि कौन सा राजनीतिक दल ईमानदारी के पैसे से चुनाव लड़ता है और कौन सा राजनीतिक दल बेइमानी के पैसे से चुनाव लड़ता है। जनता को यह पता चलना चाहिए कि कौन सा राजनीतिक दल वित्तीय पारदर्शिता के साथ अपने चंदे का पूरा हिसाब-किताब रखता है और कौन से राजनीतिक दलों को बेनामी स्रोतों से चंदा मिलता है। क्यों ना यह सारी जानकारी जनता के सामने रखें और फिर जनता तय करे कि कौन सा राजनीतिक दल सही है और कौन सा ग़लत।‘

‘कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह छपा है कि आम आदमी पार्टी का 92 प्रतिशत चंदा बैंक के माध्यम से आता है (यानि, चेक या फिर डिजिटल तरीक़े से) और सिर्फ़ 8प्रतिशत चंदा ही नकद में लिया जाता है और पार्टी की नीतिगत व्यवस्था के तहत उस नकद चंदे को भी पूरी जानकारी के साथ बैंक में जमा करवा दिया जाता है। हम अपने दानदाताओं की पूरी जानकारी और बही खाता बनाते हैं, चाहे वह Rs.10 का ही दान क्यों न हो। लेकिन दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी का 70 प्रतिशत चंदा बेनामी स्रोतों से आता है और कांग्रेस पार्टी का 80 प्रतिशत चंदा बेनामी स्रोतों से आता है। इन दोनों ही पार्टियों को यह पता ही नहीं है कि ये चंदा इनको कौन दे जाता है और वो भी नक़द। दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस और बीजेपी को अवैध तरीके से एक विदेशी कम्पनी से फंडिंग लेने का दोषी पाया है तो दूसरी तरफ़ सीआईसी ने इन राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लाने की सिफ़ारिश की है लेकिन ये दोनों ही पार्टियां सीआईसी के इस ऑर्डर से भी भाग रही हैं।‘

‘जिन लोगों का स्विस बैंक में खाते हैं और उन लोगों ने अपने उन खातों में कालाधन जमा  करके रखा है वो लोग भी बीजेपी-कांग्रेस को चंदा देते हैं। सुप्रीम कोर्ट को दी गई स्विस बैंक खाताधारकों की लिस्ट में उन लोगों के नाम मौजूद हैं जो बीजेपी और कांग्रेस को चंदा देते हैं, मतलब ये कि दोनों ही पार्टियां कालेधन और भ्रष्टाचार के पैसे से चुनाव लड़ती हैं और इसीलिए हिसाब-किताब देने से भागती आई हैं।

 

AAP के दानदाताओं का आयकर विभाग के अधिकारी कर रहे हैं उत्पीड़न

आम आदमी पार्टी को मिलने वाले चंदे के रोकने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार अपने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए आम आदमी पार्टी को चंदा देने वाले लोगों का उत्पीड़न कर रही है ताकि आम आदमी पार्टी को होने वाली डोनेशन बंद हो सके। आम आदमी पार्टी की वेबसाइट से हमारे दानदाताओं की जानकारी लेकर आयकर विभाग के अधिकारी उन लोगों को ना केवल नोटिस भेज रहे हैं बल्कि दान देने वाले लोगों से पूछताछ करते हुए उन्हें डराया और धमकाया जा रहा है ताकि वो लोग भविष्य में कभी आम आदमी पार्टी को चंदा ना दें।

पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉंफ्रेंस करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि ‘आज की तारीख़ में भारतीय जनता पार्टी केंद्र सरकार की सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए आम आदमी पार्टी को चंदा देने वाले लोगों का उत्पीड़न कर रही है। हम पार्टी की वेबसाइट पर हर दानदाता की जानकारी डालते थे और यह पूरी तरह से ऑटोमेटिड था। अगर कोई 10 रुपए भी पार्टी को चंदा देता था तो उसकी जानकारी तुरंत वेबसाइट पर आ जाती थी। हमने यह प्रयास लोकतंत्र को मज़बूत और राजनीतिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए किया था लेकिन इसका दुरुपयोग सरकारी तंत्र की तरफ़ से ही होने लगा।‘

‘हमारे कुछ दानदाताओं ने हमें जानकारी दी कि आयकर विभाग की तरफ़ से उन्हें ना केवल नोटिस भेजे जा रहे हैं बल्कि उन्हें पूछताछ के बहाने आयकर विभाग की तरफ़ से डराया धमकाया जा रहा है। अधिकारी उनसे एक सवाल कर रहे हैं और एक धमकी दे रहे हैं। उनसे यह पूछा जाता है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को चंदा क्यों दिया और साथ धमकाया जाता है कि अगर भविष्य में कभी आम आदमी पार्टी को चंदा दिया तो उन्हें बक्शा नहीं जाएगा। देश का आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई में से कुछ पैसा आम आदमी पार्टी को चंदे के रुप में देता है लेकिन उस व्यक्ति को अनावश्यक तौर पर परेशान किया जा रहा है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी को अपने दानदाताओं की लिस्ट बेवसाइट से हटानी पड़ी, लेकिन पार्टी अपने दानदाताओं का रिकॉर्ड लिखित में अभी भी पहले की तरह पारदर्शी तरीक़े से ही बना रही है।‘

‘आम आदमी पार्टी ने राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाया था जो लोकतंत्र को पहले से ज्यादा मजबूत करने के लिए था लेकिन भारतीय जनता पार्टी सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए लोकतंत्र की हत्या करने पर आमादा है।‘

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